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किताबों के ज्यादा दाम वसूले तो दुकानदार पर 10 गुना तक जुर्माना; इन 5 मामलों में जेल की सजा घटेगी

किताबों की कालाबाजारी या महंगे दाम पर बेचने वाले कारोबारियों पर सरकार आर्थिक जुर्माना बढ़ाने जा रही है। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट ने जन विश्वास एक्ट में संशोधन के तहत पांच और कानूनों में जेल की सजा के प्रावधान को हटाते हुए जुर्माने की राशि को दस गुना तक बढ़ाने पर सहमति दी है। आगामी विधानसभा सत्र में द्वितीय उत्तराखंड जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी के लिए लाया जाएगा।लोकसंपत्ति विरूपण निवारण अधिनियमस्याही, खड़िया, मिट्टी आदि से किसी सरकारी संपत्ति पर विज्ञापन लिखना या चिपकाने पर एक साल की कैद को तीन महीने किया जाएगा। जबकि आर्थिक जुर्माना दोगुना करते हुए 10 से बढ़ाकर 20 हजार रुपये किया जाएगा।पंचायती राज अधिनियमकोई कार्मिक दायित्वों का बिना कारण उल्लंघन करता है तो 250 रुपये या तय किए गए जुर्माने की सजा हो सकती है। पर अब यह दंडनीय संज्ञेय अपराध नहीं होगा। इसे सरल करने की संस्तुति की गई है।निवेश के लिए संपत्ति ली तो 92% तक मिलेगा भुगतानराज्य में विकास योजनाओं में निवेश के लिए सार्वजनिक उपक्रम, निकायों से ली जाने वाली संपत्ति से प्राप्त धन के लिए भी मानक तय हो गया। सार्वजनिक उपक्रम, स्वायत्तशासी संस्था, निगम, परिषद की संपत्ति के विनिवेश से प्राप्त धन का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित संस्था को दिया जाएगा। बाकी आठ प्रतिशत धनराशि यूआईआईडीबी को फीस के रूप में मिलेगी। आज कैबिनेट ने उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियम) अधिनियम, 2023 में संशोधन को मंजूरी दे दी।उप्र पाठय पुस्तक अधिनियमकोई कारोबारी न स्टॉक में उपलब्ध किताब की बिक्री रोकेगा और न अधिसूचित मूल्य से ज्यादा वसूल करेगा। ऐसा करने पर अभी एक से तीन साल तक जेल का प्रावधान है। नए प्रावधान में जेल की सजा हटा दी गई है। लेकिन अधिक वसूली गई रकम का दस गुना या दो लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। दोषी पाया गया व्यक्ति गलत बयान देता है तो तीन साल की जेल का प्रावधान है। नई व्यवस्था में सजा को घटाते हुए छह महीने की जेल या दो लाख रुपये जुर्माना लगेगा। या दोनों ही लागू हो सकते हैं।मत्स्य अधिनियमप्रतिबंधित क्षेत्र में मछली के शिकार पर एक हजार तक के बजाय पांच से दस हजार जुर्माना। विस्फोटक से शिकार पर दो हजार के बजाय 20 हजार जुर्माना। जहर से मछली मारने पर तीन साल की कैद या पांच हजार जुर्माने के स्थान पर दो माह की जेल और 20 हजार जुर्माना लगेगा।जल प्रबंधन एवं विनियामक अधिनियमजल वितरण के कारोबार में दोषी एक साल की कैद के बजाए छह माह की कैद होगी। जबकि एक लाख रुपये तक जुर्माना और दूसरी बार भी अपराध करने पर प्रतिदिन 20 हजार रुपये जुर्माना यथावत रहेगा।क्या कहते हैं अधिकारीप्रमुख सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि विभिन्न अधिनियमों में सामान्य अपराधों के लिए जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार के निर्देश पर इन अधिनियमों को संशोधित किया जा रहा है।