Monday, 14 September 2026
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दतिया गैंगवार के मुख्य आरोपी की ग्वालियर में मौत:ग्वालियर में इलाज के दौरान दम तोड़ा; 11 बार उम्रकैद की सजा हो चुकी थी

INT News14 September 2026 at 11:53 am

दतिया के बहुचर्चित गैंगवार और वर्ष 2003 के सामूहिक हत्याकांड के मुख्य आरोपी महेश यादव की रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात ग्वालियर के जयारोग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। महेश यादव का लंबे समय से अस्पताल में इलाज चल रहा था। वह इस मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। दोपहर 2 बजे दतिया में अंतिम संस्कार होगा। बता दें कि 23 अप्रैल 2003 को दोपहर करीब 1.30 बजे न्यायालय से पेशी के बाद लौट रहे सतेन्द्र सिंह बुंदेला उर्फ भैया राजा और उनके साथियों की जीप को राजगढ़ चौराहे पर घेरकर हथियारबंद आरोपियों ने फायरिंग कर दी थी। एडवोकेट पंकज मिश्रा के अनुसार, आरोपियों ने करीब 100 से 150 राउंड गोलियां चलाई थीं। वारदात में सतेन्द्र सिंह बुंदेला, राधावल्लभ दांगी, मोजी तिवारी और धर्मेन्द्र तिवारी की मौत हो गई थी, जबकि 7 लोग घायल हुए थे। आरोपियों को 11 बार उम्रकैद की सजा

इस मामले में महेश यादव, वनमाली कुशवाह, अतर सिंह यादव, मुन्ना यादव, बरजोर सिंह यादव, मुकेश टांडोरिया, भूरे सिंह यादव, दौलत सिंह यादव और राकेश सिंह यादव को आरोपी बनाया गया था। कोर्ट ने महेश यादव समेत 7 आरोपियों को हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में दोषी पाते हुए 11-11 बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं दौलत सिंह और राकेश सिंह को षड्यंत्र के आरोप में 10-10 साल की सजा मिली थी। सभी पर जुर्माना भी लगाया गया था। भाई की हत्या का बदला लेने की बात सामने आई थी

इस सामूहिक हत्याकांड की वजह करीब तीन साल पहले महेश यादव के छोटे भाई सुरेश यादव उर्फ रानी की हत्या को बताया गया था। सुरेश पर नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष बड़े रावत हत्याकांड में मुख्य आरोपी होने की बात भी सामने आई थी। सुरेश की हत्या का आरोप सतेन्द्र सिंह बुंदेला उर्फ भैया राजा और उसके साथियों पर लगा था। इसी रंजिश में बदला लेने के लिए 2003 में राजगढ़ चौराहे पर सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिए जाने की बात पुलिस और मामले से जुड़े पक्षों की ओर से सामने आई थी। इस कांड के बाद दहशत में रहा दतिया

राजगढ़ चौराहे की यह वारदात दतिया के अपराध के इतिहास में बड़ी घटना मानी जाती है। इसके बाद जिले में गैंगवार, फायरिंग, हत्या और हत्या के प्रयास की घटनाओं का सिलसिला बढ़ा। पुलिस आंकड़ों के अनुसार हत्याकांड के बाद करीब तीन महीने में जिले में 31 हत्याएं हुई थीं। इसके अलावा वसूली, फायरिंग, मारपीट और लूट जैसी घटनाएं भी लगातार सामने आईं। इस दौर के चलते दतिया लंबे समय तक अपराध और गैंगवार को लेकर प्रदेशभर में चर्चा में रहा।