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पैसों के अभाव में 9 नवंबर से बंद हो सकता है मध्याह्न भोजन, अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की चेतावनी

INT News29 October 2026 at 06:38 pm

रांची: झारखंड के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना के संचालन को लेकर संकट गहराता जा रहा है. शिक्षकों का आरोप है कि चालू वित्तीय वर्ष के सात महीने बीत जाने के बावजूद कुकिंग कॉस्ट मद में राज्य स्तर से एक रुपया भी उपलब्ध नहीं कराया गया है. इसके बावजूद विभागीय पदाधिकारियों के दबाव में प्रधानाध्यापकों को अपने खर्च और जोखिम पर बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है. इस स्थिति से नाराज अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने आंदोलन की घोषणा की है. संघ ने चेतावनी दी है कि आठ नवंबर तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो नौ नवंबर से राज्यभर के संबंधित विद्यालयों में मध्याह्न भोजन का संचालन बंद कर दिया जाएगा.

मई से ही स्कूलों में भोजन बनाना हुआ मुश्किल

शिक्षकों का कहना है कि वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में कुछ दिनों तक पूरक पोषाहार मद में उपलब्ध पैसों से सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के माध्यम से मध्याह्न भोजन परोसा गया. हालांकि, इस मद में उपलब्ध राशि बेहद कम थी. इसके कारण मई महीने से ही कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन का नियमित संचालन करना कठिन हो गया.

शिक्षकों का वेतन रोकने की धमकी

उन्होंने कहा कि पैसा नहीं होने पर जिला और प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों द्वारा प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाया जा रहा है. आरोप है कि अपने खर्च पर भोजन नहीं चलाने वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है. कुछ शिक्षकों का वेतन भी रोके जाने की धमकी भी दी गई है.

अपने खर्च पर एमडीएम चलाने को मजबूर शिक्षक

संघ के अनुसार, कई विद्यालयों में प्रधानाध्यापक अब तक अपनी जेब से मध्याह्न भोजन के संचालन पर खर्च कर चुके हैं. शिक्षकों का दावा है कि कुछ स्कूलों में यह राशि 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच गई है. इसके बावजूद बकाया भुगतान को लेकर प्रधानाध्यापकों पर दबाव बढ़ता जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब विभाग की ओर से कुकिंग कॉस्ट की राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है, तो वे कब तक अपने खर्च पर योजना चलाते रहेंगे? उनका कहना है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी विभाग की है, लेकिन राशि के अभाव में इसका आर्थिक बोझ शिक्षकों पर डालना उचित नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट का हवाला देने पर भी नाराजगी

शिक्षकों ने आरोप लगाया कि मध्याह्न भोजन बंद नहीं करने के लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी का हवाला दिया जाता है. उनसे कहा जाता है कि योजना किसी भी परिस्थिति में बंद नहीं होनी चाहिए. इस पर शिक्षकों का सवाल है कि क्या सुप्रीम कोर्ट बिना राशि उपलब्ध कराये शिक्षकों को अपनी जेब से भोजन का खर्च उठाने का निर्देश देता है. संघ का कहना है कि योजना का संचालन जारी रखने के लिए आवश्यक राशि समय पर उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है. शिक्षकों को कार्रवाई की धमकी देकर निजी खर्च पर भोजन बनवाना समस्या का समाधान नहीं है.

निदेशक को भेजा पत्र

अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस मामले को लेकर पिछले दिनों राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक को पत्र भेजा था. संघ का कहना है कि अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन का निर्णय लिया गया है. संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनूप केशरी, महासचिव राम मूर्ति ठाकुर, संगठन महामंत्री असादुल्लाह, कोषाध्यक्ष संतोष कुमार तथा प्रवक्ता नसीम और सलीम सहाय तिग्गा सहित अन्य पदाधिकारियों ने जल्द राशि उपलब्ध कराने की मांग की है.

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एमडीएम की राशि जारी करने की मांग

संघ ने मांग की है कि एमडीएम संचालन के लिए आवश्यक राशि तत्काल जारी की जाए और जिन प्रधानाध्यापकों ने अपने खर्च पर भोजन संचालित कराया है, उनके बकाये का भुगतान आठ नवंबर तक किया जाए. ऐसा नहीं होने पर नौ नवंबर से राज्यभर के संबंधित विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बंद कर दिया जाएगा.

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