Monday, 29 June 2026
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पुणे में भारत भारती का पंचम राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न, 24 राज्यों के 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

INT News29 June 2026 at 09:09 pm

Bharat Bharti: राष्ट्रीय एकात्मता को समर्पित संस्था “भारत भारती” का पंचम राष्ट्रीय अधिवेशन पुणे स्थित नाजोश्री जैन भवन में दिनांक 26 जुलाई से प्रारंभ हो कर 28 जुलाई 2026 समाप्त हो गया. इस त्रिदिवसीय अधिवेशन में देश के 24 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से 400 से अधिक संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिसमें कश्मीर से कन्याकुमारी तक तथा कछ से कामरूप (संपूर्ण उत्तरपूर्व के राज्य) सम्मिलित थे. पहली बार लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश से लेकर नागालैंड के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे. झारखण्ड से प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह के नेतृत्व में 14 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिनमें गुमला जिले से दामोदर कसेरा (जिला संयोजक) सुरेश सिंह (जिला सह संयोजक), वीर नारी मिला उरांव, गौरी किंडो (मुखिया) एवं पुष्प देवी सहित 5 सदस्यों का प्रतिनिधित्व था. रांची से 3 एवं भारत भारती के प्रदेश सचिव सुशील कुमार सिंह, उपाध्यक्ष राजीव रंजन सहित 6 प्रतिनिधियों ने जमशेदपुर से हिस्सा लिया.

26 जुलाई को अधिवेशन का उद्घाटन मुख्य अतिथि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) पूर्व अध्यक्ष डॉ सोमनाथ, जिन्होंने चांद पर चंद्रयान उतार कर विश्व में भारत को गौरांवित किया है, के कर कमलों से दीप प्रज्वलित कर हुआ. डॉ सोमनाथ ने अपने उद्बोधन में भारतीय सनातन धर्म में व्याप्त व्यापक ज्ञान की वैज्ञानिकता एवं वर्तमान के विज्ञान के बीच सामंजस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे देश के पौराणिक एवं वैदिक ज्ञान में विज्ञान का रहस्य छिपा है. इसके लिए उन्होंने ऋग वेद का उद्धरण भी दिया. उन्होंने अपने संबोधन में विश्वास व्यक्त करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान सरकार की उत्तम नीति के कारण भारत जो एक समय विश्वगुरु कहलाता था, अगले 20 वर्षों में पुनः विश्वगुरु अवश्य बनेगा. उन्होंने बतलाया कि विकास के साथ विरासत की रक्षा करते हुए, हर क्षेत्र में देश तीव्र गति से प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है.

हमें अपनी परंपरा और संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखना है. उन्होंने बतलाया कि पूर्व में चंद्रयान की असफलता के कारण वैज्ञानिकों में विश्वास की कमी आ गई थी, उनके मन में संशय था कि उनका यह दूसरा मिशन सफल होगा या नहीं, लेकिन मुझे पूरा विश्वास था और मैं आश्वस्त था कि चंद्रयान चांद पर सफलता पूर्वक उतरेगा और उसे मैं केवल देखना चाहता था. मेरी अंतरात्मा में जो दृश्य था, मैंने चंद्रयान को चंद्रमा पर उसी तरह उतरते देखा. यह घटना मेरे जीवन की अद्भुत घटना थी. ईश्वर ने मुझे पूर्व में ही सफलता का संदेश दे दिया था. उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान के झंडे में चांद होता है उसी चांद पर हमने अपना यान उतार दिया. उन्होंने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और राष्ट्र प्रथम का संदेश संपूर्ण देश में देने एवं राष्ट्भक्ति का अलख जागने वाले भारत भारती के प्रयासों की सराहना की एवं इसकी भावी सफलता की मंगल कामना की.

प्रथम दिवस में अनेक आकर्षक आयोजन हुए जिसमें संध्या में महाराष्ट्र की विशिष्ठ संस्कृति की एक झलक गीत, संगीत एवं नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति में दिखाई पड़ी. दूसरे दिन मुख्य अतिथि एवं प्रवक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरसंचालक रामदत्त चक्रधर थे जिन्होंने अपने ओजस्वी संबोधन सनातनी हिन्दू भारतीय संस्कृति में एकता के अनेक उदाहरण देते हुए इसे और भी आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि सनातन का प्रतीक हिन्दू है और हिन्दू का प्रतीक भारतीयता है, और भारतीयता का प्रतीक है राष्ट्रीयता . उन्होंने कहा कि जात, संप्रदाय और धर्म से उठ कर जो भी किसी खेल में भारत की विजय पर खुशियां मनाता है वही सही अर्थ में भारतीय है देशभक्त है. उन्होंने कहा, भारत अपने चरित्र के कारण स्वभाव से हिन्दू राष्ट्र रहा है और रहेगा. उन्होंने कई उदाहरणों के द्वारा राम नाम की व्यापकता की चर्चा करते हुए बतलाया कि किस प्रकार पुरुषोत्तम भगवान राम भारत में एकता के प्रतीक हैं.

