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बीना विधायक पर 2 महीने में फैसला लेने का आदेश:निर्मला सप्रे पर दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, उमंग सिंघार ने लगाई थी याचिका
मध्यप्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक चुनी गईं निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है। कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को इस मामले में लंबित याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने को कहा है। यह याचिका जुलाई 2024 से लंबित है। यह याचिका विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दाखिल की थी। उनका आरोप है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीतने के बाद निर्मला सप्रे भाजपा में शामिल हो गईं। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पक्ष रखा। कोर्ट ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा किया जाना चाहिए। ऐसा तब भी जरूरी है, जब हाईकोर्ट को मामले में कोई तत्काल जरूरत नजर न आए। उमंग सिंघार ने निर्वाचन शून्य घोषित की मांग की थी निर्मला सप्रे ने 2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बीना सीट से जीत हासिल की थी। आरोप है कि बाद में उन्होंने भाजपा का समर्थन करना शुरू कर दिया और पार्टी के पक्ष में प्रचार भी किया। इसे संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल का मामला बताते हुए उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष से निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने और उनका निर्वाचन शून्य घोषित करने की मांग की थी। मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचकर भाजपा में शामिल होने का किया था ऐलान लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई 2024 को निर्मला सप्रे सागर जिले के राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंच पर पहुंची थीं। वहां उन्होंने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया था। इसके बाद 30 जून 2024 को उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के सामने दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए आवेदन दिया था। कांग्रेस का आरोप था कि 90 दिनों के भीतर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पार्टी ने न्याय के लिए अदालत का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर याचिका पर फैसला करना होगा। इस मामले से जुड़ी जानकारी बार एंड बेंच ने एक्स पर पोस्ट की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने भी इस पोस्ट को री-पोस्ट किया है।