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नाबालिग से दुष्कर्म का प्रयास, JJB ने सुनाया फैसला:राज्य स्तर के खिलाड़ी को दिया सुधरने का मौका, पीड़िता को मिलेगा ₹3 लाख का मुआवजा
पानीपत के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के प्रयास के एक मामले में सुधारात्मक फैसला सुनाया है। बोर्ड ने आरोपी नाबालिग को सुधरने का अवसर देते हुए 6 महीने के प्रोबेशन पीरियड पर भेजने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, बोर्ड ने पीड़िता को न्याय और आर्थिक राहत प्रदान करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की ओर से 3 लाख रुपए का मुआवजा देने का प्रावधान किया है। बोर्ड ने आरोपी को 6 महीने के प्रोबेशन पीरियड पर भेजते हुए सख्त हिदायत दी है कि वह इस दौरान किसी भी प्रकार की आपराधिक या असमाजिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा। प्रोबेशन अधिकारी 6 महीने तक उसके आचरण और चाल-चलन पर नियमित रूप से नजर रखेंगे और अपनी रिपोर्ट बोर्ड को सौंपेंगे। अगर उसका व्यवहार सुधारात्मक रहता है, तो उसका प्रोबेशन पूरा मानकर केस समाप्त कर दिया जाएगा। हालांकि, यदि वह किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि में लिप्त पाया जाता है, तो बोर्ड के पास उसका प्रोबेशन रद्द कर उसे वापस बुलाकर सजा देने का पूरा अधिकार सुरक्षित रहेगा। 2025 में सेक्टर 13-17 थाने में दर्ज हुआ था केस मामले की जानकारी देते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने बताया कि यह मामला अक्टूबर 2025 का है, जो थाना सेक्टर 13-17 पानीपत से संबंधित था। पुलिस ने मामले में BNS की संबंधित धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। पीड़िता ने अपने बयानों में बताया था कि आरोपी लड़का उसके पड़ोस में ही रहता था। 24 अक्टूबर 2025 को जब पीड़िता किसी काम से जा रही थी, तो आरोपी ने उसे झांसा दिया कि उसके पिता उसे बुला रहे हैं। जब किशोरी उसके साथ गई, तो आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया, जिससे पीड़िता को चोटें भी आईं। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक अन्य युवक ने आरोपी को डांटकर भगाया। पीड़िता ने घर जाकर परिजनों को आपबीती बताई, जिसके बाद उसके पिता की शिकायत पर केस दर्ज हुआ। हालांकि बीच-बचाव करने वाला प्रत्यक्षदर्शी गवाही देने नहीं आया, लेकिन बोर्ड ने पीड़िता के बयानों और साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को दोषी पाया। 9वीं का छात्र और राज्य स्तर का खिलाड़ी है आरोपी, 6 महीने कस्टडी में बिता चुका सुनवाई के दौरान जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा, सदस्य आशिमा कौशिक और अशोक कुमार की पीठ ने आरोपी के भविष्य, शिक्षा और खेल करियर पर गंभीरता से विचार किया। आरोपी नाबालिग पहले ही ऑब्जर्वेशन होम (बाल सुधार गृह) में 6 महीने की कस्टडी काट चुका है। आरोपी वर्तमान में 9वीं कक्षा का छात्र है और राज्य स्तर का खिलाड़ी भी रह चुका है। बोर्ड ने माना कि खिलाड़ी देश और प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। ऐसे में उसकी पढ़ाई और खेल करियर को पूरी तरह बर्बाद होने से बचाने के लिए उसे एक मौका दिया जाना न्यायोचित है।