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10 लाख से शुरू किया कारोबार, चार साल में 1.50 करोड़ का टर्नओवर; अब 100 करोड़ पर खुशबू की नजर

Bihar women success story कुछ करने का जज्बा हो तो सीमित संसाधन भी मंजिल की राह नहीं रोकते. पटना की 37 वर्षीय खुशबू कुमारी इसकी एक बानगी हैं. वर्ष 2022 में करीब 10 लाख रुपये की परियोजना लागत से डिटर्जेंट और क्लीनिंग प्रोडक्ट बनाने का कारोबार शुरू किया. उस समय उनके साथ महज पांच कर्मचारी थे. आज ‘दिव्यांश एंटरप्राइजेज’ का वार्षिक टर्नओवर करीब 1.50 करोड़ रुपये है और इससे करीब 100 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार और आजीविका का अवसर मिल रहा है.
नौ लाख के ऋण से शुरू हुई थी पहल
कारोबार शुरू करने में खुशबू को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का सहयोग मिला. पंजाब नेशनल बैंक से उन्हें नौ लाख रुपये का शुरुआती ऋण मिला. परियोजना में उनका योगदान 10 प्रतिशत था, जबकि पीएमईजीपी के तहत 25 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी का प्रावधान था. योजना के तहत उन्हें उद्यमिता और कौशल विकास का प्रशिक्षण भी मिला. इसमें कारोबार की योजना, उत्पादन, वित्तीय प्रबंधन, मार्केटिंग और ग्राहक प्रबंधन से जुड़ी जानकारी दी गयी. इससे उन्हें शुरुआती कारोबार को व्यवस्थित तरीके से चलाने में मदद मिली.
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स्थानीय बाजार से हुई शुरुआत
खुशबू ने डिटर्जेंट और फर्श की सफाई के उत्पादों के साथ कारोबार शुरू किया. शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती नये ब्रांड के प्रति ग्राहकों का भरोसा कायम करना था. बाजार में पहले से मौजूद बड़े ब्रांडों के बीच अपनी पहचान बनाना, कच्चे माल की व्यवस्था और गुणवत्ता बरकरार रखना भी आसान नहीं था. उन्होंने इन चुनौतियों के बीच उत्पाद की गुणवत्ता और ग्राहकों की जरूरत को प्राथमिकता दी. पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर काम किया और धीरे-धीरे वितरकों, थोक विक्रेताओं और खुदरा दुकानदारों का नेटवर्क तैयार किया. स्थानीय बाजार से शुरू हुआ कारोबार अब बिहार के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच चुका है. कंपनी के उत्पाद 500 मिलीलीटर, एक लीटर, पांच लीटर और 50 लीटर की पैकिंग में उपलब्ध हैं. इनकी बिक्री डीलरों और दुकानदारों के अलावा सीधे ग्राहकों और संस्थानों को भी की जाती है.
कारोबार बढ़ा तो रोजगार के अवसर भी बढ़े
उत्पादन और बिक्री बढ़ने के साथ कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ती गयी. पांच कर्मचारियों से शुरू हुई इकाई से आज करीब 100 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम मिल रहा है. उद्यम में महिलाओं और पुरुषों, दोनों को अवसर दिया जाता है. स्थानीय लोगों को रोजगार देने पर भी जोर है.
अब 11.78 करोड़ की परियोजना पर काम
कारोबार को अगले स्तर पर ले जाने के लिए खुशबू को वर्ष 2026 में पीएमईजीपी-2 के तहत एक करोड़ रुपये का ऋण मिला. इसके बाद उन्होंने बड़े औद्योगिक संयंत्र की दिशा में कदम बढ़ाया है. बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) के माध्यम से उन्हें करीब 30 हजार वर्गफुट जमीन उपलब्ध करायी गयी है. यहां आधुनिक मशीनों और आवश्यक सुविधाओं से लैस विनिर्माण इकाई विकसित करने की योजना है. इस परियोजना की कुल लागत 11 करोड़ 78 लाख 43 हजार रुपये है. इसके लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 10 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया है.
बिहार से बाहर बाजार बनाने की तैयारी
नयी इकाई शुरू होने के बाद उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नये उत्पाद विकसित करने की योजना है. खुशबू पहले बिहार के सभी जिलों में अपने वितरण नेटवर्क को मजबूत करना चाहती हैं. इसके बाद झारखंड समेत दूसरे राज्यों में बाजार बनाने की तैयारी है. अगले पांच वर्षों में उनका लक्ष्य 100 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर हासिल करना है. प्रस्तावित विनिर्माण इकाई के जरिये करीब 1,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने की भी योजना है.खुशबू कुमारी कहती हैं कि सफलता के लिए शुरुआत बड़ी होना जरूरी नहीं, लक्ष्य बड़ा होना चाहिए. उनके लिए वर्ष 2022 में शुरू हुई यह छोटी-सी इकाई अब बड़े औद्योगिक उद्यम की ओर बढ़ रही है.
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