Monday, 2 November 2026
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गुरुग्राम नगर निगम की रोड स्वीपिंग मशीनों में खेल:कागजों में दौड़ती रहीं मशीनें, एग्जिक्यूटिव इंजीनियर सुंदर श्योराण पर चार्जशीट की सिफारिश

INT News2 November 2026 at 04:51 pm

गुरुग्राम में प्रदूषण और ग्रैप के सख्त नियमों के बीच सड़क सफाई में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। निगम द्वारा सड़कों को धूलमुक्त करने के लिए चलाए जा रहे मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन में अनियमितताएं और वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा होने पर निगम कमिश्नर ने एग्जिक्यूटिव इंजीनियर सुंदर श्योराण के खिलाफ पेनाल्टी और चार्जशीट जारी करने की सिफारिश की है। उन पर मशीनों के हैंडओवर-टेकओवर में लापरवाही बरतने, पार्ट्स चोरी होने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इससे पहले एडिशनल कमिश्नर यश जालुका से जांच करवाई गई और उनकी रिपोर्ट के बाद कमिश्नर ने एक्सईएन के खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा (सजा और अपील) नियम, 2016 के नियम 7 के तहत मेजर पेनाल्टी और चार्जशीट की सिफारिश की गई है। भुगतान किया जाता रहा हैरानी की बात यह है कि निगम की तरफ से निजी एजेंसी को प्रति मशीन हर महीने 3 लाख 31 हजार रुपये का भारी-भरकम भुगतान किया जाता है। इसके बावजूद न तो तय रूटों पर मशीनें चलाई जा रही हैं और न ही नियमों का पालन हो रहा है। जीपीएस डेटा की जांच से पता चला है कि रात की शिफ्ट के दौरान 20 में से 7 स्वीपिंग मशीनों ने एक किलोमीटर का सफर भी तय नहीं किया और वे पूरी रात एक ही जगह पर खड़ी रहीं। नियमों के मुताबिक इन मशीनों को रात 9 बजे से सड़कों पर चलना था, लेकिन एजेंसी और अधिकारियों की मिलीभगत से खड़ी गाड़ियों का इंजन और जीपीएस चालू छोड़ दिया जाता था, ताकि कागजों में उनकी मूवमेंट दिखाकर हेराफेरी की जा सके। दावों और हकीकत का अंतर मशीन की न्यूनतम गति: नियमों के अनुसार मशीनों को 3 से 5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलना था, लेकिन मशीनें केवल खड़े रहकर तेल फूंकती रहीं। दूरी का लक्ष्य: प्रत्येक मशीन को प्रतिदिन कम से कम 30 किलोमीटर का सफर तय करना था, जबकि डेटा के अनुसार 13 चालू मशीनों में से 9 मशीनें महज 22 से 51 मिनट ही चलीं। शहर के लिए जरूरी कुल मशीनें: शहर के 404.6 किलोमीटर रोड लेंथ को साफ करने के लिए 72 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों की जरूरत है, लेकिन निगम के पास केवल 24-25 मशीनें हैं, जिनमें से भी 10 खराब पड़ी हैं। इसके कारण 75% से अधिक टारगेट एरिया बिना सफाई के ही छूट गया। एजेंसियों पर लगेगा जुर्माना, रिकवरी के निर्देश जांच में न केवल अधिकारी बल्कि काम संभालने वाली एजेंसियां, पुरानी एजेंसी 'मैसर्स जे.के. कॉन्ट्रैक्टर' और नई एजेंसी 'मैसर्स राधा कृष्ण को-ऑपरेटिव सोसाइटी' पर भी आरोप पाए गए हैं। नई एजेंसी ने ईमेल भेजकर दावा किया था कि सभी मशीनें फील्ड में चालू हैं, जबकि हकीकत में मशीनों के कई कंपोनेंट (कलपुर्जे) गायब थे और वे मरम्मत के अभाव में सेक्टर-47 के खुले मैदान में धूल खा रही थीं। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया ने दोनों क्लस्टर हेड को डिफॉल्टर एजेंसियों पर भारी जुर्माना लगाने और गायब पार्ट्स व मरम्मत की लागत वसूलने के सख्त निर्देश दिए हैं। दो साल से अनियमितताएं हो रहीं इस बारे में कुछ पार्षदों का भी कहना है कि रोड स्वीपिंग के नाम पर पिछले दो सालों से लगातार वित्तीय अनियमितताएं हो रही हैं। जनता की निगरानी के लिए बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल के आईडी-पासवर्ड भी ब्लॉक पड़े हैं। लापरवाही पर लगातार कार्रवाई की जा रही इस बारे में निगम प्रवक्ता की तरफ से साफ किया गया है कि लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसी से जवाब तलब कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लगातार कार्रवाई की जा रही है।