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World Photography Day: 5 तस्वीरें, जो बताती हैं नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा कैसे बदली

राजनीति को समझने के लिए भाषण, नीतियां और चुनावी नतीजे जितने महत्वपूर्ण हैं, तस्वीरें भी उतनी ही ताकतवर होती हैं. कई बार एक तस्वीर वह राजनीतिक संदेश दे देती है, जिसे हजार शब्दों में समझाना मुश्किल होता है.
नरेंद्र मोदी की करीब तीन दशक लंबी सार्वजनिक यात्रा में भी कुछ तस्वीरें ऐसी हैं, जो उनके राजनीतिक व्यक्तित्व के अलग-अलग पड़ावों को सामने रखती हैं.
इनमें कहीं जमीन से जुड़े संगठनकर्ता की छवि है, कहीं लोकतंत्र के मंदिर के प्रति सम्मान, कहीं संविधान के प्रति प्रतिबद्धता, तो कहीं भारत की सांस्कृतिक राजनीति और वैश्विक कूटनीति की झलक.
1. 1995: मंच पर नहीं, कार्यकर्ताओं के बीच बैठे मोदी
यह तस्वीर नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में उभरने से काफी पहले की है. 1995 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में केशुभाई पटेल के शपथ ग्रहण समारोह की इस पुरानी तस्वीर में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मंच पर बैठे नजर आते हैं. वहीं युवा नरेंद्र मोदी जमीन पर सामान्य कार्यकर्ताओं के बीच बैठे दिखाई देते हैं.
तस्वीर का महत्व सिर्फ इतना नहीं कि यह मोदी के शुरुआती राजनीतिक दौर की झलक देती है. यह उस दौर की याद दिलाती है, जब वे सत्ता के केंद्र में नहीं, बल्कि संगठन के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे थे.
आज प्रधानमंत्री के रूप में उनकी वैश्विक पहचान को देखते हुए यह तस्वीर उनके राजनीतिक सफर का एक दिलचस्प बिफोर एंड आफ्टर फ्रेम बन जाती है.
2. 2014: संसद की सीढ़ियों पर माथा टेकना
20 मई 2014.
लोकसभा चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद नरेंद्र मोदी भाजपा संसदीय दल की बैठक में शामिल होने संसद पहुंचे. संसद भवन की सीढ़ियों पर पहुंचते ही उन्होंने सीढ़ियों पर माथा टेककर प्रणाम किया.
यह तस्वीर कुछ ही समय में देश-दुनिया में चर्चित हो गई.
मोदी के लिए संसद सिर्फ सत्ता का भवन नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मंदिर है- इस संदेश को इस एक दृश्य ने बेहद प्रभावशाली तरीके से सामने रखा.
2014 की यह तस्वीर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से ठीक पहले के उस क्षण को पकड़ती है, जब गुजरात के एक लंबे समय तक राज्य की राजनीति से जुड़े नेता राष्ट्रीय सत्ता के केंद्र में प्रवेश कर रहे थे.
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3. 2019: संविधान के सामने झुकते प्रधानमंत्री
2019 में लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बड़ी जीत के बाद नरेंद्र मोदी को NDA का नेता चुना गया. संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित कार्यक्रम की एक तस्वीर खास तौर पर चर्चित हुई, जिसमें मोदी संविधान के सामने झुकते दिखाई देते हैं.
अगर 2014 की तस्वीर में संसद के प्रति सम्मान का संदेश था, तो 2019 की यह तस्वीर संविधान के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गई.
यह तस्वीर उस राजनीतिक दौर में भी महत्वपूर्ण थी, जब सरकार और उसके आलोचकों के बीच संविधान, संस्थाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर तीखी बहस चल रही थी.
इसलिए कैमरे में कैद यह छोटा-सा दृश्य एक बड़ा राजनीतिक संदेश देता है- बहुमत की शक्ति के साथ संवैधानिक व्यवस्था के प्रति निष्ठा.
4. 2024: अयोध्या में रामलला के सामने दंडवत
22 जनवरी 2024. अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का दिन.
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर विशेष रूप से ऐतिहासिक बन गई- वे रामलला के सामने दंडवत प्रणाम करते दिखाई दिए.
यह तस्वीर नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा के एक अलग आयाम को सामने लाती है. दशकों से भारतीय राजनीति में अयोध्या और राम मंदिर आंदोलन एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहे हैं. ऐसे में मंदिर के गर्भगृह में प्रधानमंत्री का यह दृश्य राजनीति, संस्कृति और आस्था के संगम का प्रतीक बन गया.
इस तस्वीर को केवल धार्मिक दृश्य के रूप में देखना भी अधूरा होगा. यह उस लंबे सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन के एक निर्णायक पड़ाव का दृश्य भी है, जिसने भारतीय राजनीति को गहराई से प्रभावित किया.
यानी 1995 की तस्वीर में जहां संगठन का जमीनी कार्यकर्ता दिखता है, वहीं 2024 की तस्वीर में वही व्यक्ति देश के प्रधानमंत्री के रूप में एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक क्षण का हिस्सा है.
5. 2024-26: ‘सेल्फी डिप्लोमेसी’ और दुनिया के नेताओं के साथ मोदी
मोदी की राजनीतिक तस्वीरों का पांचवां और बिल्कुल अलग अध्याय है- सेल्फी डिप्लोमेसी .
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से लेकर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी तक, दुनिया के कई नेताओं के साथ मोदी की सेल्फी सोशल मीडिया पर खूब चर्चित हुई हैं.
परंपरागत कूटनीति में राष्ट्राध्यक्षों की तस्वीरें आमतौर पर औपचारिक होती थीं- बैठक, हाथ मिलाना, आधिकारिक फोटो-ऑप.
सेल्फी ने इस भाषा को बदल दिया.
इन तस्वीरों में नेता कैमरे के सामने मुस्कुराते हुए, सहज और अनौपचारिक नजर आते हैं. यह personal diplomacy का एक आधुनिक रूप है, जिसमें नेता सिर्फ सरकारों के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत रिश्तों और सार्वजनिक छवि के जरिए भी कूटनीतिक संदेश देते हैं.
मोदी की ऐसी तस्वीरें एक ऐसे भारत की छवि पेश करती हैं, जो वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा है और दुनिया की प्रमुख शक्तियों के नेताओं के साथ सहज संवाद करता है.
एक फ्रेम में तीन दशक का सफर
इन पांच तस्वीरों को एक साथ रखें तो नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा का एक दिलचस्प दृश्य-क्रम बनता है-
1995 — संगठन का कार्यकर्ता
2014 — लोकतंत्र के मंदिर को प्रणाम करता नेता
2019 — संविधान के सामने झुकता प्रधानमंत्री
2024 — अयोध्या में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का चेहरा
2024-26 — वैश्विक नेताओं के साथ ‘सेल्फी डिप्लोमेसी’
यानी इन तस्वीरों में केवल एक नेता के बदलते राजनीतिक पद नहीं दिखाई देते. इनमें भारतीय राजनीति के बदलते विमर्श की भी झलक मिलती है- संगठन से सत्ता तक, सत्ता से सांस्कृतिक राजनीति तक और फिर भारत की वैश्विक पहचान तक.
अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी दिवस पर इन तस्वीरों को देखने का सबसे दिलचस्प तरीका शायद यही है: एक नेता की तीन दशक की यात्रा को उसके भाषणों से नहीं, कैमरे द्वारा कैद किए गए पांच क्षणों से पढ़ना.
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