Tuesday, 7 July 2026
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असली तृणमूल और सिंबल विवाद पर चुनाव आयोग को जल्द लेना होगा फैसला, 24 को है राज्यसभा चुनाव

INT News7 July 2026 at 07:18 pm

ECI Dilemma Bengal Rajya Sabha Bypolls: पश्चिम बंगाल की 3 राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई 2026 को होने वाले उपचुनाव ने राज्य के सियासी पारे को चरम पर पहुंचा दिया है. निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद अब यह मुकाबला सिर्फ सीटों को जीतने तक सीमित नहीं रह गया है. यह उपचुनाव निर्वाचन आयोग को उस सबसे बड़े और संवेदनशील कानूनी सवाल का फैसला करने के लिए मजबूर कर सकता है, जो पिछले कुछ समय से लंबित है- असली तृणमूल कांग्रेस कौन-सी है? ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर किसका हक है?- ममता बनर्जी या रीतब्रत बनर्जी?

क्यों आयी ऐसी परिस्थिति

यह स्थिति तब पैदा हुई, जब तृणमूल कांग्रेस के 3 राज्यसभा सांसदों- सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने पिछले महीने संसद के उच्च सदन और पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इन नेताओं ने विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाये थे. पार्टी में टूट के बाद ममता बनर्जी गुट और रीतब्रत बनर्जी गुट के बीच तृणमूल कांग्रेस पार्टी पर कब्जे की जंग छिड़ी हुई है.

20 जुलाई की समयसीमा और व्हिप का कानूनी संकट

पार्टी में वर्चस्व की जंग लड़ रहे दोनों ही गुट- ममता बनर्जी समर्थित धड़ा और विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी धड़ा, एक ही समय में खुद को मूल पार्टी घोषित कर रहे हैं. चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अपने-अपने संगठनात्मक दावों और दस्तावेजों को जमा करने के लिए 20 जुलाई की समयसीमा तय की है. इस बीच, 24 जुलाई को होने वाले मतदान में व्हिप (Whip) जारी करने को लेकर कानूनी पेंच फंस गया है.

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तृणमूल के 80 में से 65 विधायक रीतब्रत बनर्जी के साथ

विधानसभा में कुल 80 तृणमूल विधायकों में 65 विधायक बागी नेता रीतब्रत बनर्जी के साथ खड़े हैं. यदि ममता गुट राज्यसभा उम्मीदवार के लिए कोई व्हिप जारी करता है, तो बागी विधायक दल उसे मानने से इनकार कर सकता है, जिससे दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) और पार्टी की आधिकारिक मान्यता को लेकर अभूतपूर्व संवैधानिक संकट खड़ा हो जायेगा.

असली तृणमूल और सिंबल का फैसला जल्द

चुनाव आयोग से खबर मिली है कि राज्यसभा चुनाव की निष्पक्षता और तकनीकी शुद्धता बनाये रखने के लिए आयोग को 24 जुलाई के मतदान से पहले या उसके तुरंत बाद ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ के विवाद पर कोई अंतरिम या ठोस फैसला लेना पड़ सकता है. बागी गुट दो-तिहाई विधायी बहुमत के आधार पर पार्टी के नाम और सिंबल पर दावा ठोक रहा है. ममता गुट संगठनात्मक ढांचे और पार्टी के संविधान (वैधता 2027 तक) का हवाला देकर खुद को मजबूत बता रहा है.

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