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ग्रामीण बोले- अफसर शिवराज की भी नहीं सुनते:सीहोर में आदिवासियों के घर तोड़ने का मामला, वन विभाग बोला- जिन्हें हटाया उनके पक्के मकान बने
दोपहर 2 बजे वन विभाग के 30-40 लोग 4 जेसीबी और ट्रैक्टर लेकर आए और देखते ही देखते हमारा पूरा गांव उजाड़ दिया। यह कहते हुए कोसमी गांव की बसंती भावुक हो जाती हैं। 11 अक्टूबर को सीहोर जिले के कोसमी गांव के पास वन विभाग ने 12 बारेला आदिवासी परिवारों के घर तोड़ दिए। विभाग का दावा है कि परिवारों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया था, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि वे 2004 से यहां रह रहे हैं। ये भी कहा कि अफसर इतने बड़े हो गए कि वे अब शिवराज जी की भी बात नहीं सुन रहे हैं। मामला तब और गरमा गया, जब केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई को अवैध बताया। मामले की पड़ताल के लिए की टीम जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर कोसमी पहुंची। टीम ने धरने पर बैठे ग्रामीणों और वन विकास निगम के अधिकारियों से बात की। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट.. पेड़ के नीचे गुजारा, जमीन पर बिखरे घरों के अवशेष कोसमी और सिंहपुर के बीच जंगल के कच्चे रास्ते से मौके पर पहुंची की टीम को टूटे घर और बिखरा सामान दिखाई दिया। लकड़ी और कवेलू से बने मकान जमीन पर ढह चुके थे। महिलाएं पेड़ के नीचे चूल्हा जलाकर खाना बना रही थीं, जबकि बच्चे धूल में खेल रहे थे। गोद में बच्चे को लिए बसंती ने कहा, वन विभाग के 30-40 लोग 4 जेसीबी और ट्रैक्टर लेकर आए। देखते ही देखते हमारा पूरा गांव बर्बाद कर दिया। ऐसा अत्याचार किसी के साथ नहीं होना चाहिए। अब खुले आसमान के नीचे पेड़ के सिवा हमारा कोई आसरा नहीं है। ग्रामीण बोले- पहले कुएं से पानी पिया, फिर उसे तोड़ दिया मुख्य सड़क स्थित वन विकास निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे विमलेश कुमार बारेला और विक्रम सिंह बारेला ने कार्रवाई से हुए नुकसान की जानकारी दी। विक्रम सिंह ने बताया, ‘हमने 4-5 लाख रुपए खर्च कर सिंचाई और पीने के पानी के लिए कुआं बनवाया था। वन अमले ने पहले इसी कुएं का पानी पिया और फिर जेसीबी से उसे तोड़ दिया। अब उसमें सिर्फ कीचड़ बचा है। हमारी 5 एकड़ में लगी लाल अरहर की खड़ी फसल भी रौंद दी गई।' ग्रामीणों का दावा है कि वे पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। उनके पास 2004 और 2008 की 'दंड पर्चियां' हैं, जिन्हें वे अपने पुराने कब्जे का प्रमाण बताते हैं। उन्होंने वन अधिकार कानून (FRA) के तहत पट्टे के लिए दावा भी किया है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह मामला अदालत में लंबित है। वन विकास निगम का पक्ष: 3.37 लाख पौधे लगाने के बाद कब्जे का आरोप वन विकास निगम ने कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई बेदखली बताया है। निगम के अनुसार, मामला लड़कुई परिक्षेत्र के रिजर्व फॉरेस्ट कक्ष क्रमांक RF 426 से जुड़ा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 186.960 हेक्टेयर है। लड़कुई की परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) जया यादव के मुताबिक आदिवासियों ने 32 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया है। रेंजर का दावा: कुछ प्रभावित परिवारों के पास पहले से पक्के मकान लड़कुई की परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) जया यादव के मुताबिक, कार्रवाई से पहले परिवारों को सामान निकालने का समय दिया गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। उन्होंने दावा किया कि प्रभावित 12 लोगों में शामिल सिंहपुर के पूर्व सरपंच विक्रम सिंह बारेला और खेल सिंह के पक्के मकान गांव में पहले से हैं। रेंजर के अनुसार, वे अतिरिक्त वन भूमि पर कब्जा किए हुए थे। भाजपा विधायक का आरोप: वन विभाग के कुछ अधिकारी सरकार को बदनाम कर रहे बुदनी से भाजपा विधायक रमाकांत भार्गव ने कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा, "मुझे लगता है कि वन विभाग के कुछ अधिकारी सरकार को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं। हम इसकी शिकायत मुख्यमंत्री मोहन यादव से करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। फिलहाल, 12 प्रभावित परिवार वन विकास निगम कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर धरना दे रहे हैं।