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भारत बना यूरोप का दूसरा बड़ा हथियार सप्लायर, चीन के दुश्मन को दी ब्रह्मोस; हथियार खरीदने वाला देश कैसे बना विक्रेता

INT News23 October 2026 at 01:54 pm

भारत ने एक साल में 8271 करोड़ से ज्यादा के डिफेंस साजो-समान यूरोप को बेचे हैं. इसमें गोला-बारूद, आर्टिलरी और मोर्टार शेल शामिल हैं. दुनिया भर के आयात और निर्यात के आधिकारिक वेबसाइट ट्रेड डेटा मॉनिटर के मुताबिक, यूरोप को बीते 4 साल में रक्षा निर्यात 1600 फीसद बढ़ा है. यही नहीं एक और बड़ा माइलस्टोर तब सामने आया, जब 22 अक्टूबर को ब्रह्मोस बनाने वाली कंपनी के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जयतीर्थ जोशी ने ANI को दिए इंटरव्यू में बताया कि फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम से भी इस मिसाइल की मांग हो रही है. इस स्टोरी में जानते हैं कि हथियार का सबसे बड़ा खरीदार भारत कैसे सप्लायर बना, भारत कौन-कौन से हथियार किसे बेच रहा है?

भारत ने 6 साल जितने 2 साल में हथियार बेचे

भारत का रक्षा उद्योग (Defence Industry) यूरोप और यूक्रेन के सहयोगी देशों के साथ-साथ इजराइल को भी हथियारों की सप्लाई कर रहा है. मार्च 2026 तक के दो साल में भारत ने इजराइल को करीब 630 करोड़ रुपये के गोला-बारूद और विस्फोटक भेजे. इसमें तोप के गोले और मोर्टार के गोले शामिल हैं. खास बात यह है कि दो साल में इजराइल को भेजे गए हथियारों की कीमत उतनी ही है, जितनी इससे पहले के छह साल में कुल एक्सपोर्ट की थी.

चीन के दुश्मन देश फिलीपींस को ब्रह्मोस बेच रहा भारत

19 अप्रैल 2024 को भारत ने साउथ चाइना सी में चीन को टक्कर दे रहे फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की पहली खेप सौंपी थी. दरअसल, फिलीपींस पहला ऐसा देश है, जिसे भारत ने ब्रह्मोस बेचा है. जनवरी 2022 में भारत से फिलीपींस ने ब्रह्मोस मिसाइल के लिए 375 मिलियन डॉलर यानी 3130 करोड़ रुपए की डील की थी.

भारत से सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश म्यांमार

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, साल 2000 से 2023 के बीच म्यांमार भारत से सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश है. भारत से सबसे ज्यादा 31% हथियार म्यांमार एक्सपोर्ट होते हैं.

जंग की वजह से अब रूस भी भारत में बने गोला-बारूद खरीद रहा है. 10 मई 2024 को ‘लाइव मिंट’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि बीते 6 से 8 महीने में रूस ने भारत से 33 हजार करोड़ रुपए का गोला-बारूद और रक्षा से जुड़े दूसरे सामान खरीदे हैं. सबसे बड़ी बात ये है कि भारत को रूस ने ये पेमेंट भारतीय करेंसी रुपए में किया है. हालांकि, इसका कोई आधिकारिक डेटा नहीं है.

भारत के तेजस और ब्रह्मोस को खरीदने की मांग क्यों बढ़ी?

अगस्त 2022 में भारत के रक्षा मंत्रालय की ओर से बताया गया कि तेजस भारत में बना हल्का लड़ाकू विमान है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इसे बनाती है. सरकार के मुताबिक, मलेशिया ने तेजस में दिलचस्पी दिखाई. अर्जेंटीना, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों ने भी इस विमान में रुचि दिखाई.

वहीं, ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. यानी यह आवाज की रफ्तार से भी तेज चलती है. इसे जमीन, जहाज और पनडुब्बी जैसे अलग-अलग माध्यमों से दागने की क्षमता विकसित की गई है. फिलीपींस ने समुद्र के रास्ते होने वाले हमलों से बचाव के लिए भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का समझौता किया.

चीन, रूस और दक्षिण कोरिया के फाइटर जेट को तेजस ने पछाड़ा

दिसंबर 2022 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आर. माधवन ने कहा था कि मलेशिया के सामने तेजस फाइटर जेट की जगह और भी कई ऑप्शन थे. इनमें चीन के JF-17 जेट, दक्षिण कोरिया के FA-50 और रूस के MiG-35 के साथ-साथ याक-130 शामिल थे. इसके बावजूद मलेशिया ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है.

भारत में हथियार बनाने की मजबूत इंडस्ट्री

स्वीडन की संस्था सिपरी के वरिष्ठ रिसर्चर सिमोन वेजमैन के मुताबिक, यूक्रेन की जरूरतों और यूरोपीय देशों की हथियारों की मांग पूरी करने के लिए भारत से गोला-बारूद खरीदा जा रहा है. भारत में हथियार बनाने का मजबूत और डेवलप इंडस्ट्री है.

वहीं, किंग्स कॉलेज लंदन के विशेषज्ञ वॉल्टर लाडविग का कहना है कि भारतीय कंपनियां सीधे यूक्रेन को हथियार नहीं बेच रही हैं. वे यूरोपीय देशों को हथियार बेचती हैं.

भारत का हथियार दूसरे देशों के मुकाबले सस्ता

सितंबर 2026 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत विदेशी कंपनियों के मुकाबले करीब एक-चौथाई कीमत पर कुछ मिसाइलें उपलब्ध करा सकता है.

राजेश कुमार सिंह ने कहा, "ब्रह्मोस भारत के सबसे चर्चित और मांग वाले रक्षा उत्पादों में से एक है. हम दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों को इसकी सप्लाई कर रहे हैं या इस दिशा में बातचीत चल रही है. तोपों, ट्रक पर लगने वाली तोप सिस्टम और डीआरडीओ की तकनीक पर आधारित प्राइवेट कंपनियों के रक्षा उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है. आकाश मिसाइल में भी कई देशों ने दिलचस्पी दिखाई है. हमारी सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम कुछ मिसाइलें विदेशी कंपनियों के मुकाबले करीब एक-चौथाई कीमत पर उपलब्ध करा सकते हैं. जैसे-जैसे हमारे बड़े रक्षा उपकरण तैयार होंगे और उनकी क्षमता साबित होगी, उनकी मांग भी बढ़ेगी.’’