national
शिवा शर्मा हत्याकांड में कैसे आया Z गैंग का नाम? श्रद्धा दुबे का इससे क्या है कनेक्शन?

लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे का मुंबई के Z गैंग से क्या संबंध हैं? लखनऊ पुलिस इस सवाल के जवाब की तलाश कर रही है. दरअसल, गुरुवार को श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर को नागपुर से लखनऊ लाया गया. जहां STF और लखनऊ पुलिस तीनों से शिवा शर्मा हत्याकांड मामले में पूछताछ कर रही है. श्रद्धा दुबे के जेड गैंग से कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं.
शिवा शर्मा हत्याकांड में कैसे आया Z गैंग का नाम?
शिवा शर्मा की मौत के मामले में गिरफ्तारी से पहले श्रद्धा पुलिस को चकमा देती रही. पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी, इस दौरान करीब 11 दिनों तक वह अपनी लोकेशन बदलती रही. कभी रायबरेली, कभी नेपाल तो कभी आगरा में उसके होने की जानकारी सामने आती रही आखिरकार 20 अक्टूबर को पुलिस ने नागपुर के एक फ्लैट से श्रद्धा दुबे, रश्मि और दानिश को गिरफ्तार कर लिया.
मीडिया रिपोर्ट में पुलिस से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि श्रद्धा को नागपुर बुलाने, फ्लैट में ठहरने और फिर एक सेफ हाउस में ठहराने के लिए Z गैंग ने ही भरोसा दिया था, लेकिन सेफ हाउस पहुंचने से पहले ही पुलिस को उसकी लोकेशन की खबर हो गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले का एक और पहलू श्रद्धा और Z गैंग के सरगना जुल्फिकार के कथित रिश्ते से जुड़ा है. सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि दोनों के बीच अफेयर था.
Z गैंग से कैसे जुड़ी थी श्रद्धा दुबे
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रद्धा दुबे और उसके गैंग के सदस्य कथित तौर पर फेसटाइम के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे. रिपोर्ट के अनुसार जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क की गतिविधियों से जुड़े अहम सबूत होने का दावा किया है. बताया जा रहा है कि डील से जुड़ी बातचीत भी इसी माध्यम से की जाती थी.
रिपोर्ट के अनुसार, गैंग ने लखनऊ और उत्तर प्रदेश में अपने कामकाज की जिम्मेदारी श्रद्धा दुबे को सौंपी थी. आरोप है कि उसे बॉलीवुड में हीरोइन बनाने का लालच देकर लोगों को ब्लैकमेल करने और उनसे जबरन पैसे वसूलने के काम में लगाया गया था. यह भी आरोप सामने आया है कि लखनऊ के कुछ बार में श्रद्धा के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई और दूसरे गैरकानूनी काम कराए जा रहे थे.
ये भी पढ़ें: शिवा शर्मा हत्याकांड: नेपाल जाने से लेकर कैश तक पर श्रद्धा दुबे खामोश, हर सवाल पर बोली- मेरे वकील से बात करिए
क्या है Z गैंग
‘Z-कंपनी’ का नाम पहली बार तब चर्चा में आया, जब मुंबई के विले पार्ले पूर्व इलाके में म्हाडा की करीब 4 करोड़ रुपये की नाली और फुटपाथ की मरम्मत परियोजना के लिए काम कर रहे एक ठेकेदार को कथित तौर पर धमकी मिली.
उस समय क्राइम ब्रांच के डीसीपी नवनाथ ढवले ने बताया कि ठेका नहीं मिलने से नाराज कुछ लोगों ने एक ठेकेदार से कहा कि वह परियोजना का काम उनके जरिए करवाए या फिर 25 लाख रुपये दे. ऐसा नहीं करने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई थी.
इस घटना के बाद ‘Z-कंपनी’ नाम का एक कथित आपराधिक गिरोह चर्चा में आया. इसकी तुलना 90 के दशक में मुंबई में दहशत फैलाने और जबरन पैसे वसूलने के लिए बदनाम दाऊद इब्राहिम की D-कंपनी से की जाने लगी. आरोप था कि दाऊद इब्राहिम की तरह यह गिरोह भी शहर में अपना दबदबा बनाने और लोगों के बीच डर पैदा करने की कोशिश कर रहा था.
गैंग पर मुंबई के पश्चिमी इलाकों में लोगों से जबरन पैसे वसूलने, कारोबारियों को धमकाने और हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोप हैं. इसके अलावा, इस गिरोह के तार नशीले पदार्थों और सोने की तस्करी से जुड़े होने की बात भी सामने आई है. गैंग पर रेव पार्टियों और बड़े लोगों की पार्टियों में भी नशीले पदार्थ सप्लाई करने का आरोप है.
ताकत और रसूख दिखाकर लोगों में डर पैदा करता था Z गैंग
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह ठेकेदारों और कारोबारियों को निशाना बनाकर उनसे मोटी रकम वसूलने की कोशिश करता था. गैंग के सदस्य महंगी गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ वीडियो और रील्स बनाकर इंस्टाग्राम समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते थे. पुलिस के मुताबिक, इसके जरिए गैंग अपनी ताकत और रुतबा दिखाकर लोगों में डर पैदा करने की कोशिश करता था, ताकि उन पर रंगदारी देने का दबाव बनाया जा सके. Z गैंग के सदस्य सोशल मीडिया पर महंगी गाड़ियों के काफिलों के वीडियो और रील्स पोस्ट कर अपने रुतबे और ताकत का प्रदर्शन भी करते थे.
कैसे हुआ Z गैंग का भंडाफोड़
ठेकेदार की शिकायत के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. पुलिस ने बच्चों के खेलने वाले नकली नोटों और कुछ असली नोटों की मदद से एक ऐसा बैग तैयार किया, जिसमें 25 लाख रुपये होने का आभास हो रहा था. 27 जुलाई 2026 को तय मुलाकात के दौरान जैसे ही आरोपियों ने बैग उठाने की कोशिश की, क्राइम ब्रांच की टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. बाद में इस मामले में कथित मुख्य आरोपी सिकंदर तंवर को भी गिरफ्तार किया गया. इस तरह मामले में कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी. इस मामले की जांच के दौरान मुंबई क्राइम ब्रांच ने Z गैंग का भंडाफोड़ किया.
ये भी पढ़ें: मुस्लिम देशों से दोस्ती बढ़ा रहा पाकिस्तान, मक्का पैक्ट के बाद दोहा में किया बद्र समझौता; दोनों में क्या है अंतर?
कौन है Z गैंग का सरगना
मुंबई क्राइम ब्रांच ने जांच के आधार पर बताया कि जुल्फिकार यासीन बेहलीम और उसके भाई मोहसिन यासीन बेहलीम का नाम कथित ‘Z-कंपनी’ से जुड़ा है. पुलिस के मुताबिक, जुल्फिकार इस गिरोह का सरगना है और वह इसी नाम से अपने गैंग का प्रचार करता था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जुल्फिकार और मोहसिन के खिलाफ हत्या, गोलीबारी, रंगदारी वसूली और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले दर्ज हैं. जुल्फिकार के खिलाफ हत्या के तीन मामले दर्ज होने का दावा किया गया है. अगस्त 2026 में इस मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी.