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अक्षरा सिंह बनीं B.Ed टॉपर, पिता के सपनों को किया साकार, अब IAS बनने का है सपना

INT News2 November 2026 at 01:50 pm

Success Story Akshara Singh : बेटियां अगर ठान लें तो कोई भी मंजिल उनसे दूर नहीं रह सकती. जरूरत है उन्हें सही अवसर, अच्छे संस्कार और आगे बढ़ने का हौसला देने की. डुमरांव के छठिया पोखरा निवासी अक्षरा सिंह ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से इस बात को सच साबित किया है. विद्यालय में टॉपर रहने से लेकर बीएड में पूरे संस्थान में प्रथम स्थान हासिल करने तक अक्षरा ने अपनी शैक्षणिक प्रतिभा का परिचय दिया है. आज वह सरकारी शिक्षिका बनकर विद्यार्थियों का भविष्य संवार रही हैं. हालांकि, उनकी मंजिल अभी और बड़ी है. अब उनका सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित होकर समाज के लिए व्यापक स्तर पर योगदान देना है.

दसवीं में विद्यालय टॉपर, बीएड में पूरे संस्थान में प्रथम

अक्षरा सिंह की शैक्षणिक यात्रा शुरू से ही उपलब्धियों से भरी रही है. उन्होंने दसवीं की परीक्षा में अपने विद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया था. इसके बाद इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई पूरी की. शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के उद्देश्य से उन्होंने सभापति मिश्रा इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में बीएड में दाखिला लिया. यहां दो वर्षों तक कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने पूरे संस्थान में प्रथम स्थान प्राप्त किया. उनकी इस उपलब्धि ने परिवार और क्षेत्र का मान बढ़ाया.

पिता के सपनों को बनाया जीवन का संकल्प

अक्षरा सिंह अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने पिता स्वर्गीय डॉ. बालेश्वर सिंह को देती हैं. पिता से मिले संस्कार, अनुशासन, प्रेरणा और शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच ने उन्हें हर चुनौती का सामना करने की ताकत दी. आज उनके पिता भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी सीख और सपने अक्षरा के जीवन का मार्गदर्शन कर रहे हैं. वह अपनी हर उपलब्धि को अपने पिता को समर्पित करती हैं. उनके लिए पिता के सपनों को पूरा करना ही जीवन का सबसे बड़ा संकल्प है.

गुरु के मार्गदर्शन ने दिखाई शिक्षा की नई राह

अक्षरा की शैक्षणिक सफलता में बीएड संस्थान के प्रेसिडेंट चंदन कुमार मिश्र का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनके मार्गदर्शन ने अक्षरा के व्यक्तित्व और शैक्षणिक सोच को नई दिशा दी. अक्षरा का मानना है कि शिक्षा केवल सूचनाओं और डिग्रियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि अर्जित ज्ञान का व्यवहार में उपयोग करना ही शिक्षा को सार्थक बनाता है.

सरकारी शिक्षिका बनकर संवार रहीं विद्यार्थियों का भविष्य

वर्तमान में अक्षरा सिंह उच्च माध्यमिक विद्यालय, मधेपुरा में विज्ञान शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं. शिक्षिका के रूप में वह विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने और उनके भविष्य को संवारने में जुटी हैं. सरकारी नौकरी हासिल करने के बाद भी उन्होंने अपने बड़े लक्ष्य को नहीं छोड़ा है. अब वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर समाज और देश के लिए व्यापक स्तर पर काम करना चाहती हैं.

'लक्ष्मी मेरी लाडो' अभियान में अक्षरा की कहानी बनी प्रेरणा

दीपावली के अवसर पर दैनिक जागरण के विशेष अभियान 'लक्ष्मी मेरी लाडो' के तहत सामने आई अक्षरा सिंह की कहानी बेटियों की प्रतिभा, संघर्ष और आत्मविश्वास की प्रेरक मिसाल है. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि बेटियों को परिवार का विश्वास, उचित अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वे न केवल अपने माता-पिता के सपनों को साकार कर सकती हैं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं. डुमरांव की अक्षरा आज उन बेटियों के लिए मिसाल हैं, जो बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करती हैं.

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