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रोहतक मेडिकल कॉलेज को लेकर डॉक्टर वर्मा की वीडियो वायरल:हड्डी विभाग में 4 नंबर वाले को एडमिशन देकर माहौल खराब करने का आरोप
रोहतक के पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के हड्डी रोग विभाग में 4 नंबर वाले को एडमिशन देने का आरोप लगाते हुए डॉ. आरके वर्मा की एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल वीडियो में डॉ. वर्मा ने सिस्टम की खामियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। वायरल वीडियो में डॉ. आरके वर्मा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में आरक्षित श्रेणी के एक छात्र का एडमिशन 800 में से मात्र 4 नंबर आने पर हो गया। जबकि जनरल कैटेगरी के युवक का एडमिशन 800 में से 585 नंबर आने पर हुआ। ऐसा ही सर्जरी विभाग, गायनेकोलॉजी, मेडिसन व अन्य विभाग में भी 10-11 और अधिकतम 40 नंबर आने पर एडमिशन हुआ है। 585 नंबर वाला छात्र कैसे हो जाएगा सहज
वायरल वीडियो में डॉ. आरके वर्मा ने कहा कि जब 4 नंबर लेने वाला छात्र विभाग में जाएगा तो 585 नंबर लेने वाला छात्र उसके साथ कैसे सहज हो पाएगा। कोई 4 वोट पाकर साढे़ 5 लाख वोट पाने को छोड़कर पीएम कैसे बन सकता है। समझने की जरूरत यह है कि जनरल कैटेगरी के 584 नंबर वाले का एडमिशन नहीं हुआ, लेकिन आरक्षित वर्ग में 4 नंबर वाले का हो गया। 4 नंबर वाला कैसे बनेगा अच्छा डॉक्टर
वायरल वीडियो में डॉ. आरके वर्मा ने कहा कि 4 नंबर प्राप्त करने वाले जिस छात्र का बौद्धिक स्तर इतना कमजोर है, वह कैसे जूनियर डॉक्टर वाला ईलाज कर पाएगा। फिर उसे सीनियर डॉक्टर की डॉट पड़ेगी तो वह कहेगा कि उसका शोषण हो रहा है। फिर वह एससी-एसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज करवाएगा। 585 नंबर वाला बात नहीं करेगा तो वह कमेटी में रिपोर्ट करेगा, इससे विभाग का माहौल खराब होगा। समाज का नुकसान कर रहे राजनेता
वायरल वीडियो में डॉ. आरके वर्मा ने कहा कि राजनेता इस देश को नुकसान पहुंचा रहे है। 4 नंबर वाले युवक व उसके समुदाय का जीवन खराब कर रहे है, जिन्हें सबक मिलना चाहिए। 585 नंबर व 4 नंबर वाले के बीच में जो युवक है, क्या उनके अंदर द्वेष की भावना पैदा नहीं होगी। 4 नंबर वाले युवक के मन में कुंठा पैदा होगी, क्या वह सही है। इसके बारे में सोचने की जरूरत है। पीजीआई में ऐसा कोई मामला फिलहाल नहीं
पीजीआईएमएस के पीआरओ डॉ. उमेश यादव ने बताया कि पीजीआई में डॉक्टर आरके वर्मा नाम के कोई डॉक्टर नहीं है। जो मामला वीडियो में बताया जा रहा है, वह एक साल पहले का मामला है। वह छात्र कोर्स छोड़कर जा चुका है। उसका एडमिशन सरकार की पॉलिसी के अनुसार हुआ था, इसमें पीजीआईएमएस का कोई लेना-देना नहीं है।