Friday, 14 August 2026
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नकली पिस्टल ने खोली पुलिस जांच की पोल आरोपी बरी:फरीदाबाद कोर्ट में पेश हथियार डमी निकला, साल 2022 में हुई थी लूट की वारदात

INT News14 August 2026 at 06:35 am

फरीदाबाद में लूट के एक मामले की कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में ऐसी कमी सामने आई, जिसने पूरे केस को कमजोर कर दिया। पुलिस ने जिस पिस्टल को वारदात में इस्तेमाल हुआ हथियार बताकर पेश किया था, मैकेनिकल जांच में वह डमी निकली। जांच में यह भी सामने आया है कि उससे फायरिंग नही की जा सकती। इसके बाद एडिशनल सेशन कोर्ट ने इस केस में आरोपी बनाए गए तरूण को बरी कर दिया। साल 2022 में हुई थी लूट की वारदात कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार गांव मोहना के रहने वाले देवी सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 17 दिसंबर साल 2022 को रात करीब नौ बजे वह ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहा था। फफूंदा गांव के सूरी भट्ठे के पास तीन युवकों ने उसे घेर लिया। आरोप था कि युवकों ने पिस्टल से उसके सिर पर वार किया। मारपीट में उसके सिर, कान और आंख पर चोट लगी। नकदी, बाइक और मोबाइल ले गए बदमाश इसके बाद आरोपी उसकी जेब से 1250 रुपये, हीरो स्प्लेंडर बाइक और मोबाइल फोन छीनकर फरार हो गए। पीडित की शिकायत के पर सदर बल्लभगढ़ थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तरुण को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर बाइक और उसके बैग से पिस्टल बरामद करने का दावा किया था। जिस हथियार को बनाया सबूत, वही निकला डमी कोर्ट में सुनवाई के दौरान बरामद पिस्टल की मैकेनिकल जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि पिस्टल डमी यानी नकली थी। उससे फायरिंग नहीं की जा सकती थी। कोर्ट ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना, क्योंकि पुलिस ने जिस हथियार को वारदात में इस्तेमाल हुआ बताकर तरूण के खिलाफ सबूत के तौर पर पेश किया था, वह असली हथियार ही नहीं था। पीडित ने आरोपी को नही पहचाना देवी सिंह ने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उसके साथ मारपीट कर बाइक, मोबाइल और नकदी छीनी थी। उसने कोर्ट में मौजूद तरुण को उन लोगों में शामिल होने से इनकार कर दिया। उसने यह भी कहा कि उसने पुलिस को तरुण का नाम नहीं बताया था। कोर्ट ने सबूतो पर उठाए सवाल कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस के द्वारा बरामद की गई बिना नंबर की बाइक को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि बाइक की बरामदगी की कार्रवाही में पीडित या किसी दूसरे व्यक्ति को शामिल नही किया गया। कोर्ट ने माना कि पुलिस आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नही कर पायी। इसके बाद एडिशनल सेशन जज सुधीर जीवन की कोर्ट ने तरूण को बरी कर दिया।