भारत भारती के इस आयोजन में प्रत्येक भाग लेने वाले प्रतिनिधि को अपने साथ अपने घर आंगन से एक मुट्ठी चावल और एक मुट्ठी मिट्टी लाने को कहा गया था. उस चावल को मिला कर अंतिम दिन खीर बनाई गई थी जिसमें एकता का अप्रतीम मिठास थी. सदस्यों द्वारा लाई गई मिट्टी को भारत माता के मंदिर निर्माण में प्रयोग में लाया जाएगा. जब इन चावलों और मिट्टियों को प्रत्येक राज्य ने मंच पर रखे विशाल घड़े में संग्रहित करने हेतु अपने राज्य के समूह के साथ अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह की अगुवाई में झारखंड का बैनर लेकर बाजे गाजे के साथ मार्च किया तो वह एक दर्शनीय क्षण था. झारखंड के प्रतिभागियों की विशेषता यह थी कि जहां महिलाओं ने पारंपरिक झारखंडी साड़ियां पहन रखी थी वहीं सभी ने “जोहार” लिखा गमछा, जिसके एक छोर में भगवान बिरसा मुंडा का चित्र था तो दूसरी छोर में भारत भारती का, ओढ़ रखा था.

दूसरे दिन की संध्या को भारत माता की आरती उतारी गई जिसमें 400 से अधिक नर नारियों ने भाग लिया. इस आरती का दृश्य अनोखा था. परिसर में ही निर्मित भारत माता के मंदिर के समक्ष खुले प्रांगण में भारत के चित्र के किनारे खड़े हो कर चारसौ लोगों ने अपने हाथों में दिया जला कर आरती उतारी जिसकी छवि ड्रोन से उतारी गई. यह क्षण अत्यंत रोमांचक दृश्य था. संपूर्ण अधिवेशन अवधि में भारत माता के जयकारे लगते रहे और बंदे मातरम के नारों से वातावरण भक्तिमय रहा.

इस अधिवेशन का विषय सार एकता था अतः राष्ट्रीय एकता के जनक सरदार बल्लभ भाई पटेल जी की 150वीं जयंती वर्ष होने के नाते उनपर केंद्रित था. परन्तु यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा जी की भी 150वीं वर्षगांठ होने के नाते उनकी भी चर्चा हुई. इसके अतिरिक्त बंकिमचंद्र द्वारा रचित बंदे मातरम गीत के भी १५० वर्ष हो चुके, तो बंदे मातरम बंकिम चंद्र जी की चर्चा भी हुई. जब कार्यक्रम महाराष्ट्र में हो तो भला शिवाजी महाराज को कैसे भुला जा सकता है. जय भवानी के नारों से भी वातावरण गूंजायमान रहा. अतः स्वाभाविक रूप से सभा कक्ष एवं परिसर में इन चारों विभूतियों, शिवाजी महाराज, सरदार पटेल, भगवान बिरसा मुंडा एवं बंकिम चंद्र जी के चित्र लगे हुए थे. पुणे के इस अधिवेशन में बिरसा मुंडा की तस्वीर होने से जहां भारत भारती की एकात्मकता का लक्ष्य लक्षित होता है वहीं झारखण्ड राज्य का सम्मान भी बढ़ता है.

अंतिम दिन अनेक कार्यक्रम हुए जिनमें सक्रिय योगदान देने वाले सदस्यों को सम्मानित किया गया. उस अवसर पर भारत भारती के संस्थापक अध्यक्ष श्री सुभाष धवन जी, जो वर्तमान में सूरत में निवास करते हैं परंतु मूलतः वे हजारीबाग ( झारखंड ) के निवासी हैं, को उनके संस्था के लिए किए गए अमूल्य योगदान के लिए झारखंड की ओर से झारखंडी पगड़ी पहना कर एवं गमछा ओढ़ा कर सम्मानित किया गया. इस अधिवेशन की विशेषता यह रही कि संपूर्ण देश से मातृशक्ति की भागीदारी बहुत अधिक रही. भोजन और आवास की उत्तम व्यवस्था थी और आतिथ्य सत्कार में भारत भारती पुणे के सदस्यों ने कोई कसर नहीं छोड़ी.

अगला अधिवेशन का भार टीम जयपुर ने संभाली है तथा आगामी कार्यकारिणी की बैठक का उत्तरदायित्व टीम केरलम ने लिया है. आने वाले दिनों के लिए मुख्य कार्यक्रमों की रूप रेखा तय कर दी गई जिसके अंतर्गत जमशेदपुर में सैनिक सम्मेलन तथा पटने में मातृशक्ति सम्मेलन बड़े स्तर पर करने की घोषणा की गई . इसके अतिरिक्त झारखंड के लिए नए उत्तरदायित्व जिन सक्रिय सदस्यों को सौंपा गया उसमें ब्रिगेडियर बी जी पाठक (से नि) को मार्गदर्शक एवं राजीव रंजन जी को उपाध्याय का पदभार दिया गया. इस प्रकार भारत भारती का यह अधिवेशन अभूतपूर्व एवं अविस्मरणीय रहा.