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जमशेदपुर: बिना वर्क ऑर्डर के ही ढाल दी नाली और सड़क, मानगो नगर निगम में 6.73 करोड़ का घोटाला

INT News29 June 2026 at 09:19 pm

जमशेदपुर से अशोक झा की रिपोर्ट

Jharkhand Nagar Nigam Scam, जमशेदपुर : जमशेदपुर के मानगो नगर निगम में विकास योजनाओं के नाम पर सरकारी राजस्व को चूना लगाने और नियमों को दरकिनार करने का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है. अल्पकालीन ई-टेंडर आमंत्रण सूचना की मूल फाइलों की जांच के दौरान करीब 6.73 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं पकड़ी गई हैं. मामले की गंभीरता और टेंडर मैनेज करने के इस खेल को देखते हुए मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता ने पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से विस्तृत उच्चस्तरीय जांच के कड़े आदेश दे दिए हैं. इसके साथ ही मेयर ने नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव और अपर नगर आयुक्त को पत्र लिखकर इस घोटाले में शामिल दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है. दूसरी ओर, इस पूरे प्रकरण पर मानगो नगर निगम के अपर नगर आयुक्त जितेंद्र यादव का पक्ष लेने के लिए जब उन्हें फोन किया गया, तो उनका मोबाइल बंद मिला और निगम के अन्य अधिकारी भी इस पर कुछ भी बोलने से पूरी तरह बच रहे हैं.

दिसंबर में ही कर दिया शिलान्यास

इस पूरे कथित घोटाले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि तत्कालीन अधिकारियों ने लापरवाही दिखाते हुए पिछले दिसंबर माह में ही कई बड़ी विकास योजनाओं का आनन-फानन में शिलान्यास (शिलापट्ट अनावरण) कर दिया था. हकीकत यह है कि जिस वक्त इन योजनाओं का शिलान्यास किया गया, उस समय तक न तो टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई थी, न एस्टीमेट राशि का अंतिम निर्धारण हुआ था और न ही कोई आधिकारिक वर्क ऑर्डर जारी किया गया था. वर्तमान स्थिति यह है कि धरातल पर कतिपय योजनाओं को आज तक न तो वर्क ऑर्डर अलॉट हुआ है और न ही अनिवार्य कागजी प्रक्रिया पूरी की गई है. इसके अलावा, तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से जब मानगो नगर निगम के चुनाव के बाद नए बोर्ड की बैठक की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी, ठीक उससे पहले बिना नवनिर्वाचित बोर्ड की सहमति और अनुमति लिए ही बैक-डेट में टेंडर जारी कर दिया गया. मेयर ने इसे सीधे तौर पर लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई बोर्ड की अवहेलना और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का खुला हनन बताया है.

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मेयर की जांच में फाइलों से पत्र गायब

मेयर सुधा गुप्ता द्वारा की गई फाइलों की प्रारंभिक समीक्षा में कई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक लूपहोल्स (कमियां) पाए गए हैं. “जांच में पाया गया कि फाइल पर लिखा पत्र नंबर 325/टीसी (तारीख 28.10.2025) सरकारी रिकॉर्ड और रजिस्टर से गायब है.” “साथ ही, नियमों को छोड़कर बिना ‘लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस’ (LOA) दिए ही अपने पसंदीदा ठेकेदार से एडवांस पैसा जमा कराकर एग्रीमेंट करने का गलत आदेश दे दिया गया. फाइल में मिला एग्रीमेंट का कागज भी अधूरा था और उस पर जरूरी दस्तखत (हस्ताक्षर) भी नहीं थे. इसके बावजूद जिम्मेदार अफसरों ने नियमों के तहत ठेकेदार का एडवांस पैसा जब्त करने या उसे ब्लैकलिस्ट करने की कोई कार्रवाई नहीं की. यही नहीं, टेंडर कमेटी के अध्यक्ष ने भी मीटिंग खत्म होने के पूरे 15 दिन बाद फाइल पर दस्तखत किए, जिससे पूरे फैसले पर शक पैदा होता है.

इन प्रमुख टेंडरों की आड़ में खेला गया भ्रष्टाचार का पूरा खेल

जांच रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य रूप से मानगो की दो बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी सड़क चौड़ीकरण योजनाओं के टेंडर में ही यह पूरा घालमेल किया गया है. इसमें पहली योजना वार्ड संख्या 09 के अंतर्गत पायल सिनेमा से पारडीह चौक तक नाली, स्लैब और पेवर्स ब्लॉक के साथ सड़क चौड़ीकरण की है, जिसकी कुल राशि 3 करोड़ 58 लाख 61 हजार 500 रुपये है. इसे पूरा करने के लिए 12 महीने का समय दिया गया था. वहीं दूसरी योजना वार्ड संख्या 08 के तहत मानगो चौक से पारडीह चौक तक नाली, स्लैब और पेवर्स ब्लॉक सहित सड़क चौड़ीकरण की है, जिसकी लागत 3 करोड़ 14 लाख 54 हजार 800 रुपये तय की गई थी और इसके लिए भी 12 महीने की अवधि निर्धारित थी. इन दोनों बड़ी योजनाओं में ही नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय गड़बड़ी की गई है.

क्या कहती हैं मेयर

मामले की गंभीरता पर बात करते हुए मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता ने कहा कि मानगो नगर निगम के अंतर्गत पारदर्शी, जवाबदेह और पूरी तरह से भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन देना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी धन के दुरुपयोग और स्थापित नियमों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी अधिकारी, जूनियर इंजीनियर या ठेकेदार को बख्शा नहीं जाएगा. उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है.

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