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24 घंटे खुलेंगे बाजार, 4 दिन की नौकरी... कितना सच?:MP में नए कानून को राज्यपाल की मंजूरी; क्या 12 घंटे की शिफ्ट होगी?
मध्य प्रदेश में अब दुकानें, मॉल, होटल और रेस्टोरेंट 24 घंटे खुले रखने का रास्ता साफ हो गया है। नए 'मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता, 2026' में प्रतिष्ठानों के खुले रहने के समय पर पहले जैसी सामान्य पाबंदी नहीं रखी गई है। यानी दुकानदार चाहे तो रात में भी कारोबार कर सकता है। लेकिन इसके साथ सोशल मीडिया पर 4 दिन के वर्क वीक, 12 घंटे की ड्यूटी और रातभर बाजार खुलने जैसे कई दावे भी वायरल हैं। इनमें कितना सच है? क्या कर्मचारी को भी रातभर काम करना पड़ेगा, महिलाओं की सुरक्षा कैसे होगी और नए कानून से वास्तव में क्या बदलेगा; समझते हैं मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में। सवाल 1: क्या अब दुकानें 24 घंटे खुलेंगी? क्या हफ्ते में 4 दिन काम करना होगा? जवाब: इसमें दो अलग-अलग बातें हैं, जिन्हें अलग करके समझना जरूरी है 1. दुकान/प्रतिष्ठान के लिए हां। संहिता की धारा 10(1) साफ कहती है कि स्थापनाओं के कामकाज के घंटों पर अब कोई सामान्य पाबंदी नहीं होगी। यानी दुकान, मॉल, होटल, रेस्टोरेंट चाहें तो 24 घंटे, सातों दिन खुले रह सकते हैं। हालांकि राज्य सरकार शराब की दुकानों जैसी कुछ श्रेणियों के लिए, कर्मचारी कल्याण, सार्वजनिक व्यवस्था या दूसरे सार्वजनिक हितों को देखते हुए, कामकाज के घंटे तय कर सकती है। 2.कर्मचारी के लिए नहीं, ऐसा कोई सीधा 4-दिन वाला नियम नहीं है। धारा 9 के तहत किसी भी कर्मचारी से तय साप्ताहिक घंटों यानी 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता। हां, कानून में एक लचीलापन जरूर है। नियोक्ता किसी कर्मचारी को, बिना मजबूर किए सिर्फ उसकी मर्जी से, किसी एक दिन में ज्यादा घंटे काम करके साप्ताहिक कोटा जल्दी पूरा करने की छूट दे सकता है, बशर्ते वह एक दिन में 12 घंटे से ज्यादा न हो। अगर हफ्ते के कुल घंटे तय सीमा से बढ़ जाएं, तो उस पर ओवरटाइम देना अनिवार्य है। गणित के हिसाब से एक कर्मचारी अगर खुद चाहे तो 4 दिन, 12-12 घंटे काम करके हफ्ते के 48 घंटे पूरे कर सकता है। लेकिन यह कोई डिफॉल्ट या अनिवार्य शेड्यूल नहीं, सिर्फ एक विकल्प है, वह भी कर्मचारी की सहमति से। कोई भी नियोक्ता किसी को इस तरह काम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। सवाल 2: तो क्या अब रात में दुकान खुली होने पर पुलिस बंद नहीं करा पाएगी? जवाब: सिर्फ रात हो जाने की वजह से दुकान बंद कराने की पुरानी पाबंदी अब नहीं रहेगी। सवाल 3: सरकार ने यह बदलाव क्यों किया और इससे किसे फायदा होगा? जवाब: सरकार का मकसद सिर्फ दुकानों को 24 घंटे खोलने की छूट देना नहीं है। इसके पीछे तीन उद्देश्य नजर आते हैं… 1. ज्यादा रोजगार पैदा करना अगर मॉल, होटल, रेस्टोरेंट और दूसरी दुकानें रात में भी खुलेंगी, तो उन्हें अलग-अलग शिफ्ट में कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। इससे होटल, सुरक्षा, सफाई, डिलीवरी, कैब और परिवहन जैसे क्षेत्रों में रोजगार बढ़ सकता है। हालांकि, यह तभी होगा जब रात में पर्याप्त ग्राहक आएंगे। सिर्फ 24 घंटे दुकान खोलने की अनुमति मिलने से अपने आप नौकरियां नहीं बनेंगी। 2. कारोबार करना आसान बनाना सरकार कारोबार से जुड़ी कागजी प्रक्रियाओं को भी सरल बना रही है। अब बार-बार पंजीयन कराने की बजाय एक बार रजिस्ट्रेशन के बाद स्थायी प्रमाण-पत्र और पहचान संख्या मिलेगी। इंस्पेक्शन की प्रक्रिया भी पहले से ज्यादा तय और पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है, ताकि कारोबारियों को अनिश्चित जांच का सामना कम करना पड़े। 3. रात की अर्थव्यवस्था विकसित करना सरकार चाहती है कि बाजार सिर्फ दिन में नहीं, रात में भी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनें। अगर बाजार देर रात तक खुले रहेंगे, तो खरीदारी के साथ होटल, रेस्टोरेंट, कैब, डिलीवरी, पार्किंग और दूसरी सेवाओं में भी कारोबार बढ़ सकता है। इंदौर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सराफा और 56 दुकान जैसे इलाके देर रात तक चलने वाली कारोबारी संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। सरकार इसी मॉडल को दूसरे शहरों तक ले जाना चाहती है। हालांकि, चुनौती भी है। करीब तीन साल पहले इंदौर के बीआरटीएस कॉरिडोर पर 24 घंटे कारोबार की अनुमति दी गई थी, लेकिन बढ़ते अपराध और सुरक्षा संबंधी शिकायतों के बाद यह व्यवस्था वापस लेनी पड़ी। यानी सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं होगा, उसे सफल बनाने के लिए सुरक्षा और बुनियादी व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होगी। सवाल 4: रात की शिफ्ट में महिलाएं काम कर सकेंगी? उनकी सुरक्षा कौन देखेगा? जवाब: हां, लेकिन इसमें कुछ शर्ते होंगी…