Saturday, 7 November 2026
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अखिलेश यादव सनातन धर्म की चिंता न करें, केशव मौर्य ने सपा प्रमुख को दी नसीहत, यूपी की सियासत में बढ़ी हलचल

INT News6 November 2026 at 10:22 pm

Dhirendra Shastri Controversy : उत्तर प्रदेश में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. एक ओर केशव मौर्य ने अखिलेश यादव को सनातन धर्म और संत समाज के मामलों में टिप्पणी नहीं करने की नसीहत दी है, तो दूसरी ओर अखिलेश ने भाजपा सरकार को महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर घेरा है. दोनों नेताओं ने अपने-अपने बयानों के जरिए एक-दूसरे पर निशाना साधा.

केशव मौर्य बोले- सनातन धर्म की चिंता करने की जरूरत नहीं

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें सनातन धर्म और संत समाज की चिंता करने की जरूरत नहीं है. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातनी परिवार के संत हैं. उन्होंने अपनी भावनाओं में जो बात कही है, उसका संत समाज ने भी समर्थन किया है. ब्रज क्षेत्र में भी उनके वक्तव्य को लेकर कोई परेशानी नहीं है. परेशानी केवल अखिलेश यादव को है. मौर्य ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि सनातन धर्म का बढ़ता प्रभाव विपक्ष को बेचैन कर रहा है. अखिलेश यादव को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा पर टिप्पणी करने से पहले अपने राजनीतिक आचरण पर विचार करना चाहिए.

बागेश्वर धाम के संत पर टिप्पणी को बताया निंदनीय

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि किसी संत के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया देने का अधिकार संत समाज और आचार्यों को है, राजनीतिक दलों को नहीं. बागेश्वर धाम सरकार के प्रति अखिलेश यादव की टिप्पणी निंदनीय है. उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण और उनकी जन्मभूमि की चिंता है तो उन्हें मंदिर परिसर में बनी ईदगाह हटाने के आंदोलन में शामिल होना चाहिए. वह इस मुद्दे पर उनके साथ खड़े होंगे, लेकिन मुस्लिम वोट बैंक की चिंता के कारण अखिलेश ऐसा नहीं करेंगे.

राम मंदिर को लेकर भी सपा पर साधा निशाना

डिप्टी सीएम ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की राजनीति तुष्टीकरण पर आधारित है. राम मंदिर के भूमि पूजन और प्राण प्रतिष्ठा के अवसरों पर सपा नेतृत्व का रवैया भी देश देख चुका है. उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से सनातन संस्कृति को कमजोर करने की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी.

अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को महंगाई पर घेरा

दूसरी ओर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की गलत नीतियों और मुनाफाखोरी के कारण महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. खाद्य पदार्थों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और महंगाई चरम पर पहुंच गई है. भाजपा सरकार महंगाई रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है. अखिलेश यादव ने कहा कि डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतें पहले से ही आसमान पर हैं. महंगाई की मार से आम जनता परेशान है. सरकार के विभिन्न विभागों के आंकड़े भी बता रहे हैं कि महंगाई के रिकॉर्ड टूट रहे हैं.

त्योहारों पर जनता से बढ़ जाती है लूट

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि महंगाई बढ़ाकर हो रही लूट में भाजपा को चंदे के रूप में हिस्सा मिलता है. जब भी त्योहार आते हैं, जनता से यह लूट और बढ़ जाती है. महंगाई ने त्योहारों की खुशियां फीकी कर दी हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जब तक सत्ता में रहेगी, महंगाई बढ़ती रहेगी और जनता की लूट होती रहेगी. महंगाई और बेरोजगारी से परेशान जनता ने भाजपा सरकार को सत्ता से हटाने का फैसला कर लिया है.

कथावाचकों पर भी अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने कथावाचकों और धार्मिक आयोजनों के आयोजकों को लेकर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि आयोजकों और प्रायोजकों को ऐसे कथाकारों को कार्यक्रम में नहीं बुलाना चाहिए, जो अपने बयानों से समाज में वैमनस्य पैदा करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों के लिए धन ही धर्म बन गया है. सपा अध्यक्ष ने कहा कि कुछ तथाकथित कथावाचक बोलने और पहनावे से कथावाचक दिखते हैं, लेकिन कथा और प्रवचन उनके लिए व्यवसाय बन गए हैं. ऐसे लोग सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए समय-समय पर अनर्गल बयान देते हैं और अपनी भौतिक उपलब्धियों का प्रदर्शन करते रहते हैं.

आयोजकों को दी विरोध का सामना करने की चेतावनी

अखिलेश यादव ने आयोजकों और प्रायोजकों से ऐसे कथावाचकों से दूरी बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपने बयानों के बाद राजनीतिक संरक्षण पाकर बच निकलते हैं, लेकिन आयोजकों और प्रायोजकों को उसी शहर में जनता के बीच रहना पड़ता है. उनके मुताबिक, ऐसे बयानों से पैदा होने वाले सामाजिक वैमनस्य का खामियाजा आयोजकों को भुगतना पड़ सकता है. आस्थावान और श्रद्धालु लोग ऐसे कथावाचकों को बुलाने वाले आयोजकों को भी उनके बयानों का समर्थक मान सकते हैं. इससे स्थानीय स्तर पर आयोजकों और प्रायोजकों को जनता के विरोध का सामना करना पड़ सकता है.

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