Tuesday, 13 October 2026
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अपहरण-मारपीट केस में नाबालिग समेत 4 को कैद की सजा:मां की FIR में समझौते का दबाव था; छीनाझपटी के आरोपों से बरी हुए

INT News13 October 2026 at 06:01 am

चरखी दादरी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) सतीश कुमार की अदालत ने वर्ष 2018 के एक चर्चित मामले में एक नाबालिग समेत 4 दोषियों को 5-5 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई है। हालांकि, साक्ष्यों और गवाहियों के अभाव में कोर्ट ने इनको छीना झपटी के आरोप से बरी कर दिया है। कोर्ट ने चारों आरोपियों IPC की धारा 365 (अपहरण) और 506 (जान से मारने की धमकी) के तहत धारा 34 के साथ दोषी ठहराया है। कोर्ट ने इस मामले में एक नाबालिग को भी दोषी माना है। घटना के समय किशोर की उम्र को देखते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) भिवानी ने धारा 15 के तहत प्रारंभिक मूल्यांकन कर 9 अक्टूबर 2018 को मामले को बालिग/वयस्क की तरह चिल्ड्रन कोर्ट में चलाने के लिए स्थानांतरित कर दिया था। जाने क्या था ये पूरा मामला ? यह मामला थाना सिटी दादरी में दर्ज एफआईआर संख्या 212 (7 जून 2018) से संबंधित है। सिंगाण पाना (दादरी) निवासी लकी ने आरोप लगाया था कि 4 जून 2018 की शाम करीब 7:00 बजे जब वह अपने घर के बाहर मौजूद था, तब मंगू, मोनू, निकू और वीरेंद्र वहां पहुंचे। इनके साथ एक नाबालिग लड़का भी था। आरोपियों ने लकी की मां द्वारा महिला थाना चरखी दादरी में दर्ज कराई गई एक शिकायत में फैसला (समझौता) करने का दबाव बनाया। लकी द्वारा इनकार करने पर आरोपी उसे जबरन मंगू के घर ले गए और उसके साथ जमकर मारपीट की। शोर सुनकर जब मंगू के परिजन इकट्ठे हुए, तो आरोपी लकी को उठाकर वर्धमान स्कूल के पीछे ले गए। वहां मोनू ने लकी की ठोड़ी (Chin) पर चाकू से वार किया, मंगू ने देसी कट्टे के बट से उसके सिर पर हमला किया और अन्य आरोपियों ने डंडों व ईंटों से पीटा। लकी ने यह भी आरोप लगाया था कि झगड़े के दौरान मोनू ने उसकी जेब से 7,000 रुपये छीन लिए थे। गंभीर हालत में लकी को इलाज के लिए भिवानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अदालत ने अभियोजन पक्ष (Prosecution) की ओर से पेश किए गए 13 गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस साक्ष्यों का गहनता से विश्लेषण करने के बाद निम्नलिखित बिंदुओं पर फैसला दिया: अपहरण और धमकी का अपराध साबित शिकायतकर्ता लकी और उसकी मां कृष्णा के बयानों और मेडिकल साक्ष्यों से यह पूरी तरह साबित हुआ कि आरोपियों ने फैसला न करने पर लकी को जान से मारने की धमकी दी और उसे जबरन उठाकर ले जाकर स्कूल के पीछे मारपीट की। एफआईआर में देरी का कारण स्पष्ट: बचाव पक्ष द्वारा एफआईआर में 3 दिन की देरी पर उठाए गए सवालों को कोर्ट ने खारिज कर दिया, क्योंकि अस्पताल से प्राप्त रिपोर्ट (BHT) के अनुसार घायल लकी 7 जून 2018 तक बयान देने के लिए फिट नहीं था। कोर्ट ने इनको सुनाई सजा कोर्ट ने वीरेंद्र उर्फ वीरा, युधिष्ठिर उर्फ मंगू और अनुराग उर्फ मोनू को आईपीसी की धारा 365 और 506/34 के तहत दोषी ठहराया है। मामले में सजा की अवधि पर बहस और फैसला सुनाने के लिए आगे सुनवाई तय की गई है।