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Varanasi Air Show: गंगा के ऊपर सिर्फ राफेल-सुखोई नहीं, काशी के नाम पर आसमान में बना इतिहास, जानें एयर शो की अनोखी कहानी

UP News: काशी के आसमान में इन दिनों सिर्फ लड़ाकू विमानों की गर्जना नहीं गूंज रही, बल्कि भारतीय वायुसेना के हवाई प्रदर्शन में बनारस की सांस्कृतिक पहचान की झलक भी दिखाई दे रही है. गंगा के ऊपर राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और स्वदेशी तेजस जैसे विमानों के करतबों ने लोगों को रोमांचित किया है. लेकिन इस एयर शो की एक खास बात ऐसी भी है, जो इसे सामान्य हवाई प्रदर्शन से अलग बनाती है. विमानों के कुछ फॉर्मेशन को काशी, गंगा और भगवान शिव से जुड़े नाम दिए गए हैं.
ओंकार, रुद्र और नीलकंठ जैसे नामों से सजा आसमान
वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में हवाई फॉर्मेशन के नामों के जरिये काशी की सांस्कृतिक पहचान को भी जगह दी गई है. ओंकार, रुद्र, त्रिदेव, कैलाश, त्रिलोचन, नटराज, महादेव, विश्वनाथ, पशुपति और नीलकंठ जैसे नाम इस आयोजन को स्थानीय रंग देते हैं. गंगा, वरुणा, हनुमान, सारनाथ और दशाश्वमेध जैसे नाम भी इस क्षेत्र की पहचान से जुड़े हैं. इस तरह हवाई प्रदर्शन में आधुनिक सैन्य कौशल और काशी की सांस्कृतिक विरासत का अनूठा मेल देखने को मिला.
राफेल से तेजस तक, लड़ाकू विमानों ने दिखाया दम
भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29, जगुआर और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस समेत कई विमानों ने हिस्सा लिया. आसमान में विमानों की तेज रफ्तार, सटीक तालमेल और अलग-अलग फॉर्मेशन ने दर्शकों का ध्यान खींचा. सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम के सामूहिक हवाई करतब और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के प्रदर्शन ने भी लोगों को रोमांचित किया.
हेलीकॉप्टर से उतरे गरुड़ कमांडो, दिखाया बचाव अभियान
इस आयोजन का एक और अहम पहलू भारतीय वायुसेना की आपात स्थिति में कार्रवाई करने की क्षमता का प्रदर्शन रहा. गरुड़ कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर बचाव अभियान का अभ्यास दिखाया. इस प्रदर्शन में कमांडो रो-रो पोत पर उतरे और विशेष अभियान से जुड़ी क्षमताओं का प्रदर्शन किया. इससे दर्शकों को सिर्फ लड़ाकू विमानों की ताकत ही नहीं, बल्कि संकट के समय विशेष प्रशिक्षित जवानों और हेलीकॉप्टरों की भूमिका की झलक भी मिली.
गंगा के दोनों किनारों पर जुटे दर्शक
‘विंग्स ओवर गंगा’ के दौरान वाराणसी और चंदौली की ओर गंगा तटों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. कई परिवार बच्चों के साथ विमानों का प्रदर्शन देखने आए. आसमान में भारतीय वायुसेना के विमानों की आवाजाही और सधे हुए करतबों ने घाटों पर उत्साह का माहौल बना दिया. 22, 24 और 25 अक्टूबर को निर्धारित इस तीन दिवसीय आयोजन का अंतिम प्रदर्शन रविवार को वाराणसी में हो रहा है. इसका प्रमुख केंद्र नमो घाट है. आयोजन का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता, तकनीकी दक्षता और हवाई कौशल को प्रदर्शित करना है.
काशी के लिए क्यों खास है यह एयर शो?
वाराणसी की पहचान दुनिया भर में गंगा, घाटों और प्राचीन संस्कृति से जुड़ी है. ऐसे शहर में आधुनिक लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन एक अलग अनुभव लेकर आया है. खास बात यह है कि आयोजन में इस्तेमाल किए गए कई फॉर्मेशन के नाम भी स्थानीय धार्मिक और भौगोलिक पहचान से जुड़े हैं. यही वजह है कि यह एयर शो केवल आसमान में करतब दिखाने तक सीमित नहीं है. इसमें भारतीय वायुसेना की ताकत, तकनीकी कौशल और काशी की सांस्कृतिक पहचान एक साथ नजर आती है.
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