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उज्जयिनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल...40 फिल्मों का स्क्रीनिंग के लिए चयन:देशभर से आईं 232 फिल्में, AI और माइक्रो ड्रामा भी शामिल; सार्थक सिनेमा पर जोर
उज्जैन में भारतीय संस्कृति, इतिहास, लोक परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को सिनेमा के माध्यम से सामने लाने के उद्देश्य से शनिवार को उज्जयिनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल-2026 का शुभारंभ हुआ। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित दो दिवसीय फेस्टिवल में देशभर से प्राप्त 232 फिल्मों में से चयनित 40 फिल्मों की स्क्रीनिंग की जा रही है। इनमें अंतरराष्ट्रीय प्रविष्टियों से चुनी गई फिल्में भी शामिल हैं। फेस्टिवल का समापन रविवार शाम 5 बजे पुरस्कार वितरण के साथ होगा। जूरी ने 40 फिल्मों को स्क्रीनिंग के लिए चुना फेस्टिवल के संयोजक राकेश शर्मा ने बताया कि जूरी के मूल्यांकन के बाद 40 फिल्मों को स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। इनमें शॉर्ट फिल्म, एआई फिल्म, माइक्रो ड्रामा और विज्ञापन फिल्में शामिल हैं। फिल्मों के विषय देशभक्ति, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, नारी सशक्तिकरण, परिवार, इतिहास, सिंहस्थ और नागरिक कर्तव्यों से जुड़े हैं। उत्कृष्ट फिल्मों को विभिन्न श्रेणियों में एक लाख रुपए तक की पुरस्कार राशि दी जाएगी। गणेश शंकर विद्यार्थी के जीवन पर बनाई एआई फिल्म फेस्टिवल में माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से आई श्रेयांश कुमार की टीम ने ‘विद्यार्थी’ नाम से शॉर्ट फिल्म बनाई है। यह पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी के जीवन पर आधारित डॉक्यू-ड्रामा है, जिसमें एआई तकनीक का भी उपयोग किया गया है। श्रेयांश के मुताबिक, फिल्म की शूटिंग में दो से तीन दिन लगे, जबकि प्रोडक्शन में करीब 15 दिन का समय लगा। प्री-प्रोडक्शन सहित करीब 15 से 20 लोगों ने फिल्म पर काम किया। उन्होंने कहा कि सिनेमा समाज का दर्पण है। फिल्म के जरिए गणेश शंकर विद्यार्थी के पत्रकारिता के माध्यम से समाज और देश के लिए किए गए योगदान को सामने लाने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा देना है। अभिनेता संजय मेहता बोले- कम समय में बड़ी बात कहती है शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ फिल्म ‘धुरंधर’ में अब्दुल भुट्टावी का किरदार निभाने वाले अभिनेता संजय मेहता ने किया। उन्होंने कहा कि ओटीटी, इंस्टाग्राम और रील्स के दौर में सिनेमा तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में भारतीय दृष्टि से सार्थक सिनेमा की जरूरत है। शॉर्ट फिल्म की जिम्मेदारी इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि वह कम समय में प्रभावी ढंग से बड़ी बात कह सकती है। मेहता ने कहा कि सामाजिक समरसता सहित कई ऐसे विषय हैं, जिन पर अभी पर्याप्त काम नहीं हुआ है। शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के माध्यम से इन विषयों को सामने लाने के साथ फिल्म निर्माण, तकनीक और अभिनय पर भी संवाद हो रहा है। उन्होंने इसे देशभर में सार्थक सिनेमा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। 10-12 फिल्मों में कर चुके हैं काम संजय मेहता ने बताया कि वे अब तक करीब 10 से 12 फिल्मों में काम कर चुके हैं। इनमें ‘धुरंधर’, ‘द केरला स्टोरी 2’, ‘धड़क 2’, ‘फिल्मिस्तान’, ‘ओमेर्टा’ और ‘ड्राई डे’ सहित अन्य फिल्में शामिल हैं। उनकी आगामी फिल्म ‘श्रीराम भूमि’ जनवरी में रिलीज होने वाली है। फेस्टिवल में जे. नंदकुमार, कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, कामाख्या नारायण सिंह, शैलेश प्रताप सिंह, विजय विक्रम सिंह, दिलीप लोकरे, योगेश कुरमे, संजय पटेल, फिल्म समीक्षक दीपक दुआ, अभिनेता राजेश तेलंग और अभिनेत्री भाषा सुंबली सहित विशेषज्ञ एवं कलाकार विभिन्न सत्रों में शामिल हो रहे हैं। रविवार को फिल्म स्क्रीनिंग, मास्टरक्लास और संवाद सत्रों के बाद शाम 5 बजे पुरस्कार वितरण किया जाएगा।