समाचार · मध्य प्रदेश
आदिवासी महिलाओं ने कलेक्ट्रेट में बोरी भरकर लाई शराब उड़ेली:एसपी ऑफिस में भी प्रदर्शन कर अवैध बिक्री रोकने की मांग की
शिवपुरी में बुधवार को सहरिया क्रांति से जुड़ी आदिवासी महिलाओं ने शराबबंदी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महिलाएं बोरी में भरकर संदिग्ध कच्ची शराब कलेक्ट्रेट पहुंचीं और अपर कलेक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला के सामने कलेक्ट्रेट की दहलीज पर शराब उड़ेल दी। इसके बाद महिलाएं एसपी ऑफिस पहुंचीं और शराब की अवैध बिक्री व सप्लाई पर रोक लगाने की मांग की। महिलाओं ने अपर कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर गांवों में शराब पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बोलीं- रात में बोरे भरकर गांवों तक पहुंच रही शराब कलेक्ट्रेट में महिलाओं ने बताया कि गांवों में खुलेआम शराब पहुंच रही है। उनका कहना है कि इसका असर परिवारों के साथ बच्चों पर भी पड़ रहा है। महिलाओं ने सवाल उठाया कि जब रात के अंधेरे में बोरे भरकर शराब गांवों तक पहुंच सकती है, तो इस सप्लाई को रोकने की जिम्मेदारी किसकी है। महिलाओं के साथ लाई गई संदिग्ध शराब देखकर अपर कलेक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला ने तत्काल आबकारी टीम को बुलाया। उन्होंने संदिग्ध पदार्थ का नमूना लेने के निर्देश दिए। महिलाओं द्वारा लाई गई शराब की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वह किस प्रकार की शराब है। रात 4 बजे शुरू की निगरानी, शराब लेकर आए व्यक्ति को पकड़ने का दावा महिलाओं ने बताया कि कार्रवाई रात करीब 4 बजे शुरू हुई थी। उन्हें सूचना मिली थी कि गांव में शराब बेचने के लिए लाई जा रही है। इसके बाद सहरिया क्रांति से जुड़ी महिलाएं घरों से बाहर निकलीं। महिलाओं का दावा है कि उन्होंने शराब लेकर आए एक व्यक्ति को पकड़ लिया और उसके पास बोरों में रखी संदिग्ध कच्ची शराब अपने कब्जे में ले ली। महिलाओं ने शराब को मौके पर नष्ट करने के बजाय उसे प्रशासन के सामने ले जाने का फैसला किया। सुबह होते ही वे बोरे लेकर शिवपुरी कलेक्ट्रेट पहुंचीं। एसपी ऑफिस में सप्लाई नेटवर्क की जांच की मांग एसपी ऑफिस पहुंची महिलाओं ने मांग की कि केवल गांव में शराब बेचने वालों पर कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शराब कहां से आती है, कौन बनाता है और गांवों तक कौन पहुंचाता है, इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। महिलाओं ने गांवों में नियमित पुलिस और आबकारी गश्त बढ़ाने की मांग भी की। उनका कहना था कि वे कानून हाथ में नहीं लेना चाहतीं, लेकिन अपने गांव और बच्चों को नशे से बचाने के लिए उन्हें रात में खुद निगरानी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।