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खेल सामान बनाने में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, मोदी कैबिनेट ने 1,856 करोड़ की योजना को दी मंजूरी

INT News28 October 2026 at 06:24 pm

Khelo India: भारत को खेल सामान के निर्माण का बड़ा वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ को मंजूरी दे दी गई है. इस योजना पर वर्ष 2026 से 2033-34 तक कुल 1,856.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

सरकार का फोकस इस योजना के जरिए देश में खेल सामान का उत्पादन बढ़ाने, नई तकनीक को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में मजबूत बनाने पर है. योजना के तहत रिसर्च, इनोवेशन, स्किल डेवलपमेंट, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और निर्यात को भी बढ़ावा दिया जाएगा.

खेल सामान के लिए बनाए जाएंगे खास मैन्युफैक्चरिंग जोन

योजना की सबसे अहम पहल Sports Goods Manufacturing Zones (SGMZs) का विकास है. इन जोन में खेल सामान बनाने वाली कंपनियों के साथ उनके सप्लायर, टेस्टिंग सेंटर, डिजाइन और प्रोटोटाइपिंग सेंटर तथा दूसरी सहायक इकाइयों को एक ही जगह पर विकसित किया जाएगा.

इन जोन को मौजूदा औद्योगिक ढांचे के साथ जोड़कर विकसित करने की योजना है. इसके लिए BHAVYA Scheme और NICDC Industrial Parks जैसी मौजूदा व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे कंपनियों को उत्पादन से लेकर टेस्टिंग और सप्लाई चेन तक एक बेहतर इकोसिस्टम मिल सकेगा.

निवेश और उत्पादन बढ़ाने पर खास जोर

सरकार खेल सामान के क्षेत्र में नई कंपनियों और बड़े घरेलू एवं विदेशी निर्माताओं को निवेश के लिए आकर्षित करना चाहती है. इसके लिए योजना में Anchor Investment Support का प्रावधान किया गया है.

इसके तहत बड़े निर्माता, ब्रांड और रिटेल चेन देश में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित होंगे. वहीं Turnover Linked Support के जरिए ज्यादा उत्पादन, क्षमता विस्तार और लगातार मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा. इन दोनों मदों के लिए कुल 1,130 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

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MSME और पुराने क्लस्टर को भी मिलेगा सहारा

खेल सामान के कारोबार में MSME सेक्टर की बड़ी भूमिका को देखते हुए योजना में छोटे और मध्यम उद्यमों पर भी ध्यान दिया गया है. मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को अपग्रेड करने के लिए मदद दी जाएगी.

इसके तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर और साझा बुनियादी ढांचे जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे छोटे निर्माताओं को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा और उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.

इंटरनेशनल सर्टिफिकेशन के लिए 105 करोड़

भारतीय खेल सामान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत जगह दिलाने के लिए उसकी गुणवत्ता और प्रदर्शन मानकों को बेहतर करना भी योजना का अहम हिस्सा है.

सरकार निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से जरूरी सर्टिफिकेशन हासिल करने और उन्हें रिन्यू कराने में सहायता देगी. इसके लिए 105 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इससे भारतीय कंपनियों के उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ने के साथ उन्हें विदेशी बाजारों में प्रवेश करने में भी आसानी होगी.

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रिसर्च और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा

खास बात: इस योजना के लिए कुल ₹1,856.67 करोड़ मंजूर किए गए हैं. इसमें निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए ₹1,130 करोड़ तथा अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन के लिए ₹105 करोड़ का प्रावधान है. बाकी मदों के लिए अलग-अलग राशि का विवरण दिए गए लेख में उपलब्ध नहीं है.

योजना में खेल उपकरणों, नए मटेरियल, प्रोटेक्टिव गियर और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीक पर रिसर्च को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए प्रमुख शैक्षणिक और शोध संस्थानों में Centres of Excellence स्थापित किए जाएंगे.

रिसर्च को Anusandhan National Research Foundation के साथ जोड़कर भी आगे बढ़ाया जाएगा. वहीं Startup India के तहत स्टार्टअप्स को नए प्रोडक्ट और तकनीक विकसित करने, उनकी टेस्टिंग और कमर्शियल लॉन्च में मदद मिलेगी.

युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर

खेल सामान बनाने वाला उद्योग रोजगार देने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है. इसी को देखते हुए सरकार इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से युवाओं को प्रशिक्षित करने पर भी जोर देगी.

इसके लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और संबंधित उद्योगों के साथ मिलकर स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम चलाए जाएंगे. इससे कंपनियों को प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी. वहीं सरकार भारतीय खेल सामान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमोट करने के लिए ब्रांडिंग, आउटरीच और मार्केट डेवलपमेंट पर भी काम करेगी. इसके लिए Export Promotion Mission का सहारा लिया जाएगा.

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