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11 महीने में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि दिवाकर का तबादला, हाईकोर्ट ने दी नई जिम्मेदारी

Ravi Kumar Diwakar transfer: 11 महीने में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाकर देश भर में सुर्खियों में आए मुजफ्फरनगर के एडीजे (ADJ) रवि दिवाकर का तबादला कर दिया गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट से हटाकर परिवार न्यायालय में अपर प्रधान न्यायाधीश के पद पर तैनात किया है. अपने कड़े फैसलों और कुछ मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर की गई टिप्पणियों के चलते वह लगातार चर्चा में रहे थे.
11 महीने में 10 हत्या के मामलों में 23 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा
मुजफ्फरनगर में ADJ फास्ट ट्रैक एवं NDPS कोर्ट में तैनात रवि दिवाकर ने 11 महीने के भीतर हत्या के 10 मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई. उनके इन फैसलों के कारण वह चर्चा में रहे. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरनगर के अलावा अन्य जिलों में भी रवि दिवाकर 13 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुना चुके हैं. इस तरह विभिन्न जिलों में उनके द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजाओं की संख्या 36 बताई जा रही है. हालांकि, मृत्युदंड की सजा सुनाया जाना और सजा पर अंतिम न्यायिक मुहर लगना अलग-अलग बातें हैं.
फास्ट ट्रैक कोर्ट से हटाकर परिवार न्यायालय में नियुक्ति
इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से जारी अधिसूचना के बाद रवि दिवाकर को मुजफ्फरनगर के फास्ट ट्रैक कोर्ट से स्थानांतरित कर परिवार न्यायालय में अपर प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी गई है. नई नियुक्ति के बाद वह परिवार न्यायालय में वैवाहिक विवादों और परिवार से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे. इससे पहले वह फास्ट ट्रैक एवं NDPS कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे. हालांकि, स्थानांतरण के पीछे किसी खास फैसले या कार्रवाई को आधिकारिक कारण बताए जाने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है.
NDPS मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी रहे चर्चा में
रवि दिवाकर NDPS मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर दिए गए कुछ फैसलों के कारण भी चर्चा में रहे हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने पुलिस की लचर कार्रवाई से जुड़े मामलों में कई IPS अधिकारियों के खिलाफ भी आदेश दिए थे. हालांकि, इन आदेशों के सटीक विवरण और स्थानांतरण से उनके किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है. ऐसे में उनके तबादले को इन फैसलों का परिणाम बताना उचित नहीं होगा. फिलहाल, हाईकोर्ट की अधिसूचना के अनुसार उन्हें परिवार न्यायालय में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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