समाचार · मध्य प्रदेश
नरसिंहपुर में मुस्लिम समाज ने UCC विधेयक का विरोध किया:चचेरे-ममेरे भाई-बहन के बीच शादी पर रोक लगाने को गलत बताया
नरसिंहपुर जिले में मुस्लिम समाज के लोगों ने बुधवार को मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) बिल, 2026 के विरोध में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर देवंती परते को दिया गया। समाज ने इस बिल को संविधान और लोगों के मूल अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसके नियमों पर फिर से विचार करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय संविधान देश की अलग-अलग परंपराओं और संस्कृति की रक्षा करता है। लोगों ने संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 का हवाला देते हुए कहा कि अपने धर्म और संस्कृति के हिसाब से जीने का हक सबको है। उनका तर्क था कि पर्सनल लॉ को पूरी तरह खत्म करने से धार्मिक आजादी पर असर पड़ सकता है। अदालत के फैसले का दिया हवाला ज्ञापन में संविधान के नीति निदेशक तत्वों का जिक्र करते हुए कहा गया कि इसे लोगों के मूल अधिकारों के साथ संतुलन बनाकर ही लागू किया जाना चाहिए। इसके लिए मिनर्वा मिल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की बात कही गई, जिसमें मूल अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों के बीच संतुलन को जरूरी बताया गया था। विवाह के नए नियमों पर जताई आपत्ति बिल में शादी से जुड़े नए नियमों पर भी ऐतराज जताया गया है। इसमें सभी धर्मों के लिए एक ही शादी की मजबूरी, शादी का रजिस्ट्रेशन और पर्सनल लॉ से जुड़े नियमों को सबके लिए एक जैसा लागू करने का प्रस्ताव है, जिसे समाज ने अपने मामलों में दखल माना है। चचेरे-ममेरे भाई-बहन में शादी पर रोक का विरोध खासकर फर्स्ट कजिन से शादी पर रोक लगाने का जमकर विरोध किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में चचेरे-ममेरे भाई-बहन के बीच शादी सही मानी जाती है। नए नियम में इस पर रोक लगाई जा रही है, जो कि धार्मिक आजादी का हनन है। समाज ने राष्ट्रपति से मांग की है कि देश की संस्कृति और लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हुए इस कानून की समीक्षा कराई जाए।