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जालंधर में महिला से सोने की चेन झपटी:हफ्ते भर के अंदर स्नेचिंग की दुसरी वारदात, पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जालंधर कैंट में लगातार सामने आ रही लूटपाट की वारदातों ने स्थानीय निवासियों में दहशत और पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में एक के बाद एक लूट की दूसरी बड़ी घटना सामने आने के बाद इलाके के लोगों की चिंता काफी बढ़ गई है। सरद बाजार इलाके में एक्टिवा सवार दो बदमाशो नें महिला के चेन छीनकर फरार हो गए है। इस स्थिति ने पुलिस की गश्त प्रणाली और सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। जालंधर कैंट को शहर का बेहद शांत, पॉश और सुरक्षित इलाका माना जाता है। हालांकि, हाल के दिनों में यहां जिस तरह से बेखौफ लुटेरे वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, उससे पूरे इलाके का माहौल गर्मा गया है। ताजा मामले में जालंधर कैंट के मुख्य बाजार में लूट की दूसरी वारदात सामने आई है। यह वारदात जालंधर कैट के सदर बाजार का है। जहां दिनदहाड़े महिला के चेन को दो एक्टिवा सवार से लूट कर फरार हो गए।
पहले भी महिला से दिनदहाड़े वैग छीना गया था इससे पहले भी कैंट इलाके में ही दिनदहाड़े एक व्यक्ति को निशाना बनाया गया था। बदमाशों ने दिन के उजाले में एक राहगीर का बैग छीन लिया और बड़ी आसानी से मौके से फरार हो गए थे। उस घटना की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि लुटेरों ने एक और वारदात को अंजाम देकर पुलिस की कार्यशैली को खुली चुनौती दे डाली है। जिस मुख्य बाजार में हर समय चहल-पहल रहती है और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के दावे किए जाते हैं, वहां इस तरह की घटनाएं होना बेहद गंभीर विषय है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब मुख्य बाजार जैसी जगह पर ही लोग महफूज नहीं हैं, तो आम गलियों और मोहल्लों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा का क्या होगा? लगातार हो रही इन वारदातों से गुस्साए लोगों और स्थानीय दुकानदारों ने पुलिस की गश्त और मुस्तैदी पर सवाल दागे हैं। लोगों का सवाल है कि दिन के समय जब पुलिस बल तैनात रहता है, तब लुटेरे इतनी आसानी से लूट की वारदात करके कैसे भाग निकलते हैं? क्या पुलिस की गश्त सिर्फ नाममात्र की रह गई है?
पुलिस प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की फिलहाल, इन घटनाओं के बाद कैंट क्षेत्र के निवासियों ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने और संदिग्धों पर कड़ी नजर रखने की मांग की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस इन मामलों को कितनी गंभीरता से लेती है, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान कब तक करती है और उन्हें कब तक सलाखों के पीछे भेजती है।