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Watch Video: पहले बारिश ने बर्बाद की फसल, अब कोहरे का डर; लागत निकालना भी हुआ मुश्किल

पलामू: जिले के पाटन प्रखंड में मौसम की बेरुखी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. पहले लगातार 72 घंटे तक हुई बेमौसम बारिश ने धान और सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचाया. अब बारिश से उबरने की कोशिश कर रहे किसानों के सामने घने कोहरे की नई चुनौती खड़ी हो गई है. सोमवार को लगातार दूसरे दिन सुबह घना कोहरा छाया रहा. इससे खेतों में लगी साग-सब्जियों में कीट और रोगों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है. ऐसे में किसानों को इस बार खेती की लागत निकालना भी मुश्किल नजर आ रहा है.
72 घंटे की बारिश से धान और सब्जियों को नुकसान
किसानों के अनुसार, बेमौसम बारिश से धान की फसल को पहले ही काफी नुकसान पहुंचा है. वहीं, खेतों में लगी साग-सब्जियों पर भी बारिश का प्रतिकूल असर पड़ा है. लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश के कारण कई सब्जियों में गलन की समस्या सामने आने लगी है. टमाटर, भिंडी, कद्दू, बैंगन, सेम और गोभी सहित अन्य मौसमी सब्जियों की फसल प्रभावित होने की आशंका है. सब्जी की खेती करने वाले किसानों की परेशानी सबसे अधिक बढ़ गई है. बारिश के बाद अब लगातार कुहासा छाने से उनकी चिंता और बढ़ गई है.
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कोहरे से सब्जियों में कीट और रोग का खतरा
किसानों का कहना है कि लगातार कुहासा रहने से फसलों में कीटों और रोगों का प्रकोप बढ़ने लगा है. फसलों को बचाने के लिए किसान कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं. हालांकि, बार-बार दवा का छिड़काव करने से खेती की लागत बढ़ रही है. दूसरी ओर, मौसम की मार के कारण उत्पादन भी प्रभावित होने की आशंका है. ऐसे में किसानों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है. एक तरफ फसल को बचाने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ अच्छी पैदावार को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है.
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बाजार में सब्जियों की आवक प्रभावित, बढ़े भाव
बारिश और कुहासे के असर से बाजार में साग-सब्जियों की आवक भी प्रभावित होने लगी है. इसका असर सब्जियों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है और बाजार में इनके भाव बढ़ गए हैं. किसानों का कहना है कि यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा, तो खेतों में तैयार हो रही फसल बर्बाद हो सकती है. इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. लगातार मौसम की मार झेल रहे किसानों को अब अपनी खेती की लागत निकालने की चिंता सताने लगी है.
किसान ने सरकार से मुआवजे की मांग की
पाटन के किसान लवकुमार सिंह ने बताया कि समय पर बारिश नहीं होने के कारण किसान धान और दूसरी फसलों की खेती समय पर नहीं कर पाते हैं. शुरुआत में नदी और कुएं के पानी से पंप के सहारे धान की बुआई की गई थी. बाद में बारिश होने पर किसी तरह धान की रोपाई पूरी की गई. उन्होंने बताया कि जब धान की फसल तैयार होने लगी, तभी लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश से काफी नुकसान हुआ. खेतों में लगी साग-सब्जियां भी गलने लगी हैं. मौसम की दोहरी मार से किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है.
लवकुमार सिंह ने राज्य सरकार से फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर किसानों को मुआवजा देने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे मौसम की मार झेल रहे किसानों को आर्थिक राहत मिल सकेगी.
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