Sunday, 16 August 2026
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श्रीमंत बोले- 67 मेडल दिलाए,नौकरी नहीं मिली तो नीलाम करूंगा:एशिया नंबर-1 पैरा आर्म रेसलर का दर्द, मां ने मंगलसूत्र गिरवी रख उठाया खर्च

INT News16 August 2026 at 12:42 pm

जिस बेटे को देश के लिए मेडल जीतने के काबिल बनाने के लिए मां ने अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया और पिता ने मजदूरी कर उसकी पढ़ाई, डाइट और जिम का खर्च उठाया, आज वही बेटा सरकारी मदद के इंतजार में टूट गया है। छत्तीसगढ़ के पैरा आर्म रेसलर श्रीमंत झा ने से कहा कि अगर इस बार भी उन्हें शहीद राजीव पांडे पुरस्कार और सरकारी नौकरी नहीं मिली, तो वह अपने 67 इंटरनेशनल मेडल नीलाम कर देंगे। इससे मिली रकम से माता-पिता का कर्ज चुकाएंगे। श्रीमंत ने यह बात 15 अगस्त को दुर्ग बटालियन में आयोजित मुख्य समारोह में सम्मानित होने के बाद कही है। डिप्टी सीएम अरुण साव ने उनका सम्मान किया। श्रीमंत जन्म से दिव्यांग हैं। पिछले करीब 15 साल में उन्होंने भारत के लिए 67 इंटरनेशनल मेडल जीते हैं। दावा है कि वह विश्व में नंबर-3 और एशिया में नंबर-1 पैरा आर्म रेसलर हैं। पहले देखिए ये तस्वीरें- कहा- मेडल नीलाम कर कर्ज चुकाएंगे श्रीमंत ने कहा कि अगर इस बार भी उन्हें शहीद राजीव पांडे पुरस्कार और सरकारी नौकरी नहीं मिली तो वह अपने 67 इंटरनेशनल मेडल सरकार को सौंपकर उन्हें नीलाम करने का कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि नीलामी से मिलने वाली रकम से छोटा कारोबार शुरू करेंगे और माता-पिता का कर्ज चुकाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने खेल छोड़ने की भी बात कही। मां ने मंगलसूत्र गिरवी रखा, पिता ने मजदूरी कर उठाया खर्च श्रीमंत ने बताया कि उनके खेल और पढ़ाई के सफर में परिवार ने काफी मुश्किलें झेली हैं। उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मां ने अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया। वहीं, पिता ने मजदूरी कर उनकी पढ़ाई, डाइट और जिम का खर्च उठाया। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा देश के लिए मेडल जीतेगा और आगे उसे सरकारी नौकरी मिलेगी, जिससे घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। इसी उम्मीद में परिवार पर कर्ज बढ़ता चला गया। कई साल से भर रहे पुरस्कार का फॉर्म श्रीमंत का कहना है कि वह कई सालों से शहीद राजीव पांडे पुरस्कार के लिए आवेदन कर रहे हैं। हर बार अपनी खेल उपलब्धियों के साथ फॉर्म जमा किया, लेकिन अब तक उन्हें यह सम्मान नहीं मिला। उनका कहना है कि 67 इंटरनेशनल मेडल जीतने के बावजूद उन्हें न तो राज्य का यह खेल सम्मान मिला और न ही सरकारी नौकरी। 2032 पैरालंपिक का सपना भी टूट रहा श्रीमंत का सपना 2032 पैरालंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। पैरा आर्म रेसलिंग के पैरालंपिक में शामिल होने की उम्मीद के साथ वह इसकी तैयारी कर रहे थे, लेकिन परिवार की आर्थिक परेशानी और बढ़ते कर्ज ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। कहा- नौकरी से 15 साल के संघर्ष को मिलेगा सम्मान श्रीमंत झा छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले पैरा-आर्म रेसलर हैं। करीब 15 साल के खेल करियर में उन्होंने 67 इंटरनेशनल मेडल जीते हैं। वह पैरा-आर्म रेसलिंग में विश्व नंबर-3 और एशिया नंबर-1 खिलाड़ी भी रह चुके हैं। श्रीमंत ने कई अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश के लिए मेडल जीते हैं। श्रीमंत ने सरकार से अपील की है कि इस बार उनकी खेल उपलब्धियों और मेरिट के आधार पर उन्हें शहीद राजीव पांडे पुरस्कार और सरकारी नौकरी दी जाए। उनका कहना है कि इससे उनके माता-पिता के वर्षों के त्याग और उनके 15 साल के संघर्ष को सम्मान मिलेगा। ……………… यह खबर भी पढ़िए… चाणक्य के डायरेक्टर बोले- OTT की गालियां बाजार की पसंद: लोग देख रहे तो बनता रहेगा; Gen-G पर कहा- बच्चों से हारने में दिक्कत क्या

मशहूर धारावाहिक ‘चाणक्य’ के निर्देशक और ‘पिंजर’ के फिल्म निर्माता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी रायपुर पहुंचे। डिजिटल से खास बातचीत में उन्होंने GEN-G आंदोलन, पेपर लीक, युवाओं के तनाव, OTT पर बढ़ती अश्लीलता और फिल्मों में AI के इस्तेमाल पर खुलकर बात की। पढ़ें पूरी खबर…