Tuesday, 21 July 2026
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HAU लाठीचार्ज मामला, VC कार्यालय के पास लगाए पोस्टर:इनसो ने कहा-एक साल बाद भी न्याय नहीं मिला; रिटायर्ड IAS भी सौंप चुके रिपोर्ट

INT News21 July 2026 at 09:44 am

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCHAU), हिसार में पिछले वर्ष छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में न्याय की मांग को लेकर एक बार फिर विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। लाठीचार्ज की घटना को करीब एक साल समय बीत जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होने से नाराज छात्रों ने वाइस चांसलर (VC) कार्यालय के नजदीक पोस्टर लगाए। इंडियन नेशनल स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन (INSO) के हिसार जिलाध्यक्ष दीपक घनघस ने कहा कि जिन अधिकारियों पर लाठीचार्ज के आरोप लगे थे और जांच रिपोर्ट में भी जिनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं, उन्हें वापस ड्यूटी पर बहाल कर दिया गया है। इनसो ने कहा कि एक साल बीत गया, लेकिन न्याय अब भी अधूरा है। आखिर जांच रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय कब होगा और दोष तय होने पर कार्रवाई कब की जाएगी। छात्र केवल निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं। 10 जून को छात्रों पर हुआ था लाठीचार्ज

घटना की शुरुआत स्कॉलरशिप पॉलिसी के विरोध से हुई थी। 10 जून 2025 को छात्र अपनी मांगों को लेकर वाइस चांसलर से मिलने पहुंचे थे, जहां सुरक्षाकर्मियों के साथ उनका विवाद हो गया। छात्रों का आरोप था कि उनके साथ मारपीट की गई। इसके विरोध में जब छात्र VC आवास के बाहर पहुंचे, तो सुरक्षाकर्मियों ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में 20 से अधिक छात्र घायल हुए थे, जिनमें से 6 गंभीर रूप से घायल छात्रों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। लाठीचार्ज का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें विश्वविद्यालय के अधिकारी हाथ में लाठी लिए छात्रों के पीछे भागते नजर आए थे। प्रशासनिक लापरवाही और IAS जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निर्देश पर तत्कालीन हिसार रेंज आयुक्त (IAS) अशोक कुमार गर्ग को जांच सौंपी गई थी। IAS गर्ग द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे हुए थे। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि परिसर में सुरक्षाकर्मियों द्वारा बल प्रयोग का आदेश देना या अनुमति देना "बिल्कुल भी उचित नहीं" था और लाठीचार्ज स्थिति के अनुपात में नहीं था। तत्कालीन मुख्य सुरक्षा अधिकारी सुखबीर सिंह की भूमिका पर महीनों बीत जाने के बाद भी कोई स्पष्टता न होने को प्रशासनिक उदासीनता बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन घायल छात्रों को समय पर इलाज दिलाने में विफल रहा और मेडिकल-लीगल रिपोर्ट (MLR) तैयार करने में बाधा डालने का प्रयास किया गया। संबंधित डॉक्टर के खिलाफ भी अनुशासनहीनता की सिफारिश की गई थी।

पूर्व प्रोफेसर व अधिकारियों पर केस दर्ज हुआ था

छात्रों की शिकायत पर पुलिस ने विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी सुखबीर सिंह, प्रोफेसर राधेश्याम, रजिस्ट्रार पवन कुमार समेत अन्य संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

इसके बावजूद, छात्रों का आरोप है कि पारदर्शी और कड़े कदम उठाने के बजाय संबंधित अधिकारियों को पुनः जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। छात्र संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक दोषियों पर अंतिम कार्रवाई नहीं होती और न्याय नहीं मिलता, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।