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अयोध्या जिला अस्पताल में खून का कारोबार, 7000 रुपये में बेचते थे एक यूनिट ब्लड, बीमार और नशेड़ियों से भी कराते थे रक्तदान

Blood Bank Scam Ayodhya: (पवन तोमर) अयोध्या रामनगरी के सरकारी जिला अस्पताल में मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए जरूरी खून को ही कमाई का जरिया बना लिया गया. अस्पताल परिसर में सक्रिय दलाल जरूरतमंद मरीजों के तीमारदारों की मजबूरी का फायदा उठाकर एक यूनिट ब्लड के बदले सात हजार रुपये तक वसूल रहे थे. हैरानी की बात यह है कि इस अवैध धंधे में ऐसे लोगों से भी खून लिया जा रहा था, जो गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे या नशे के आदी थे. इस पूरे मामले ने अस्पताल की व्यवस्था और ब्लड बैंक की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
लखनऊ के मामले के बाद फिर चर्चा में आया अयोध्या
शौक और खर्च पूरे करने के लिए खून बेचने वाले लखनऊ के इंजीनियरिंग छात्रों का मामला सामने आने के बाद अयोध्या जिला अस्पताल में पहले उजागर हो चुका रक्त के अवैध कारोबार का मामला भी फिर चर्चा में है. वर्ष 2023 में यहां एक बीमार और नशे का आदी युवक से महज तीन महीने के भीतर सात बार रक्तदान कराने का खुलासा हुआ था. जांच में सामने आया था कि दलाल जरूरतमंदों को ऊंची कीमत पर खून उपलब्ध कराने के लिए इस तरह के लोगों को भी इस्तेमाल कर रहे थे.
जून 2025 में सात हजार रुपये लेकर दिया खून
इस धंधे का मामला जून 2025 में एक बार फिर सामने आया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अरविंद नाम के व्यक्ति ने शिकायत की थी कि उनकी भाभी का प्रसव रुदौली क्षेत्र के खैरनपुर पीएचसी में हुआ था. हालत बिगड़ने और खून की कमी के चलते उन्हें जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया. वहां डॉक्टर ने दो यूनिट ए पॉजिटिव ब्लड की व्यवस्था करने को कहा. इसी दौरान ब्लड बैंक के पास मौजूद दो लोगों ने एक यूनिट खून के बदले सात हजार रुपये मांगे. डोनर की व्यवस्था नहीं होने के कारण अरविंद ने ऑनलाइन भुगतान कर दिया. बाद में उन्हें जानकारी हुई कि अस्पताल में बिना डोनर के भी खून उपलब्ध कराने की व्यवस्था है. शिकायत के बाद तत्कालीन सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान ने जांच कराई और नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया.
दिसंबर में भी दोहराया गया वसूली का मामला
दिसंबर 2025 में रामनगर अमावासूफी निवासी शगुन जिला अस्पताल में भर्ती थीं. चिकित्सकों ने उनके लिए खून की जरूरत बताई तो उनकी बड़ी बहन ब्लड बैंक पहुंचीं. आरोप है कि डोनर नहीं होने की बात कहकर उन्हें खून देने से मना कर दिया गया. इसी बीच एक दलाल ने सात हजार रुपये लेकर ब्लड उपलब्ध करा दिया. मामला सीएमएस तक पहुंचने के बाद हुई जांच में अस्पताल के एक पूर्व सुरक्षाकर्मी का नाम सामने आया था.
बीमार युवक को बनाया गया था खून के अवैध कारोबार का जरिया
फरवरी 2023 में सामने आए मामले ने इस पूरे नेटवर्क की गंभीरता उजागर कर दी थी. लालकुर्ती निवासी गंभीर बीमारी से पीड़ित एक युवक से महज तीन महीने में सात बार रक्तदान कराया गया. हर बार उसके साथ आने वाला दूसरा व्यक्ति ब्लड लेकर चला जाता था. बाद में जांच में पता चला कि बीमारी से ग्रसित युवक का रक्त मरीजों को चढ़ाने के योग्य ही नहीं था. तत्कालीन सीएमएस डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी. जांच में कई ऐसे लोगों के नाम सामने आए थे, जो जरूरतमंद मरीजों को एक यूनिट खून सात हजार रुपये में उपलब्ध कराने का काम कर रहे थे.
मरीजों की मजबूरी बनी दलालों की कमाई का जरिया
इन मामलों से साफ है कि जिला अस्पताल में रक्त की जरूरत को लेकर मरीजों के परिजनों को निशाना बनाया जाता रहा. गंभीर बीमारी और नशे की लत से जूझ रहे लोगों से रक्तदान कराना रक्त की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है. पहले भी शिकायतें और जांच होने के बावजूद इस तरह के मामले दोबारा सामने आना अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.
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