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यूपी सीमा से सटा कैमूर का अखिनी गांव बना अपराधियों का अड्डा, पुलिस पर फायरिंग के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

Akhini Police Checkpost Kaimur : यूपी-बिहार सीमा से सटे कैमूर जिले के अखिनी गांव में मद्य निषेध विभाग का पुलिस पिकेट हटने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है. शराब तस्करों और अपराधियों की गतिविधियों के बीच पुलिस पर फायरिंग और मद्य निषेध विभाग के पदाधिकारियों पर हमले की घटनाओं ने सीमा क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अखिनी नदी पुल से पिकेट हटाये जाने के महीनों बाद भी वहां दोबारा पिकेट स्थापित नहीं किया गया है और न ही गांव में अस्थायी तौर पर पुलिस टीम तैनात की गयी है. ऐसे में दिन तो किसी तरह गुजर जाता है, लेकिन रात में ग्रामीण भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस के वरीय पदाधिकारी कब ठोस कदम उठायेंगे. बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद यूपी से बिहार की सीमा में प्रवेश करने वाले वाहनों और संदिग्ध लोगों की जांच के लिए रामगढ़ के बड़ौरा और नुआंव के अखिनी नदी पुल के पास मद्य निषेध विभाग की ओर से चेकपोस्ट स्थापित किये गये थे. बड़ौरा पिकेट अब भी चालू है, लेकिन अखिनी नदी पुल के पास का पिकेट करीब एक वर्ष पहले हटाकर बिहार की सीमा से लगभग चार किलोमीटर अंदर महरथा नहर पुल के पास शिफ्ट कर दिया गया.
पिकेट हटने के बाद सीमा पर निगरानी कमजोर होने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि अखिनी नदी पुल से पिकेट हटने के बाद सीमा पर निगरानी व्यवस्था कमजोर हुई है. इसका असर बीते 19 सितंबर को देखने को मिला, जब यूपी से बिहार के रोहतास जिले के परसतुआ हथियारों की खेप लेकर जा रहे अपराधियों को सीमा पर नहीं, बल्कि करीब तीन किलोमीटर अंदर जांच के दौरान रोका गया. इस दौरान अपराधियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी थी.
ग्रामीणों का मानना है कि यदि अखिनी नदी पुल के पास पुलिस पिकेट मौजूद रहता, तो संभव था कि अपराधियों को सीमा पर ही पकड़ लिया जाता या वे बिहार की सीमा में प्रवेश नहीं कर पाते.
इससे पहले 21 अप्रैल 2025 को गारा-चौबे नहर पथ पर शराब तस्करों और अपराधियों द्वारा उत्पाद विभाग की टीम पर लाठी-डंडों से हमला कर एक शराब तस्करी के आरोपित को छुड़ाकर ले जाने की घटना सामने आयी थी. इस घटना में उत्पाद विभाग के दारोगा समेत चार जवान घायल हुए थे. दारोगा की ओर से अखिनी गांव के करीब आधा दर्जन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. बताया जाता है कि इसी घटना के बाद उत्पाद विभाग ने अखिनी नदी पुल स्थित पिकेट को हटाकर महरथा नहर पुल के पास शिफ्ट कर दिया था.
इसके अलावा करीब दो वर्ष पहले शराब की सूचना पर अखिनी पहुंची नुआंव पुलिस की टीम पर भी गांव में हमला किया गया था. उस समय पुलिस को गांव के भीतर काफी विरोध का सामना करना पड़ा था.
सिर कटी लाश मिलने के बाद भी पिकेट बहाली की मांग
बीते पांच अगस्त को अखिनी गांव से सटे तालाब में युवक रविंद्र का सिर कटा शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गयी थी. घटना के बाद गांव पहुंचे एसपी शिखर चौधरी से ग्रामीणों ने बढ़ते अपराध का हवाला देते हुए अखिनी नदी पुल के पास पुलिस पिकेट को फिर से बहाल करने की मांग की थी.
उस समय एसपी ने डीएम से बातचीत कर मद्य निषेध विभाग के पदाधिकारियों को सूचित करने और नदी पुल पर पुलिस पिकेट जल्द बहाल कराने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया था. हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि महीनों बीत जाने के बाद भी उनकी सुरक्षा और अपराधियों व शराब तस्करों पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
सीमा का फायदा उठाकर यूपी भागने की आशंका
अखिनी गांव यूपी की सीमा से सटा हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के बाद आरोपितों के उत्तर प्रदेश की ओर भाग निकलने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में अखिनी पुल के पास प्रभावी जांच और निगरानी व्यवस्था जरूरी है.
ग्रामीणों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि अखिनी में पुलिस पिकेट कब बहाल होगा और सीमा पार से आने वाली शराब व हथियारों की खेप पर प्रभावी रोक कैसे लगेगी.
विधायक ने भी चेकपोस्ट बहाल करने की उठायी मांग
पुलिस पर फायरिंग की हालिया घटना के बाद अखिनी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से उठ रहे सवाल फिर सामने आ गये हैं. रामगढ़ विधायक सतीश कुमार सिंह ने कहा कि अखिनी चेकपोस्ट को सीमा से करीब तीन-चार किलोमीटर पीछे कर दिया गया है. उन्होंने विधानसभा चुनाव के बाद एसपी और डीएम से सीमा पर चेकपोस्ट फिर से स्थापित करने तथा अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की मांग की थी.
विधायक ने बताया कि 12 जून को बिहार विधानसभा की याचिका समिति की गृह विभाग से संबंधित बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया गया था.
रविंद्र की हत्या के बाद सांसद ने भी की थी पुलिस चौकी की मांग
बीते पांच अगस्त को अखिनी गांव के युवक रविंद्र की हत्या के बाद उसका शव मिलने पर बक्सर सांसद सुधाकर सिंह भी मृतक के परिजनों से मिलने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने एसपी शिखर चौधरी से मोबाइल फोन पर बात कर गांव में पुलिस चौकी खोलने और मद्य निषेध विभाग के पिकेट को महरथा से हटाकर दोबारा नदी पुल के पास स्थापित करने की मांग की थी.
सांसद ने सीमा क्षेत्र में पिकेट नहीं होने से शराब और हथियारों की तस्करी की आशंका जतायी थी. उस समय एसपी ने डीएम से बात कर पिकेट बहाल कराने की बात कही थी. इसके बावजूद अब तक पिकेट की बहाली नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी और असुरक्षा की भावना बनी हुई है.