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झारखंड HC से 13 चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को राहत, 8 सप्ताह में प्रमोशन पर फैसला लेने का निर्देश

INT News28 October 2026 at 11:27 pm

रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने कल्याण विभाग के 13 चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को प्रमोशन के मामले में बड़ी राहत दी है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि जब विभाग ने तृतीय श्रेणी के पदों पर प्रमोशन के लिए सीमित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित ही नहीं की, तो केवल परीक्षा कराने के लिए मांग भेजे जाने के आधार पर कर्मचारियों का प्रमोशन नहीं रोका जा सकता. अदालत ने कर्मचारियों के प्रमोशन के दावे को खारिज करने संबंधी 30 अक्टूबर 2020 के आदेश को रद्द कर दिया है.

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड की जांच करने और कर्मचारियों के अन्य शर्तों के अनुसार योग्य पाये जाने पर आठ सप्ताह के भीतर प्रमोशन का औपचारिक आदेश जारी करने का निर्देश दिया है.

2019 में भेजी गयी मांग, लेकिन परीक्षा नहीं हुई

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि विभाग ने वर्ष 2019 में सीमित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित कराने के लिए मांग भेजी थी, लेकिन इसके बाद परीक्षा नहीं हुई. कर्मचारियों की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2026 में पहली बार ऑनलाइन परीक्षा कराने की प्रक्रिया तय की गयी.

राज्य सरकार की ओर से भी इस बात से इनकार नहीं किया गया कि वर्ष 2019 में मांग भेजे जाने के बाद अब तक सीमित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित नहीं हुई है. अदालत ने कहा कि जब परीक्षा हुई ही नहीं और उसे कराने की प्रक्रिया भी वर्षों तक तय नहीं की गयी, तो केवल मांग भेजे जाने का हवाला देकर कर्मचारियों का प्रमोशन दावा खारिज करना उचित नहीं है.

समान स्थिति वाले कर्मचारियों को प्रमोशन देने का भी हवाला

कर्मचारियों ने अदालत में दावा किया कि कल्याण विभाग में समान स्थिति वाले अन्य कर्मचारियों को प्रमोशन दिया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि विभाग में कई पद खाली हैं, जिन पर प्रमोशन की संभावना है.

प्रार्थियों के अनुसार, प्रमंडल कार्यालयों में टाइपिस्ट के 10 पद, आवासीय विद्यालयों में 62 पद और प्रखंड कल्याण कार्यालयों में 118 पद सहित सुपरवाइजर और अन्य पद रिक्त हैं. अदालत ने गौर किया कि राज्य सरकार की ओर से समान स्थिति वाले कर्मचारियों को प्रमोशन दिये जाने के दावे को प्रभावी तरीके से खारिज नहीं किया गया.

अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच कर उनकी पात्रता के आधार पर आठ सप्ताह के भीतर आवश्यक निर्णय लिया जाये.

पहले भी हाइकोर्ट पहुंचे थे कर्मचारी

रामावतार सिंह मुंडा और अन्य कर्मचारियों ने प्रमोशन की मांग को लेकर पहले भी हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. याचिका संख्या 1811/2018 में अदालत ने 5 नवंबर 2018 को सुनवाई के बाद मामले का निपटारा करते हुए कर्मचारियों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष नया अभ्यावेदन देने की छूट दी थी.

इसके बाद कर्मचारियों ने संयुक्त अभ्यावेदन दिया. विभाग ने 30 अक्टूबर 2020 को आदेश जारी कर कहा कि चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से नियुक्ति या प्रमोशन के लिए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को मांग भेजी जा चुकी है. इसी आधार पर कर्मचारियों का दावा खारिज कर दिया गया था. अब हाइकोर्ट ने उस आदेश को रद्द करते हुए पात्र कर्मचारियों को प्रमोशन देने की प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया है.