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उज्जैन में स्कूलों की शिफ्टिंग का विरोध:छात्राएं बोलीं- पढ़ाई और सुरक्षा पर पड़ेगा असर; कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन
उज्जैन में शासकीय बालिका विद्यालयों को दाऊदखेड़ी स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के खिलाफ छात्राएं, अभिभावक और शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन किया। मंगलवार को सभी ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि स्कूलों को शहर से दूर ले जाने से छात्राओं की सुरक्षा, पढ़ाई और नियमित उपस्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। प्रशासन ने सभी आपत्तियों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। शासकीय बालिका विद्यालयों को दाऊदखेड़ी स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को 10 स्कूलों की 2698 छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए अभिभावक और शिक्षक छात्र-छात्राएं रैली के रूप में प्रशासनिक संकुल पहुंचे। विद्यार्थियों ने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने एसडीएम एल.एन. गर्ग को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि विद्यालयों को उनके वर्तमान स्थान से नहीं हटाया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शहर के अलग-अलग इलाकों और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में छात्राएं इन विद्यालयों में पढ़ने आती हैं। यदि स्कूलों को दाऊदखेड़ी शिफ्ट किया गया, तो उन्हें रोज कई किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ेगा। इससे समय, परिवहन और सुरक्षा जैसी समस्याएं बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ेगा। आठवीं कक्षा की छात्रा काजल माली ने कहा कि स्कूल शिक्षा के लिए बनाए जाते हैं, उन्हें शहर से दूर ले जाना छात्राओं के हित में नहीं है। उनका कहना था कि लंबी दूरी के कारण कई छात्राओं को पढ़ाई छोड़ने तक की नौबत आ सकती है। आंदोलन का नेतृत्व कर रही स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस फैसले का विरोध अप्रैल महीने से लगातार किया जा रहा है। उनका तर्क है कि शिक्षा के अधिकार के तहत विद्यालयों की दूरी और छात्राओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समिति ने प्रशासन से इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की है। इस संबंध में एसडीएम एल.एन. गर्ग ने कहा कि छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा दी गई आपत्तियां प्रशासन तक पहुंचा दी गई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा कर सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा।