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मेरठ में 815 मकानों पर चलेगा बुलडोजर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फूट-फूटकर रोने लगी धरने पर बैठी महिलाएं

UP News: मेरठ की सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. न्यायालय ने 44 सील की गई संपत्तियों पर किए गए अवैध निर्माण को हटाने और 815 मकानों के सामने किए गए सेटबैक अतिक्रमण को समाप्त करने के निर्देश दिए हैं. मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे फैसला आने के बाद पिछले 89 दिनों से धरने पर बैठी महिलाएं भावुक हो गईं और कई महिलाएं फूट-फूटकर रोने लगीं. उनका कहना था कि तीन महीने तक आंदोलन, पूजा-पाठ और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली.
फैसले के बाद छलका महिलाओं का दर्द
धरने पर मौजूद महिलाओं ने फैसले के बाद सरकार के प्रति नाराजगी जताई. उनका कहना था कि लंबे समय से सड़क पर बैठकर अपनी बात रखी, लेकिन किसी ने उनकी पीड़ा नहीं सुनी. महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें बेघर होने की स्थिति में पहुंचा दिया है. उन्होंने कहा कि जीवनभर की कमाई से घर और दुकानें बनाई थीं, जो अब खत्म होने की कगार पर हैं. उनका सवाल था कि इस उम्र में वे दोबारा घर और रोजगार कैसे खड़ा करें. धरने में शामिल शीतल पुजानी ने कहा कि तीन महीने तक लगातार संघर्ष करने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई. वहीं राधा गुप्ता ने कहा कि जब घर और कारोबार ही छिन गया तो लोगों से वोट की उम्मीद कैसे की जा सकती है. अन्य महिलाओं ने भी कहा कि उनका रोजगार खत्म हो गया है और अब भविष्य को लेकर गहरी चिंता है.
89 दिनों तक चला आंदोलन, पूजा-पाठ के जरिए मांगा न्याय
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि पिछले 89 दिनों से वे लगातार धरने पर बैठी थीं. इस दौरान सुंदरकांड पाठ, रुद्राभिषेक सहित कई धार्मिक अनुष्ठान कर न्याय की प्रार्थना की गई. उन्होंने कई जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपनी समस्याएं भी बताईं, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उनकी अंतिम उम्मीद भी टूट गई.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिए निर्देश
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने लोकेश खुराना की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए 44 सील संपत्तियों पर हुए अवैध निर्माण को हटाने का आदेश दिया. ये वे भवन हैं, जिनका मूल स्वरूप आवासीय था, लेकिन उनका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था. अदालत ने 815 मकानों में किए गए सेटबैक अतिक्रमण को भी हटाने के निर्देश दिए. सुनवाई के दौरान व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने पक्ष रखा.
पूरे मेरठ में होगी नियमों के उल्लंघन की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को मेरठ के अन्य आवासीय इलाकों की भी जांच कराने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि जहां आवासीय भवनों का नियमों के विपरीत व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है, उनकी पहचान कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए. यह रिपोर्ट सितंबर में होने वाली अगली सुनवाई में कोर्ट के सामने पेश की जाएगी.
सेंट्रल मार्केट में क्यों पहुंचा मामला सुप्रीम कोर्ट
सेंट्रल मार्केट में कुल 860 संपत्तियां हैं. इनमें अधिकांश भूखंड मूल रूप से आवासीय श्रेणी के थे, लेकिन समय के साथ उनका व्यावसायिक उपयोग शुरू हो गया. इसी को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. अदालत के पहले आदेश के बाद 44 संपत्तियां सील की गई थीं और एक भवन को गिराया भी गया था. अब 815 अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण हटाकर भवनों को उनके मूल स्वरूप में लाया जाए.
सभी श्रेणियों के भवनों पर समान नियम लागू
सेक्टर-2 के व्यापारी अर्पित मोगा के अनुसार, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भवन 25 मीटर, 38 मीटर, 44 मीटर या उससे बड़े हों, सभी पर एक समान नियम लागू होंगे. जिन भवनों का पूरा हिस्सा व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है, वहां पूरी कार्रवाई की जाएगी. वहीं जिन भवनों में आंशिक व्यावसायिक उपयोग हो रहा है, वहां मौके पर निरीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी.
EWS, LIG और MIG मकानों को भी नहीं मिली राहत
प्रभावित लोगों का कहना है कि EWS, LIG और MIG श्रेणी के मकानों को भी किसी प्रकार की राहत नहीं दी गई है. उनका आरोप है कि मकान का आकार छोटा हो या बड़ा, सेटबैक अतिक्रमण हो या अन्य तकनीकी खामियां, किसी भी आधार पर छूट नहीं दी गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन भवनों में बिना अनुमति अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई हैं, उन पर भी कार्रवाई की आशंका है. ऐसे में कई परिवारों के सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है.
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