Sunday, 20 September 2026
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टाटा संस में चेयरमैन की कुर्सी पर फिर घमासान! चंद्रशेखरन की नियुक्ति को ट्रस्ट्स ने बताया गैरकानूनी..

INT News20 September 2026 at 06:53 pm

जमशेदपुर: टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की दोबारा चेयरमैन नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के बोर्ड के बीच विवाद बढ़ गया है. टाटा संस के बोर्ड ने 17 सितंबर को चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया था. बोर्ड में प्रस्ताव के पक्ष में 4 और विरोध में 1 वोट पड़ा. इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रस्ताव कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में तय शर्तों को पूरा नहीं करता.

ट्रस्ट्स ने कहा- जरूरी समर्थन नहीं मिला

टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस के नियमों के तहत चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के बहुमत का सकारात्मक समर्थन जरूरी है. बोर्ड में ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशक हैं. ट्रस्ट्स के मुताबिक इनमें से एक निदेशक ने प्रस्ताव के पक्ष में और दूसरे ने विरोध में मतदान किया. इसलिए जरूरी सकारात्मक समर्थन की शर्त पूरी नहीं हुई. ट्रस्ट्स ने इसी आधार पर प्रस्ताव को कानूनी प्रभावहीन बताया है.

कास्टिंग वोट पर भी ट्रस्ट्स को आपत्ति

टाटा ट्रस्ट्स ने बोर्ड बैठक में इस्तेमाल किये गये कास्टिंग वोट के तर्क को भी खारिज किया है. ट्रस्ट्स का कहना है कि चेयरमैन का निर्णायक मत सामान्य तौर पर पूरे बोर्ड में बराबरी की स्थिति में लागू होता है. उनके अनुसार यह विशेष शर्त को पूरा करने के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की आवश्यक सहमति का विकल्प नहीं हो सकता. ट्रस्ट्स ने कहा कि इसे बोर्ड में गतिरोध की स्थिति मानना भी सही नहीं है.

साइरस मिस्त्री मामले का भी दिया हवाला

टाटा ट्रस्ट्स ने अपने ताजा बयान में साइरस मिस्त्री विवाद का भी उल्लेख किया है. ट्रस्ट्स के अनुसार टाटा संस ने पहले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के विशेष मतदान अधिकारों का बचाव किया था और अदालत ने भी उन प्रावधानों को बरकरार रखा था. ट्रस्ट्स का तर्क है कि पहले जिन नियमों को कंपनी ने वैध बताया था, उन्हीं नियमों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

टाटा संस की ओर से 17 सितंबर को जारी बयान में कहा गया था कि बोर्ड के आग्रह पर चंद्रशेखरन ने दोबारा चेयरमैन पद के लिए विचार करने पर सहमति दी और इसके बाद बोर्ड ने बहुमत से उनके पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को मंजूरी दी. इस घटनाक्रम के बीच टाटा संस बोर्ड ने आरबीआई की लिस्टिंग संबंधी आवश्यकताओं के अनुपालन की दिशा में भी कदम उठाने का फैसला किया है.