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नहीं रहे 'बाबूजी भंडारा करा दो' कहने वाले रमाशंकर गुप्ता, हरिद्वार में संदिग्ध हालात में हुई मौत

उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार में हर की पैड़ी पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बीच सालों से गूंजने वाली आवाज 'भंडारा कर दो बाबूजी...' अब हमेशा के लिए खामोश हो गई है। शिवसेतु पर श्रद्धालुओं से जरूरतमंदों के लिए भंडारा कराने की अपील करने वाले और सोशल मीडिया पर 'भंडारा किंग' के नाम से मशहूर रमाशंकर गुप्ता का संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया है। उनका शव गुरुवार को हर की पैड़ी क्षेत्र स्थित एक सार्वजनिक शौचालय से बरामद हुआ। पुलिस ने शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाकर परिजनों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि यदि कोई वारिस सामने नहीं आता है तो नियमानुसार 72 घंटे बाद शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल भंडारा किंग को नहीं पहचान पाई और उसने शव को अज्ञात में जिला अस्पताल में रखवा दिया।मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई निवासी रमाशंकर गुप्ता कई वर्ष पहले हरिद्वार आकर बस गए थे। शुरुआत में उन्होंने हर की पैड़ी क्षेत्र में छोटे-मोटे काम किए और बाद में उन्होंने हर की पैड़ी के आसपास के भोजनालयों से खाना लेकर श्रद्धालुओं के सहयोग से गरीबों और साधु-संतों के लिए भंडारा कराने का काम शुरू किया। इस दौरान इसी काम से मिलने वाले कमीशन से उनका गुजारा होता था।गुप्ता की आवाज बन गई थी शिवसेतु की पहचानगुप्ता हर दिन शिवसेतु पर बैठकर हाथ जोड़कर श्रद्धालुओं से भंडारा कराने की अपील करते थे। उनकी खास शैली में लगाई जाने वाली आवाज 'भंडारा कर दो बाबूजी... 100 में पांच बाबा, 200 में 11 बाबा खाएंगे' समय के साथ शिवसेतु की पहचान बन गई थी। एक सोशल मीडिया वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें देशभर में 'भंडारा किंग' के नाम से पहचान मिली। श्रद्धालु भी उन्हें देखते ही रुक जाते और अपनी श्रद्धा के अनुसार सहयोग करते थे। दुकानदार बोले- उनकी आवाज सुन श्रद्धालु रूक जाते थेसुभाषघाट पर होटल चलाने वाले और समाजसेवी कमल खड़का ने बताया कि रमाशंकर बेहद सरल, मिलनसार और मेहनती व्यक्ति थे। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन हर की पैड़ी क्षेत्र में बिताया और जरूरतमंदों के लिए भोजन जुटाने को ही अपना काम बना लिया था। खड़का ने कहा कि उन्होंने अपने व्यवहार और सेवा भाव से हजारों श्रद्धालुओं के बीच अलग पहचान बनाई थी। वहीं दुकानदार कालू वर्मा ने कहा कि उनकी आवाज सुनते ही श्रद्धालु रुक जाते थे और अपनी श्रद्धा के अनुसार भंडारा कराते थे। इससे रोजाना कई गरीब और साधु-संत भोजन कर पाते थे।पुलिस बोली- परिजनों का पता लगाने की कोशिश जारीउधर नगर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि सार्वजनिक शौचालय से मिले अज्ञात शव की पहचान रमाशंकर गुप्ता के रूप में हुई है। उनके परिजनों का पता लगाया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।