Monday, 14 September 2026
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हरतालिका तीज पर 40 हजार श्रद्धालुओं ने किया मौनी स्नान:सुहागिनों ने शिव-पार्वती की पूजा की; अखंड सौभाग्य-मनचाहे वर की कामना

INT News14 September 2026 at 11:51 am

सोमवार को हरतालिका तीज पर अनूपपुर के अमरकंटक में आस्था का माहौल रहा। तड़के करीब 4 बजे से मां नर्मदा के विभिन्न घाटों पर मौनी स्नान शुरू हो गया। सुहागिन महिलाओं, युवतियों और श्रद्धालुओं ने मौन रहकर नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाई। हरतालिका तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और तपस्या का पर्व माना जाता है। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखा। युवतियों ने मनचाहा वर पाने की कामना के साथ पूजा-अर्चना की। मौन रहकर स्नान की विशेष मान्यता हरतालिका तीज पर मौन रहकर पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं के अनुसार मौन वाणी के संयम के साथ मन को एकाग्र करने और पूजा में ध्यान लगाने का प्रतीक है। इसी भावना के साथ हजारों महिलाओं ने मौन रहकर मां नर्मदा में स्नान किया। शिवलिंग पर जलाभिषेक कर चढ़ाए बिल्वपत्र नर्मदा स्नान के बाद महिलाओं और युवतियों ने शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। शिवलिंग पर फूल और बिल्वपत्र चढ़ाकर पूजा की। महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती से पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। प्रमुख शिव मंदिरों में लगी कतारें नर्मदा मंदिर के अलावा अमरकंठ महादेव, पार्वती मैया, सिद्धेश्वर महादेव, 11 रुद्र महादेव और घंटेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिरों में जल, पुष्प और बिल्वपत्र अर्पित करने के लिए कतारें लगी रहीं। हर-हर महादेव और मां नर्मदा के जयघोष से मंदिर परिसर गूंजते रहे। 35 से 40 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान अमरकंटक के विभिन्न नर्मदा घाटों पर सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। दूर-दराज के क्षेत्रों से महिलाएं, युवतियां और भक्त वाहनों से पहुंचे। अनुमान के अनुसार करीब 35 से 40 हजार से अधिक महिलाओं और श्रद्धालुओं ने नर्मदा में स्नान कर मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। नर्मदा घाटों पर देर तक बनी रही भीड़ समाचार लिखे जाने तक नर्मदा घाटों और मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। नर्मदा की कल-कल धारा, मंदिरों में मंत्रोच्चार, शिवलिंग पर चढ़ता जल-बिल्वपत्र और शिव-पार्वती के जयकारों से पूरी तीर्थनगरी भक्तिमय नजर आई। महिलाओं के लिए यह पर्व व्रत और पूजा के साथ आस्था, तप, संयम, दांपत्य प्रेम और मंगलकामना का संगम बना।