Tuesday, 21 July 2026
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सोनीपत में कचरा प्रबंधन पर डीसी सख्त:लापरवाही पर होगी कार्रवाई; स्कूलों और सचिवालय में 4 प्रकार के डस्टबिन लगाने के आदेश

INT News21 July 2026 at 04:56 pm

सोनीपत की डीसी नेहा सिंह ने जिले में अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को गंभीरता से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपशिष्ट के संग्रहण, परिवहन, डंपिंग और प्रोसेसिंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारी या ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीसी नेहा सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार कक्ष में जिला स्तरीय एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन समिति (डीएलसीआईडब्ल्यूएम) की बैठक हुई। इस बैठक में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भोपाल नगर निगम बनाम डॉ. सुभाष चंद्र पांडे एवं अन्य मामले में दिए गए निर्देशों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। 4 प्रकार के डस्टबिन अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के आदेश डीसी ने संबंधित अधिकारियों को अपशिष्ट डंपिंग साइट और प्रोसेसिंग कार्यों का ठेकेदारों के साथ नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कार्य निर्धारित मानकों और नियमों के अनुरूप होने चाहिए। इसके अतिरिक्त, सभी स्कूलों और लघु सचिवालय में 4 प्रकार के डस्टबिन अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए। इन डस्टबिन में गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और खतरनाक/विशेष कचरा अलग-अलग डाला जाएगा। बैठक में औद्योगिक, जैव-चिकित्सा, निर्माण एवं विध्वंस, बागवानी, कृषि अवशेष, गोबर और प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन की समीक्षा भी की गई। डीसी ने संबंधित विभागों को अपने-अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन करने तथा नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। 'संबंधित ठेकेदारों का पंजीकरण अनिवार्य' उन्होंने कुंडली नगर पालिका क्षेत्र में घर-घर से एकत्र किए जा रहे अपशिष्ट की डंपिंग साइट एवं प्रोसेसिंग कार्य की जांच के लिए एसडीएम सुभाष चंद्र की अध्यक्षता में समिति गठित करते हुए शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी एमसी केंद्रीय पोर्टल पर अपना तथा संबंधित ठेकेदारों का पंजीकरण अनिवार्य रूप से करवाएं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि पंचायत की भूमि पर किसी भी ठेकेदार द्वारा कचरा न डाला जाए। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा ग्राम स्तर पर अपशिष्ट प्रबंधन निगरानी समितियों का गठन करने के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि निजी अस्पतालों के साथ बैठक कर जैव-चिकित्सा अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित कराई जाए। उन्होंने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति विद्यार्थियों एवं आमजन को जागरूक करने के लिए स्कूलों, ग्राम पंचायतों, ब्लॉक समितियों तथा शहरी क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। अधिकारियों से एक सप्ताह में मांगी सभी साइट की रिपोर्ट उन्होंने बल्क वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सभी साइट की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का प्रभावी क्रियान्वयन सभी विभागों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी लक्ष्य पूर्ण करने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अनमोल, सीटीएम सिमरन, संयुक्त आयुक्त नगर निगम मीतू धनखड़, एसीपी निधि नैन, आरओ अजय मलिक, डीडीपीओ मनीष मलिक सहित संबंधित विभागों के कार्यकारी अभियंता एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।