Sunday, 6 September 2026
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साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा-लगाव कम करने के लिए प्रयास जरूरी:दादाबाड़ी में जप, तप और साधना का दौर जारी, 21 उपवास पूर्ण करने पर सम्मान

INT News6 September 2026 at 04:59 pm

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के तहत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन चल रहा है। साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने राग और उसके स्वरूप पर बात की। उन्होंने कहा कि राग को छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन इसे कम करने के लिए लगातार प्रयास जरूरी है। व्यक्ति जब राग के कारण और उसके परिणाम को समझता है, तो संसार की चीजों के प्रति उसका लगाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। साध्वीश्री ने फूलों के गुलदस्ते का उदाहरण देते हुए कहा कि उसे कितनी भी मजबूती से बांधकर रखा जाए, एक दिन वह टूटकर बिखर जाता है। इसी तरह जीवन में जिन चीजों और संबंधों को हम स्थायी मान लेते हैं, उनसे एक न एक दिन दूरी बनती है। इस बात को समझने से मोह कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि किसी बात को समझने के लिए उम्र जरूरी नहीं है। सीखने की रुचि हो तो छोटा बच्चा भी गहरी बात समझ सकता है। उनके अनुसार समझ उम्र से ज्यादा व्यक्ति के चिंतन और रुचि पर निर्भर करती है। जब व्यक्ति अपने जीवन और आसपास की चीजों पर विचार करता है, तो उसकी सोच में बदलाव आने लगता है और वह जरूरी तथा गैर-जरूरी चीजों के बीच अंतर समझने लगता है। दादाबाड़ी में धार्मिक गतिविधियां जारी

चातुर्मास के दौरान दादाबाड़ी में जप, तप और साधना का क्रम जारी है। श्रद्धालु पूजन, जाप, देववंदन, एकासना और अन्य धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। इसी क्रम में 21 उपवास की तपस्या पूरी करने पर अशोक सुराना का श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनकी तपस्या की अनुमोदना की और मंगलकामना की। ट्रस्ट और समिति के पदाधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा और उज्ज्वल झाबक मौजूद रहे। इसके अलावा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा और कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।