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चंडीगढ़ में BJP की ‘जख्म 84 दे’ प्रदर्शनी:1984 की तस्वीरें देख भावुक हुआ परिवार, रवि शंकर प्रसाद ने राहुल गांधी से पूछे सवाल
पंजाब में कांग्रेस की रैली के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चंडीगढ़ में ‘जख्म 84 दे’ कॉन्क्लेव के जरिए 1984 के सिख नरसंहार के मुद्दे को उठाया। सेक्टर-24 स्थित होटल पार्कव्यू में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत नरसंहार से जुड़ी तस्वीरों की प्रदर्शनी से हुई। इसमें 1984 की घटनाओं को दिखाती ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें देखकर पीड़ित परिवार की एक महिला मंच पर ही भावुक हो गई। परिवार की पीड़ा सुनकर कार्यक्रम का माहौल भी भावुक हो गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकसभा सांसद रविशंकर प्रसाद, पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और पंजाब भाजपा प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने किया। कार्यक्रम में रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस और राहुल गांधी से 1984 की घटनाओं को लेकर सवाल भी उठाए। जलते घरों से लेकर बसों से खींचे जा रहे सिखों तक की तस्वीरें प्रदर्शनी में बड़े पैनलों पर पुरानी तस्वीरें लगाई गई हैं। इनके साथ पंजाबी भाषा में कैप्शन भी दिए गए हैं। तस्वीरों में दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में सिखों के घरों और झुग्गियों को जलाए जाने, कनॉट प्लेस में सिखों की दुकानों में आग लगाए जाने और दिल्ली की गलियों में हुई घटनाओं के बाद के हालात दिखाए गए हैं। एक पैनल में घर छोड़ने को मजबूर परिवारों को दिखाया गया है, जो अपना बचा हुआ सामान लेकर बैठे हैं। वहीं, दूसरी तस्वीर में सिखों को बसों से खींचकर बाहर ले जाते हुए दिखाया गया है। आयोजकों का कहना है कि इन तस्वीरों के जरिए नई पीढ़ी को 1984 की घटनाओं और पीड़ितों की पीड़ा से रूबरू कराया जा रहा है। राहुल गांधी और कांग्रेस से रविशंकर प्रसाद ने पूछे सवाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस और राहुल गांधी से 1984 के सिख नरसंहार को लेकर सवाल किए। भाजपा ने इस कॉन्क्लेव के जरिए चार दशक से अधिक समय बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने और उनके पुनर्वास के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। न्याय की लड़ाई और पुनर्वास पर होगी चर्चा ‘जख्म 84 दे’ कॉन्क्लेव सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें पीड़ित परिवारों, प्रत्यक्षदर्शियों, कानूनी विशेषज्ञों, पूर्व न्यायाधीशों और समुदाय के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। अलग-अलग सत्रों में चार दशक से चल रही न्याय की लड़ाई और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर चर्चा होगी।