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छत्तीसगढ़ ओपन जेल के लिए ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट रूल्स तैयार:10 साल से ज्यादा की सजा जरूरी, रेप-मर्डर वालों को मौका नहीं; गलती पर दोबार नॉर्मल जेल
छत्तीसगढ़ में पहली बार ओपन जेल (खुली जेल) की स्थापना होने जा रही है। जेल बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में लगभग तैयार है। इस जेल की क्षमता 200 कैदियों की होगी। यहां केवल अच्छे आचरण वाले और कम सुरक्षा जोखिम वाले सजायाफ्ता कैदियों को रखा जाएगा। जेल डीजी हिमांशु गुप्ता ने बताया सरकार ने जेलों में बंद कैदियों के सुधार, अच्छे व्यवहार और रिहाई के बाद सामान्य जीवन में लौटने की तैयारी के लिए छत्तीसगढ़ ओपन जेल (ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट) रूल्स बना दिए गए हैं।
समझिए, ओपन जेल क्या है? ओपन जेल ऐसी जेल व्यवस्था है, जिसमें योग्य कैदियों को अपेक्षाकृत खुला माहौल दिया जाता है। यहां कैदियों को खेती, पशुपालन, जेल उद्योग और दूसरे रोजगार से जुड़े कामों में लगाया जाएगा। इसका मकसद सिर्फ सजा काटना नहीं, बल्कि कैदी को काम, अनुशासन और जिम्मेदारी के जरिए समाज में वापस लौटने के लिए तैयार करना है। इन कैदियों को नहीं भेजा जाएगा ओपन जेल नियमों में कई अपराधों और परिस्थितियों वाले कैदियों को स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। रेप, यौन अपराध, अपहरण, डकैती, लूट, गंभीर चोरी, हत्या से जुड़े कुछ गंभीर अपराध, राजद्रोह/राज्य के खिलाफ अपराधों की श्रेणी, सेना-नौसेना-वायुसेना से जुड़े अपराध और अन्य गंभीर अपराधों में दोषी कैदियों को पात्र नहीं माना गया है। इसके अलावा एनएसए, छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, यूएपीए, टाडा, पोटा, एंटी-हाइजैकिंग एक्ट, एक्सप्लोसिव सब्सटेंसेज एक्ट, पॉक्सो और एनडीपीएस एक्ट* के तहत निरुद्ध या दोषी कैदी भी ओपन जेल के लिए पात्र नहीं होंगे। ओपन जेल जाने का फैसला कौन करेगा? इसके लिए कैदी को खुद आवेदन करना होगा। वह आवेदन अपनी जेल के सुपरिंटेंडेंट को देगा। इसके अलावा जेल सुपरिंटेंडेंट पात्र कैदियों के केस खुद भी भेज सकते हैं। हर तीन महीने में पात्र कैदियों की नॉमिनल रोल यानी नाम और रिकॉर्ड वाली सूची ओपन जेल के सुपरिंटेंडेंट को भेजी जाएगी। ओपन जेल के सुपरिंटेंडेंट जांच के बाद अपनी सिफारिश डीजी जेल एवं करेक्शनल सर्विसेज को भेजेंगे। इसके बाद एक कमेटी फैसला करेगी। ओपन जेल में कैदी क्या करेंगे? ओपन जेल में कैदियों के पुनर्वास के लिए रोजगार से जुड़ी गतिविधियां कराई जाएंगी। इनमें मुख्य रूप से जेल इंडस्ट्री, खेती, पशुपालन और दूसरे रोजगार आधारित काम शामिल होंगे। इन गतिविधियों से होने वाली आय राज्य सरकार के खाते में जमा की जाएगी। वहीं कैदियों के पुनर्वास और रोजगार संबंधी गतिविधियों के लिए विभागीय बजट से फंड दिया जाएगा। गलती करने पर दोबारा समान्य जेल भेज दिए जाएंगे ओपन जेल जाने के बाद कैदी को वापस सामान्य जेल भेजा जा सकता है। अगर ओपन जेल में रहने के दौरान कैदी कोई जेल अपराध करता है, तो उसके खिलाफ रिपोर्ट डीजी को भेजी जाएगी। डीजी के आदेश पर उसे वापस उसकी पुरानी जेल या किसी दूसरी जेल में भेजा जा सकता है। कैदी खुद भी आवेदन देकर वापस अपनी पुरानी जेल जाने की इच्छा जाहिर कर सकता है। अगर कोई कैदी मेडिकल कारणों से काम करने में सक्षम नहीं रहता है, तो जेल मेडिकल ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर उसे वापस सामान्य जेल भेजा जा सकता है। ओपन जेल के कैदियों को पैरोल भी मिलेगी ओपन जेल में रहने वाले कैदियों पर भी प्रिजनर एक्ट, 1900 और छत्तीसगढ़ प्रिजनर लीव रूल्स, 1989 के प्रावधान लागू होंगे। यानी उन्हें अस्थायी छुट्टी या पैरोल की व्यवस्था इन्हीं नियमों के तहत मिलेगी। कर्मचारियों की भी होगी अलग व्यवस्था जेल विभाग के मौजूदा अधिकारी और कर्मचारी भी ओपन जेल में पोस्ट किए जा सकेंगे। उनकी *सीनियरिटी* उनके मूल कैडर या सर्किल के अनुसार बनी रहेगी। उनकी प्रमोशन और दूसरी सर्विस से जुड़ी प्रक्रियाएं भी मूल कैडर या सर्किल के अनुसार ही होंगी।