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बदरीनाथ चढ़ावा चोरी पर नया खुलासा, आरोपी पर रही विशेष कृपा; प्रमोशन के साथ नोट गिनने की ड्यूटी दी

Badrinath Donation Theft Row: बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण पर जांच समिति को अपनी रिपोर्ट सोमवार तक सौंपनी है, लेकिन अभी तक समिति के सदस्य धाम नहीं पहुंचे हैं। उधर, इस प्रकरण में अब नई बात सामने आई है। हेराफेरी के आरोपों से घिरे बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निजी सहायक का करियर ग्राफ मंदिर समिति की कृपा से तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के एकल पद पर नियुक्त हुए। इस पद पर पदोन्नति संभव नहीं थी। इसके बावजूद 2018 में उन्हें सीधी भर्ती वाले व्यक्तिगत सहायक पद पर समायोजित किया गया। इसके लिए 2023 में नियमावली में बदलाव कर जनसंपर्क विशेष अधिकारी के पद पर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त किया गया। निजी सहायक होने के बावजूद उन्हें चढ़ावा गणना कार्य में तैनात किया गया।जरूरत पड़े तो स्वतंत्र जांच कराएंगेः बीकेटीसी अध्यक्षबीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि जरूरत पड़ी तो मामले में स्वतंत्र या प्रशासनिक जांच की भी कराई जाएगी। उन्होंने इस मामले में कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिस आरोपी कर्मचारी को लेकर इतना बवाल मचा है, उसकी स्थायी नियुक्ति वर्ष 2014 में तत्कालीन अध्यक्ष गणेश गोदियाल के कार्यकाल के दौरान ही हुई थी। संबंधित कर्मचारी उनका निजी सहायक नहीं है, वह बीकेटीसी का स्थायी कर्मचारी है और पिछले दो और अध्यक्षों के साथ काम कर चुका है। उन्होंने कहा कि इस मामले में तीन जुलाई को जिस दिन शिकायत प्राप्त हुई थी, उसी दिन शाम जांच कमेटी गठित कर, संबंधित आरोपी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया था।उन्होंने कहा कि बीते दिनों मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे बदलने को लेकर भी सवाल उठे थे, जबकि हकीकत यह है कि कैमरे बदले जरूर गए हैं, लेकिन अधिक उन्नत तकनीक के कैमरे लगाए गए हैं और संख्या भी बढ़ाई गई है। पुराने कैमरों की सीडीआर सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि जब यात्रा चरम पर होती है तो सभी कर्मचारियों को रोस्टर के हिसाब से अलग-अलग कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। कर्मचारी कम होने से कई बार अलग-अलग कर्मचारियों को कार्यक्षेत्र से इतर भी जिम्मेदारी सौंपी जाती है।आरोपी कर्मचारियों की संपत्ति की भी होगी जांचद्विवेदी ने कहा कि संदेह के घेरे में आए कर्मचारियों की संपत्ति के विवरण की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि मंदिर समिति में भर्ती प्रक्रिया 1939 में बने एक्ट के तहत होती है। उन्होंने बताया कि मंदिर समिति के पास 47 मंदिर, गेस्ट हाउस और सात संस्कृत विद्यालय हैं। चढ़ावा हर दिन बैंक में जमा होता है। इसमें बैंक के प्रतिनिधि, गणना अधिकारी और तीर्थयात्री भी शामिल होते हैं। द्विवेदी ने बताया कि नकदी का मिलान उस दिन की रसीद और बैंक में जमा राशि से किया जाता है। अभी तक रसीद बुक में ओवरराइटिंग नहीं मिली है।यात्रा सीजन के दौरान बनता है ड्यूटी रोस्टरसीईओ रांगड़ के अनुसार, यात्रा सीजन के सुचारू संचालन के लिए एक सुव्यवस्थित ड्यूटी रोस्टर प्रणाली अपनाई जाती है। विभागीय स्तर पर कर्मचारियों की योग्यता, दक्षता और पूर्व के कार्यों का आकलन कर एक फाइल तैयार की जाती है। यह फाइल प्रभारी अधिकारी से होते हुए सीईओ तक पहुंचती है। सीईओ की ओर से बारीकी से समीक्षा करने के बाद, इसे अंतिम संस्तुति के लिए अध्यक्ष कार्यालय भेजा जाता है। अध्यक्ष की स्वीकृति के बाद ही सीजन के लिए ड्यूटी तय होती है। सोहन सिंह रांगड़ ने कहा कि टीम के सदस्य वर्तमान में अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं, इसलिए उन्हें बदरीनाथ पहुंचने में दो दिन का समय लगेगा। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सीईओ को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट का गहन अध्ययन करने के बाद उसमें दी गई सिफारिशों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।बिल्ली को दे दी दूध की रखवाली:गणेशदेहरादून। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए दान में कथित चोरी के मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर दान में अनियमितता और चोरी के आरोप लग रहे हैं, उन्हीं से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जांच समिति का हिस्सा बनाना न्याय और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है। यह स्थिति बिल्कुल वैसी है जैसे ‘बिल्ली को ही दूध की रखवाली सौंप दी जाए।’गोदियाल ने कहा कि इस प्रकार गठित जांच समिति से निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति से कराई जाए, जिसकी अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष करें, ताकि आम जनता और करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कायम हो सके। यदि राज्य सरकार को इस पर कोई आपत्ति है, तो जांच प्रक्रिया की निगरानी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जाए।गोदियाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के पास निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई करने का अवसर था, लेकिन जिस प्रकार पूर्व में केदारनाथ स्वर्ण प्रकरण में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, उसी तरह इस मामले में भी सरकार की मंशा संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि जब मंदिर समिति के अध्यक्ष के निजी सहायकों पर ही आरोप लग रहे हों और उसी तंत्र से जुड़े लोगों को जांच समिति में शामिल किया जाए, तो ऐसी जांच की विश्वसनीयता स्वतः समाप्त हो जाती है। कांग्रेस पार्टी ऐसी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेगी और पारदर्शी, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की अपनी मांग पर दृढ़ता से कायम रहेगी।