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"पाकिस्तान-चीन से भोपाल के कई एनजीओ लेते हैं फंड":विभाजन विभीषिका दिवस पर भोपाल सांसद बोले- जनता को पता चलना चाहिए विदेश से कितना पैसा आया
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के कार्यक्रम में शुक्रवार को भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने विदेशी फंडिंग को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि भोपाल में भी कई एनजीओ ऐसे हैं, जो विदेशों से फंड लेते हैं और कई बैंकों के माध्यम से पैसा निकालते हैं। शर्मा ने कहा कि देश की जनता को यह पता चलना चाहिए कि पाकिस्तान, चीन और अन्य देशों से कितना पैसा भारत आया और उसका इस्तेमाल कहां हुआ। भोपाल के विलीनीकरण द्वार के सामने आयोजित कार्यक्रम में शर्मा ने कहा कि देश में ऐसी शक्तियां मौजूद हैं, जो पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के इशारे पर काम कर देश को अस्थिर करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने विदेशी चंदे पर निगरानी के लिए एफसीआरए कानून को प्रभावी बनाया है। सरकार ऐसे संगठनों और एनजीओ की विदेशी फंडिंग पर निगरानी कर रही है, ताकि विदेश से आने वाले पैसे का दुरुपयोग न हो सके। सांसद ने कहा- सार्वजनिक होना चाहिए फंडिंग का हिसाब आलोक शर्मा ने कहा कि विदेश से आने वाले पैसे को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को सख्त करने का काम केंद्र सरकार कर रही है। विभाजन की पीड़ा को याद किया विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर भोपाल में मौन जुलूस निकाला गया और विभाजन की त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें 1947 में विस्थापित हुए लोगों के संघर्ष और पुनर्वास की कहानी दिखाई गई। कार्यक्रम में सांसद आलोक शर्मा और महापौर मालती राय ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भोपाल आए 150 विभाजन पीड़ितों का सम्मान किया। 10 लोगों को सरेंडर पत्र भी दिए गए। शर्मा ने कहा कि 14 अगस्त उत्सव का दिन नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों को याद करने का दिन है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपना घर, परिवार और संपत्ति खोई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, ताकि आने वाली पीढ़ियां उस त्रासदी को समझ सकें। भोपाल को आजादी के लिए दो साल करना पड़ा संघर्ष सांसद ने कहा कि देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ, लेकिन भोपाल तत्काल स्वतंत्र भारत का हिस्सा नहीं बना। तत्कालीन भोपाल रियासत के नवाब हमीदुल्ला खान भारत में विलय के पक्ष में नहीं थे। शर्मा ने भोपाल के विलय आंदोलन से जुड़े प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जुमेराती स्थित डाकघर के पोस्ट मास्टर ने देश की आजादी की खबर मिलने के बाद वहां तिरंगा फहरा दिया था। इसके बाद नवाब की पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और तिरंगे का अपमान किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद भोपाल में नवाब की हुकूमत के खिलाफ आंदोलन तेज हुआ। उद्धवदास मेहता, डॉ. शंकरदयाल शर्मा, प्रोफेसर अक्षय गुप्ता, मोहिनी देवी और अन्य आंदोलनकारी इसमें सक्रिय हुए। रायसेन के पास बौरास में तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में पांच नौजवानों के शहीद होने का भी उन्होंने उल्लेख किया। शर्मा ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद 1 जून 1949 को भोपाल का भारत में विलय हुआ। सिंध से आए लोगों को नागरिकता का भी जिक्र शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पाकिस्तान से भारत आए लोगों को नागरिकता देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सिंध प्रांत से आए लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, पूरा देश और केंद्र सरकार उनके साथ है। उन्होंने बताया कि अब तक 257 लोगों को भारत की नागरिकता दिलाई जा चुकी है। कार्यक्रम में महापौर मालती राय, भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र यति, जिला प्रभारी जसवंत सिंह हाड़ा, जिला उपाध्यक्ष अभय पंडित, कार्यक्रम संयोजक राकेश कुकरेजा सहित भाजपा पदाधिकारी, पार्षद, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी मौजूद रहे। विद्यार्थियों ने भारत माता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वेशभूषा में कार्यक्रम में हिस्सा लिया। अंत में विभाजन में जान गंवाने वालों की स्मृति में मौन रैली निकालकर श्रद्धांजलि दी गई।