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बदरीनाथ चढ़ावा चोरी: दान में मिले लैपटॉप गायब, जांच कमेटी 3 दिन बाद भी नहीं पहुंची
Badrinath Temple Donation Theft: बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावा प्रकरण के बाद अब गायब लैपटॉप को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को आठ-दस वर्षों में विभिन्न बैंकों ने 20 से 25 लैपटॉप दान में दिए, लेकिन इन लैपटॉप का कहीं कोई हिसाब-किताब मौजूद नहीं है। मामले में बीकेटीसी के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि मुझे फिलहाल लैपटॉप को लेकर जानकारी नहीं है। ऐसा प्रकरण सामने आता है तो निश्चित तौर पर इसकी जांच कराई जाएगी।मंदिर समिति के स्टॉक रजिस्टर में भी इन लैपटॉप का जिक्र नहीं है। ये लैपटॉप मंदिर समिति के कार्यालय में इस्तेमाल के लिए एसबीआई, पीएनबी, कैनरा बैंक आदि ने सीएसआर मद में दिए थे। लेकिन अब लैपटॉप के साथ ही स्टॉक रजिस्टर भी गायब है। समिति के सूत्रों का कहना है कि गायब लैपटॉप समिति से जुड़े कुछ लोग अपने साथ ले गए हैं। वहीं, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने मामले को लेकर अनभिज्ञता जताते हुए जांच कराने की बात कही हैं।जांच कमेटी के 3 दिन बाद भी नहीं हुए दर्शनबदरीनाथ धाम में चढ़ावे की गिनती के दौरान हुई कथित चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर समिति ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने का कहा है। लेकिन प्रकरण के सामने आने के तीन दिन बाद तक भी जांच कमेटी पहुंची ही नहीं है। अभी कमेटी के सदस्य दो दिन बाद नौ जुलाई को मौके पर पहुंचेंगे।तीन जुलाई को हिंदूवादी संगठन भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ से प्रकरण की शिकायत की थी। इस पर समिति के अध्यक्ष की संस्तुति के बाद चार अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है। इस टीम में विधि अधिकारी, वित्त नियंत्रक, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी (केदारनाथ) शामिल हैं। कमेटी के गठन के बाद तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन मामले में जांच अब दो दिन बाद शुरू होगी।स्पष्टीकरण का समय सोमवार को समाप्तसीईओ रांगड़ ने बताया कि 2 जुलाई को दान-चढ़ावे की गिनती में शामिल रहे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसका समय छह जुलाई को समाप्त हो गया है। शाम तक सभी संबंधितों के जवाब कार्यालय में पहुंचना अनिवार्य है। प्राप्त जवाबों के परीक्षण के बाद ही मामले में आगे का रुख स्पष्ट होगा।