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पश्चिम मध्य रेलवे में मेडिकल क्लेम घोटाला:10 हजार में शून्य बढ़ाकर किया 1 लाख, दो लिपिक निलंबित; 40 लाख की गड़बड़ी की आशंका
पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर जोन में मेडिकल क्लेम के नाम पर लाखों रुपए के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। रेलवे कर्मचारियों पर इलाज के बिलों में हेराफेरी कर सरकारी राशि का गबन करने का आरोप है। शुरुआती जांच में करीब 40 लाख रुपए के घोटाले की आशंका जताई गई है। मामले में दो लिपिकों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि कई अन्य कर्मचारी और अधिकारी जांच के दायरे में हैं। बिलों में शून्य जोड़कर बढ़ा दी क्लेम राशि रेलवे अधिकारियों के अनुसार कुछ कर्मचारियों ने निजी अस्पतालों में इलाज कराने के बाद कार्मिक विभाग के लिपिकों से मिलीभगत कर मेडिकल क्लेम में हेराफेरी की। आरोप है कि 10 हजार रुपए के बिल को एक लाख रुपए तक दर्शाने के लिए रकम के आगे अतिरिक्त शून्य जोड़ दिए गए और उसी आधार पर भुगतान भी कराया गया। दो लिपिक सस्पेंड, विजिलेंस ने संभाली जांच प्रारंभिक जांच में कार्मिक विभाग के मयंक श्रीवास्तव और अतुल कुमार की भूमिका संदिग्ध मिलने पर दोनों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे विजिलेंस ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। कटनी मंडल तक पहुंची जांच जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जीवाड़ा केवल जबलपुर तक सीमित नहीं है। कटनी मंडल के कुछ कर्मचारियों के मेडिकल बिल भी संदिग्ध पाए गए हैं। इसके अलावा कार्मिक और लेखा विभाग के कुछ अधिकारी एवं कर्मचारी भी जांच के घेरे में हैं। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव ने अनियमितता के चलते दो कर्मचारियों के निलंबन की पुष्टि की है। जांच में अब तक सामने आए तथ्य कार्मिक और लेखा विभाग की भूमिका पर सवाल जांच में कार्मिक और लेखा विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। विभागीय परीक्षण के बाद ही मेडिकल क्लेम भुगतान के प्रस्ताव भेजे जाते हैं, ऐसे में अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार फर्जी भुगतान के बदले राशि के बंटवारे की भी आशंका है। मामले में एक अन्य कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी किया गया है। विजिलेंस की जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है।