समाचार · पंजाब
पठानकोट में ढांगू रोड रेलवे फाटक का सिग्नल खराब:डेढ़ घंटे दो हिस्सों में बंटा रहा शहर; भीषण गर्मी में फंसे हजारों वाहन चालक
सोमवार की देर रात शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाली नैरोगेज रेलवे लाइन के ढांगू रोड स्थित फाटक का सिग्नल सिस्टम तकनीकी खराबी के कारण ठप हो गया। इस खराबी की वजह से रात करीब 9 बजे से लेकर डेढ़ घंटे तक पूरा शहर दो हिस्सों में बंट गया और दोनों तरफ वाहनों का लंबा जाम लग गया। भीषण गर्मी और उमस के बीच हजारों लोग सड़कों पर ही फंसे रहे।
फाटक के दोनों ट्रैफिक पूरी तरह रुक गया। देखते ही देखते फाटक के एक तरफ सलारिया चौक तक और दूसरी तरफ पीर बाबा चौक तक वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। रात के समय अचानक लगे इस जाम में बसे, दोपहिया वाहन, ऑटो और कई कारें फंस गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि भीषण गर्मी के बीच अचानक फाटक बंद होने से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रेलवे इंजीनियरों ने कड़ी मशक्कत के बाद ठीक किया सिग्नल
मामले की गंभीरता और सड़क पर बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए स्थानीय रेलवे प्रशासन हरकत में आया। सूचना मिलते ही रेलवे के तकनीकी विंग के इंजीनियर और कर्मचारी उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे। इंजीनियरों ने रात के अंधेरे में करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सिग्नल सिस्टम की तकनीकी खराबी को दुरुस्त किया, जिसके बाद रेलवे फाटक को खोला जा सका।
पिछले महीने भी खराब हुआ था फाटक
स्थानीय दुकानदारों और वाहन चालकों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ रोष जाहिर करते हुए कहा कि ढांगू रोड फाटक का सिग्नल खराब होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले जून में भी इसी प्रकार तकनीकी खराबी के कारण फाटक खराब हो गया था। उस समय भी दिन के व्यस्त समय में शहर घंटों तक दो हिस्सों में बंटा रहा और लोगों को भारी मानसिक व शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ी थी।
फाटक खुलने के बाद भी 1 घंटे तक रेंगते रहे वाहन
हालांकि रेलवे प्रशासन द्वारा करीब डेढ़ घंटे बाद सिग्नल ठीक कर फाटक खोल दिया गया था, लेकिन दोनों तरफ वाहनों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी थी कि जाम को पूरी तरह सुचारू होने में एक अतिरिक्त घंटे से भी अधिक का समय लग गया। हर कोई जल्दबाजी में निकलने की कोशिश कर रहा था, जिसके चलते ट्रैफिक व्यवस्था और अधिक चरमरा गई। स्थानीय पुलिस और राहगीरों की मदद से धीरे-धीरे वाहनों को निकाला गया, तब जाकर देर रात लोगों ने राहत की सांस ली।
रेलवे की 'आंख और दिमाग' माना जाता है सिग्नल सिस्टम
रेलवे लाइन पर सिग्नल सिस्टम को रेलवे की 'आंख और दिमाग' माना जाता है। जब भी किसी मुख्य मार्ग या रेलवे फाटक पर सिग्नल खराब होता है, तो सुरक्षा कारणों से पूरी व्यवस्था ठप हो जाती है। इसके कारण मुख्य रूप से निम्नलिखित परेशानियां आती हैं: 1. सड़क यातायात पर असर
फाटक का लॉक हो जाना (इंटरलॉकिंग सिस्टम): आधुनिक रेलवे फाटक सिग्नल सिस्टम से जुड़े (Interlocked) होते हैं। यदि सिग्नल खराब हो जाए या 'रेड' (Red) पर अटक जाए, तो गेटमैन सुरक्षा नियमों के तहत फाटक नहीं खोल सकता। इसके कारण सड़क पर दोनों तरफ वाहनों का महाजाम लग जाता है। 2. ट्रेनों के परिचालन पर असर (रेलवे के लिए परेशानी)
ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक: सिग्नल खराब होने की स्थिति में सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ट्रेनों को पिछले स्टेशनों पर ही रोक दिया जाता है। इससे उस रूट की सभी ट्रेनें अपने तय समय से घंटों लेट हो जाती हैं। मैन्युअल सिस्टम पर निर्भरता: यदि किसी ट्रेन को निकालना बेहद जरूरी हो, तो रेलवे को 'अथॉरिटी लेटर' (T-369 फॉर्म) जारी करना पड़ता है। इसमें ड्राइवर को लिखित आदेश दिया जाता है कि वह ट्रेन को बेहद धीमी गति (आमतौर पर 10 से 15 किमी/घंटा) से और खुद ट्रैक की निगरानी करते हुए आगे बढ़ाए। इससे समय का भारी नुकसान होता है। 3. जान-माल का खतरा
हादसे की आशंका: सिग्नल खराब होने पर अगर जल्दबाजी में या लापरवाही से मैन्युअल तरीके से फाटक खोला या बंद किया जाए, तो ट्रेन और सड़क वाहनों के बीच टक्कर का खतरा बढ़ जाता है। अराजकता और गुस्सा: भीषण गर्मी या उमस के बीच घंटों फाटक बंद रहने से जनता का सब्र टूट जाता है। कई बार लोग जबरन फाटक पार करने की कोशिश करते हैं या रेलवे स्टाफ के साथ मारपीट व विवाद पर उतारू हो जाते हैं। संक्षेप में कहें तो रेलवे का नियम है सुरक्षा सर्वोपरि। इसलिए सिग्नल में मामूली खराबी आते ही पूरा सिस्टम खुद को 'सुरक्षित मोड' यानी रेड सिग्नल और बंद फाटक में डाल देता है, ताकि कोई हादसा न हो। लेकिन इसकी कीमत सड़क पर खड़े आम राहगीरों और ट्रेन यात्रियों को घंटों जाम में फंसकर चुकानी पड़ती है।