Sunday, 25 October 2026
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MP के नगरीय-निकायों में खरीदी की गड़बड़ियां AI से पकड़ी:ACS संजय दुबे बोले- 392 अधिकारियों पर कार्रवाई, 135 CMO भी शामिल

INT News25 October 2026 at 12:31 pm

मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में खरीदी और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर सामने आए वीडियो के बाद अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे ने पहली बार पूरे मामले पर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीडियो किसी अनियमितता को बढ़ावा देने का नहीं, बल्कि अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों और विभाग की निगरानी व्यवस्था के बारे में समझाने के लिए आयोजित प्रशिक्षण सत्र का हिस्सा था। दुबे के मुताबिक, विभाग ने खरीदी और भुगतान में गड़बड़ियों की पहचान के लिए ई-नगरपालिका सॉफ्टवेयर, जेम पोर्टल के आंकड़ों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया है। दुबे ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान नगरीय निकायों के कमिश्नर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO), सब इंजीनियर और अन्य अधिकारियों को डेटा के जरिए बताया गया कि विभाग उनकी खरीदी और खर्च पर किस तरह नजर रख रहा है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को अनियमित भुगतान, नियमों से ज्यादा खर्च और सरकारी धन के दुरुपयोग से रोकना था। पांच रुपए की खरीदी से 500 करोड़ के काम तक निगरानी ACS ने बताया कि नगरीय निकायों का अपना बजट और आय के स्रोत होते हैं। ऐसे में केवल सरकारी अनुदान के खर्च की जानकारी से पूरी निगरानी संभव नहीं थी। इसके लिए विभाग ने ई-नगरपालिका सॉफ्टवेयर के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था लागू की है। उनके अनुसार, एक रुपए का भुगतान भी इस व्यवस्था के जरिए किया जाता है। इसके अलावा, खरीदी के लिए जेम पोर्टल का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। विभाग जेम पोर्टल पर दर्ज खरीदी की जानकारी का मिलान ई-नगरपालिका के रिकॉर्ड से करता है। इसके बाद AI की मदद से अलग-अलग निकायों में एक ही सामग्री की खरीदी दरों की तुलना की जाती है। यह भी देखा जाता है कि एक ही वेंडर या ठेकेदार अलग-अलग निकायों को समान सामग्री किस दर पर उपलब्ध करा रहा है। विभाग यह भी जांचता है कि कहीं किसी काम को एक ही व्यक्ति को देने के लिए छोटे-छोटे टेंडरों में तो नहीं बांटा गया या निर्धारित सीमा से अधिक खरीदी तो नहीं की गई। दुबे के मुताबिक, विभाग में रोजाना करीब 1,000 से 1,500 ऑर्डर दिए जाते हैं। इनमें पांच रुपए की छोटी सामग्री से लेकर 50 करोड़ और 500 करोड़ रुपए तक के काम शामिल हैं। इतने बड़े डेटा का विश्लेषण मैन्युअल तरीके से संभव नहीं था, इसलिए तकनीक और AI की मदद ली गई। 392 अधिकारियों पर कार्रवाई, 135 सीएमओ शामिल दुबे ने कार्रवाई का ब्योरा देते हुए बताया कि प्रशिक्षण के समय तक 146 अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। इनमें से सात को बर्खास्त किया गया। अनियमित भुगतान के मामलों में अधिकारियों-कर्मचारियों से उस समय तक करीब 3 से 4 करोड़ रुपए की वसूली भी की गई थी। इसके अलावा, गलत तरीके से या गलत दरों पर सामग्री उपलब्ध कराने के मामलों में 80 से ज्यादा ठेकेदारों और सप्लायरों के खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि अलग-अलग स्तर के अधिकारियों को मिलाकर अब तक करीब 392 अधिकारी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। इनमें लगभग 135 मुख्य नगर पालिका अधिकारी शामिल हैं। मामलों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों से वसूली, वेतनवृद्धि रोकने, पदावनति और बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया लगातार जारी है। नागरिकों के पैसे का दुरुपयोग रोकना उद्देश्य ACS ने कहा कि विभाग की कोशिश है कि नगरीय निकायों को मिलने वाली राशि और उनकी खुद की आय का इस्तेमाल नागरिकों की जरूरतों और हितों के लिए किया जाए। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी स्तर पर अनियमितता नहीं होनी चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को यह समझाया गया कि उनके द्वारा किए गए काम और भुगतान का पूरा डेटा विभाग के पास उपलब्ध है और तकनीक के जरिए उसकी निगरानी की जा रही है। दुबे के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिकारियों को यह बताना है कि खरीदी और भुगतान की हर प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है, इसलिए नियमों के विपरीत काम करने से बचें और सरकारी धन का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करें। ये खबर भी पढ़ें… MP के नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार का VIDEO एक निकाय ने ₹2 लाख में कचरा वाहन खरीदा, तो दूसरे ने चार डस्टबिन के साथ इसी तरह के वाहन के लिए ₹6 लाख खर्च कर दिए। यानी अतिरिक्त सामान के नाम पर कीमत तीन गुना हो गई। कुछ निकायों ने डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीद डाले, जबकि उनके पास इतने वाहन चलाने के लिए पर्याप्त वार्ड तक नहीं हैं। आखिर सरकारी खरीदी के नाम पर यह सब क्या हो रहा है?पूरी खबर पढ़ें 200 LED बल्ब ₹60 लाख में खरीदे, जांच कराएगी सरकार मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी सामान की खरीदी में कीमतों का बड़ा अंतर सामने आया है। इसके बाद सरकार ने उच्चस्तरीय जांच कराने का ऐलान किया है। नगरीय प्रशासन विभाग के ACS संजय दुबे का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे खरीद की कीमतोंं में अंतर को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर।