Saturday, 4 July 2026
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AI और IOT से स्वच्छता का नया मॉडल बनाएगा इंदौर:IIM के साथ तकनीक के सहारे कचरा, सीवरेज और जल प्रबंधन पर होगा रिसर्च

INT News4 July 2026 at 12:39 pm

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की सफाई व्यवस्था अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से और अधिक स्मार्ट बनाई जाएगी। इसके लिए इंदौर नगर निगम और IIM इंदौर के बीच जल, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर दो वर्षीय संयुक्त अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग शुरू किया जाएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में हुई मेयर-इन-काउंसिल (MIC) की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। योजना के तहत IIM इंदौर का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और नगर निगम मिलकर चरणबद्ध तरीके से शहर की स्वच्छता व्यवस्था का वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। उद्देश्य इंदौर के स्वच्छता मॉडल को तकनीक आधारित, अधिक प्रभावी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है। पहले चरण में कचरा प्रबंधन और जल पुन: उपयोग पर फोकस अगस्त से दिसंबर 2026 तक पहले चरण में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली का मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, परिवहन व्यवस्था की कार्यक्षमता और उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। IOT से होगी सीवरेज की निगरानी दूसरे चरण में सार्वजनिक शौचालयों के संचालन के लिए नए वित्तीय मॉडल तैयार किए जाएंगे। साथ ही IOT आधारित सीवरेज मॉनिटरिंग सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा। अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी नई तकनीकों और नवाचारों का डिजिटल डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा। AI करेगा भविष्य की जरूरतों का आकलन अप्रैल से सितंबर 2027 तक तीसरे चरण में संस्थागत क्षमता विकास और भविष्य की योजना पर काम होगा। इस दौरान AI आधारित पूर्वानुमान और निर्णय सहायता प्रणाली विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा, ताकि जल, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े निर्णय अधिक सटीक, वैज्ञानिक और प्रभावी हो सकें। दूसरे शहरों के लिए बनेगा मॉडल महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार देश का नेतृत्व किया है। अब तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन के जरिए इस मॉडल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि IIM इंदौर के साथ यह साझेदारी डेटा आधारित और स्मार्ट समाधान विकसित करेगी, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था अधिक पारदर्शी, टिकाऊ और वैज्ञानिक बनेगी। साथ ही इंदौर का यह मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए भी मार्गदर्शक साबित होगा।