Monday, 2 November 2026
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अकाली दल - भाजपा के गठबंधन पर सुखबीर बादल बोले:मैं पंडित नहीं हूं, थोड़े दिनों आपको पता चल जाएगा; कांग्रेस-आप पंजाब की दुश्मन

INT News2 November 2026 at 01:52 pm

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा दोनों एक साथ चुनावी मैदान में जाएंगे। इसको लेकर अभी संस्पेंस बरकार है। लेकिन चंडीगढ़ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में एनडीए की सरकार बनने के दावा किया है। इसी बीच अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल से गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "मैं कोई पंडित तो हूं नहीं। आपको थोड़े दिनों में पता चल जाएगा कि होना क्या है।" हालांकि इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के बयान के बीच शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने भी सस्पेंस बनाए रखा है। सुखबीर बादल ने चंडीगढ़ में पार्टी मुख्यालय में आयोजित पीसी में एक सवाल किया गया कि अमित शाह पंजाब में एनडीए की सरकार बनाने की बात करते हैं, जबकि केवल सिंह ढिल्लों अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। इस पर बादल ने कहा, “मैं कोई पंडित तो हूं नहीं। आपको थोड़े दिनों में पता चल जाएगा कि होना क्या है। गठबंधन पर उन्होंने कहा कि ” मैं पहले भी स्पष्ट कर चुका हूं कि पंजाब की दो पार्टियां दुश्मन हैं। एक कांग्रेस और दूसरी आम आदमी पार्टी। इनके अलावा बाकी जो भी पार्टियां हैं, जो पंजाब के हित्त में है। या जो हमारी फिलास्फी के साथ है। वह अपना है। 2020 में कृषि कानूनों पर अलग हुए थे दोनों दल अकाली दल ने सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से नाता तोड़ लिया था। दोनों दलों के बीच करीब दो दशक पुराना गठबंधन था। इसके बाद से पंजाब की राजनीति में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों के दोबारा साथ आने की संभावनाओं को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। हालांकि, फिलहाल किसी भी दल की ओर से गठबंधन को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। गठबंधन टूटने से दोनों का नुकसान अकाली दल का शहरी हिंदू वोट बैंक कमजोर हुआ तो भाजपा ग्रामीण सिख और किसान बहुल इलाकों में अपनी पकड़ नहीं बना पाई। 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में 24 साल पुराना गठबंधन टूटने के बाद दोनों दलों के पारंपरिक वोट बैंक में बिखराव आया। 2017 में अकाली दल ने 15 और भाजपा ने 3 सीटें जीती थीं। 2022 में अकाली दल 3 और भाजपा 2 सीटों पर सिमट गई। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18.56% और अकाली दल को करीब 13.4% वोट मिले, लेकिन भाजपा खाता नहीं खोल पाई और अकाली दल सिर्फ बठिंडा सीट जीत सका। अब 2027 चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच गठबंधन की चर्चा फिर तेज है।